सीटीसी स्क्वाड द्वारा समय पर मामलों की रिपोर्ट जोनों/मंडलों को न देना-डील और अवैध वसूली की आशंका
रेलवे बोर्ड के #CTC/Squad (सेंट्रल टिकट चेकिंग स्क्वॉड) का मुख्य कार्य रनिंग ट्रेनों में ऑन बोर्ड इस बात को सुनिश्चित करना है कि यात्री वैध टिकट पर ही यात्रा करें, यदि कोई कूटरचित/फर्जी या अनियमित यात्रा अधिकार पत्र के साथ यात्रा करते हुए पाया जाए तो संबंधित की खिलाफ नियमानुसार कारवाई करे, और यदि इसमें रेल कर्मचारियों के संलिप्तता की पुष्टि हो, तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध रेलवे नियमावली के अनुसार त्वरित और कड़ी कारवाई सुनिश्चित करे। अर्थात् रेल राजस्व को यात्रा के माध्यम से नुकसान पहुंचाने वालों की धरपकड़ करना और सजा दिलवाना सीटीसी प्रमुख कार्य है।
लेकिन पिछले कुछ सालों से यह स्क्वॉड अवैध उगाही का केंद्र बन गया! बोर्ड में ही पदस्थ अनेकों स्टाफ का मानना है कि जब #OSD/CTC Squad से लेकर टीम के सदस्यों के चयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी रहेगी, तो स्क्वॉड का उद्देश्य कैसे पूरा होगा? इस प्रकार की कमियों के लिए संबंधित अधिकारी समान रूप से दोषी रहे हैं। इन लोगों को केवल हमाली करना है या फिर अपने लिए किसी घोसले का जुगाड़ करना है। स्वाभाविक है कि रेल का मुख्य उद्देश्य कैसे पूरा होगा!
CTC की अकर्मण्यता और संदिग्ध भूमिका का उदाहरण
04.12.2024 को लखनऊ जंक्शन से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस को जाने वाली पुष्पक एक्सप्रेस में भुसावल मंडल के दायरे में गाड़ी के प्रवेश करने के दौरान CTC/Squad की टीम ने यात्रियों के टिकटों की जांच की थी, जिसमें लखनऊ जंक्शन से जारी किए गए यात्री प्रति के कुछ #EFT को संदिग्ध पाया गया था, क्योंकि उसमें कूटरचित तरीके से कांट-छांट की गई थी। संदेह होने पर भुसावल डिवीजन के चेकिंग स्टाफ की मदद से EFT को सीज किया गया था।
चूंकि EFT लखनऊ जंक्शन की महिला चेकिंग स्टाफ द्वारा जारी की गई थी, इसलिए मामले की जानकारी सेंट्रल रेलवे भुसावल मंडल द्वारा पूर्वोत्तर रेलवे वाणिज्य मुख्यालय गोरखपुर (#NER-HQ) को दी गई, जिस पर कड़ा एक्शन लेते हुए लखनऊ जंक्शन के पूरे छापामार दल को ही भंग कर दिया गया था, और टीम के प्रभारी महेश प्रताप सहित आरोपी चेकिंग स्टाफ पूजा और सृष्टि सिंह को निलंबित करते हुए मेजर पेनाल्टी जारी करके जांच बैठा दी गई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पर्याप्त सबूतों के अभाव में यह जांच पूरी नहीं हो पा रही है, मामले को आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन जांच कब तक चलेगी, इसकी जानकारी न तो पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय को है, और न ही लखनऊ मंडल के संबंधित अधिकारी इस बारे में कुछ बता पा रहे हैं।
इसी क्रम में पता चला है कि CTC/Squad द्वारा अभी तक मामले से संबंधित न तो मूल दस्तावेज लखनऊ मंडल या गोरखपुर मुख्यालय को भेजे गए हैं, और न ही कृत कार्यवाही/रिपोर्ट का विवरण भेजा गया है।
ऐसे में समझा जा सकता है कि रेल राजस्व की चोरी की इतनी बड़ी घटना को कितने हल्के में लिया जा रहा है। सोचनीय बात यह है कि न जाने कब से EFT में कांट-छांट करके रेल राजस्व को चूना लगाया जा रहा होगा और यह केवल एक रेलवे में ही नहीं, बल्कि अन्य रेलों में भी ऐसी ही धोखाधड़ी की जा रही हो सकती है, इसीलिए ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए त्वरित जांच और कड़ी कारवाई करने की आवश्यकता होती है।
घटना को हुए आठ महीने हो चुके हैं, लेकिन CTC/Squad द्वारा इस घटना से संबंधित साक्ष्य और रिपोर्ट अभी तक पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय को यदि नहीं भेजी गई है, तो क्यों न यह माना जाए कि पर्दे के पीछे कहीं संबंधित दोषियों के साथ कोई डील तो नहीं हो चुकी है?
क्या CTC/Squad द्वारा संबंधित यात्रियों से बयान लिया गया था कि उन्होंने EFT के बदले कितना पैसा दिया? उनका नाम, मोबाइल नंबर, और पता क्या लिखित में लिया गया? शायद नहीं, क्योंकि सीटीसी का उद्देश्य संभवतः मामले को सनसनीखेज बनाना था!
और, अब आठ महीने तक जोन/डिवीजन को रिपोर्ट न भेजे जाने से यह संभावना सही साबित हो रही है। ऐसे न जानें कितने मामलों में डील करके रेल राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया होगा, ऐसे कितने मामले सीटीसी के पास पेंडिंग पड़े हैं, इसकी गहराई से जांच-पड़ताल होनी चाहिए!
बोर्ड में कार्यरत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार OSD/CTC पंद्रह साल तक लगातार इस स्क्वाड में रहा और जाते-जाते ऐसे कई मामलों को दबाकर वसूली करने में लगा रहा! अब जब एक और एक्सटेंशन देने से वर्तमान कंट्रोलिंग अथॉरिटी द्वारा मना कर दिया गया तब दुम दबाकर चुपचाप एक और डेपुटेशन पर खिसक गया। इस मामले की रिसर्च जारी है कि इसे सीधे एक और डेपुटेशन कैसे मंजूर किया गया, शीघ्र ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट सामने आएगी।
बहरहाल, जब गंभीर अनियमितता के मामलों को लंबे समय तक दबाकर रखा जाता है, तो संदेह की सुई अपने आप घूमती है। सीटीसी के ऐसे सभी मामलों की छानबीन कंट्रोलिंग अधिकारियों—#EDPM/#DPM—द्वारा स्वयं और तुरंत की जानी चाहिए, और दोषियों पर आवश्यक कारवाई सुनिश्चित करना चाहिए।

