September 4, 2020

डीओपीटी के आदेश से उड़े केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के होश

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समय पूर्व रिटायरमेंट पर केंद्र सरकार के आदेश से छूटा करीब 49 लाख सरकारी कर्मचारियों का पसीना

केंद्र सरकार के एक आदेश ने सभी मंत्रालयों और विभागों में हड़कंप मचा दिया है। लगभग 49 लाख सरकारी कर्मचारियों का पसीना छूट रहा है। खासतौर पर ऐसे कर्मचारी और अधिकारी, जिन्होंने अपनी सेवा के तीन दशक पूरे कर लिए हैं। केंद्र सरकार का आदेश जारी होने के बाद वे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

यही नहीं, इस बार सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि आवधिक समीक्षा को सख्ती से लागू किया जाएगा। जनहित में समय पूर्व रिटायरमेंट कोई पेनाल्टी नहीं है।

सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को जो पत्र भेजा है, उसमें विस्तार से यह बताया गया है कि जनहित में, विभागीय कार्यों को गति देने, डावांडोल अर्थव्यवस्था के चलते और प्रशासन में दक्षता लाने के लिए मूल नियमों फंडामेंटल रूल्स (एफआर) और सीसीएस (पेंशन) रूल्स-1972 में समय पूर्व रिटायरमेंट देने का प्रावधान है।

इस पत्र में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला भी दिया गया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि समय पूर्व रिटायमेंट का मतलब जबरन सेवानिवृत्ति नहीं है।

Office Menorandum of DOP&T

125013/03/2019-Estt.A-IV

Dated:  28.08.2020

Periodic Review of Central Government Employees for strengthening of administration under Fundamental Rule (FR) 56(j)/(I) and Rule 48 of CCS (Pension) Rules, 1972

https://doptcirculars.nic.in/Default.aspx?URL=4mHHdZ9oSWTf%20

डीओपीटी (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) के उपरोक्त पत्र के अनुसार उपयुक्त अथॉरिटी को यह अधिकार है कि वह किसी भी सरकारी कर्मचारी को एफआर 56(जे)/रूल्स-48 (1) (बी), सीसीएस (पेंशन) रूल्स-1972 नियम के तहत रिटायर कर सकता है। बशर्ते वह मामला जनहित के लिए आवश्यक हो।

इस तरह के मामलों में संबंधित कर्मचारी को तीन माह का अग्रिम वेतन देकर रिटायर कर दिया जाता है। कई मामलों में उन्हें तीन महीने पहले अग्रिम लिखित नोटिस भी देने का नियम है। 

ग्रुप ‘ए’ और ‘बी’ में तदर्थ या स्थायी क्षमता में कार्यरत किसी कर्मी ने 35 साल की आयु से पहले सरकारी सेवा में प्रवेश किया है, तो उसकी आयु 50 साल पूरी होने पर या तीस वर्ष सेवा के बाद, जो पहले आती हो, रिटायरमेंट का नोटिस दिया जा सकता है।

अन्य मामलों में 55 साल की आयु के बाद का नियम है। अगर कोई कर्मी ग्रुप ‘सी’ में है और वह किसी पेंशन नियमों द्वारा शासित नहीं है, तो उसे 30 साल की नौकरी के बाद तीन माह का नोटिस देकर रिटायर किया जा सकता है।

एफआर रूल्स-48 (1) (बी) ऑफ सीसीएस (पेंशन) रूल्स-1972 नियम के तहत किसी भी उस कर्मचारी, जिसने तीस साल की सेवा पूरी कर ली है, को भी सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। इस श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल होते हैं, जो पेंशन के दायरे में आते हैं।

ऐसे कर्मियों को रिटायमेंट की तिथि से तीन महीने पहले नोटिस या तीन महीने का अग्रिम वेतन और भत्ते देकर सेवानिवृत्त किया जा सकता है। खास बात है कि इन मामलों में भी जनहित के नियम को देखा जाता है।

आदेश के अनुसार हर विभाग को एक रजिस्टर तैयार करना होगा। इसमें उन कर्मचारियों का ब्योरा रहेगा, जो 50/55 साल की आयु पार कर चुके हैं। इनकी तीस साल की सेवा भी पूरी होनी चाहिए। ऐसे कर्मियों के कामकाज की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

सरकार ने यह विकल्प अपने पास रखा है कि वह जनहित में किसी भी अधिकारी को सेवा में रख सकती है, जिसे उसकी उपयुक्त अथॉरिटी ने समय पूर्व सेवानिवृत्ति पर भेजने के निर्णय की दोबारा समीक्षा करने के लिए कहा हो।

ऐसे मामले में यह बताना होगा कि जिस अधिकारी या कर्मी को सेवा में नियमित रखा गया है, उसने पिछले कार्यकाल में कौन सा विशेष कार्य किया था।

केंद्र ने ऐसे मामलों की समीक्षा के लिए प्रतिनिधि समिति गठित की है। इसमें उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव लीना नंदन और कैबिनेट सचिवालय के संयुक्त सचिव आशुतोष जिंदल को सदस्य बनाया गया है।

आवधिक समीक्षा का समय जनवरी से मार्च, अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर और अक्तूबर से दिसंबर तक तय किया गया है। 

ग्रुप ‘ए’ के पदों के लिए समीक्षा कमेटी का हेड संबंधित सीसीए का सचिव रहेगा। सीबीडीटी, सीबीईसी, रेलवे बोर्ड, पोस्टल बोर्ड एवं टेलीकम्युनिकेशन आदि विभागों में बोर्ड का चेयरमैन कमेटी का हेड बनेगा।

ग्रुप ‘बी’ के पदों के लिए समीक्षा कमेटी के हेड की जिम्मेदारी अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव को सौंपी गई है। अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को कमेटी का प्रमुख बनाया गया है।

सभी केंद्रीय सरकारी सेवाओं की प्रतिनिधि समिति में एक सचिव स्तर का अधिकारी रहेगा, उसका नामांकन कैबिनेट सचिव द्वारा किया जाएगा।

कैबिनेट सचिवालय में एक अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव के अलावा सीसीए द्वारा नामित एक सदस्य भी रहेगा। जिन कर्मियों को समय पूर्व रिटायरमेंट पर भेजा जाएगा, वह आदेश जारी होने की तिथि से तीन सप्ताह के भीतर समिति के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है। इस संबंध में डीओपीटी ने नियमों का सख्ती से पालन का आदेश दिया है।

ज्ञातव्य है कि सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) 1972 के नियम 56(जे) के अंतर्गत 30 साल तक सेवा पूरी कर चुके या 50 साल की उम्र पर पहुंचे अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवा समाप्त की जा सकती है।

संबंधित विभाग से इन अफसरों की जो रिपोर्ट मंगाई जाती है, उसमें भ्रष्टाचार, अक्षमता और अनियमितता के आरोप देखे जाते हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो अधिकारियों को रिटायरमेंट दे दी जाती है। ऐसे अधिकारियों को नोटिस और तीन महीने का वेतन-भत्ता देकर घर भेजा जा सकता है।

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