आरपीएफ में 12-14 घंटे की ड्यूटी से जवान बेहाल: PCSC तक गुहार बेअसर, वेतन कटौती और प्रताड़ना के गंभीर आरोप
राजनांदगांव / नागपुर: नागपुर मंडल, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (#SECR) के अंतर्गत आने वाले रेलवे सुरक्षा बल (#RPF) पोस्ट राजनांदगांव में तैनात जवानों की कार्य-दशाओं और आंतरिक प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों और विभागीय व्हिसलब्लोअर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पोस्ट पर लंबे समय से जवानों से नियमों को ताक पर रखकर प्रतिदिन 12 से 14 घंटे तक ड्यूटी ली जा रही है।
व्यवस्थागत संकट का रूप ले चुकी समस्या
व्हिसलब्लोअर इनपुट के अनुसार, अत्यधिक ड्यूटी का यह संकट केवल राजनांदगांव पोस्ट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय रेल के लगभग सभी जोनों और डिवीजनों की अधिकांश आरपीएफ पोस्टों पर यही स्थिति बनी हुई है। निर्धारित कार्य-घंटों से कहीं अधिक—लगातार 12 से 14 घंटे की ड्यूटी के चलते बल सदस्य शारीरिक और मानसिक रूप से गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। अत्यधिक थकान, अनिद्रा और लगातार तनाव के कारण जवानों के स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उच्च स्तर पर शिकायत के बाद भी नतीजा शून्य
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्य के इस भारी दबाव को लेकर जवानों ने सुरक्षा सम्मेलन के दौरान प्रिंसिपल चीफ सिक्योरिटी कमिश्नर (#PCSC) मुनव्वर खुर्शीद के समक्ष भी अपनी समस्याएं और ग्रीवांस रखी थीं। हालांकि, शीर्ष स्तर पर मामला संज्ञान में लाए जाने के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
अकेले स्टाफ पर भारी दबाव और आर्थिक दंड
आरपीएफ जवानों की शिकायत और आरोपों के अनुसार, अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्टेशनों और प्लेटफॉर्मों पर अक्सर मात्र एक जवान को 12 से 14 घंटे तक तैनात कर दिया जाता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में यदि किसी यात्री का मोबाइल चोरी होता है या ट्रेन में अलार्म चेन पुलिंग (#ACP) की घटना होती है और आरोपी मौके से फरार हो जाता है, तो पूरी जवाबदेही ड्यूटी पर तैनात अकेले जवान पर मढ़ दी जाती है।
सूत्रों का कहना है कि वास्तविक परिस्थितियों और मानवीय सीमाओं की समीक्षा किए बिना जवानों को ‘अर्दली रूम’ में तलब कर कथित तौर पर अपमानित किया जाता है। इतना ही नहीं, दंडात्मक कार्रवाई के नाम पर जवानों का 2 से 7 दिनों का वेतन तक काट लिया जाता है, जिससे उनका मनोबल पूरी तरह टूट रहा है।
फील्ड स्टाफ बनाम प्रशासनिक उपेक्षा
व्हिसलब्लोअर इनपुट में स्थानीय नेतृत्व और पोस्ट प्रभारी की प्राथमिकताओं पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप है कि जहां एक तरफ भीषण गर्मी, सर्दी और बारिश के बीच जमीनी स्तर पर तैनात जवान रोजाना जारी होने वाले दर्जनों प्रशासनिक निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं, वहीं प्रशासनिक स्तर पर उनकी बुनियादी समस्याओं और कार्य-दशाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
आरपीएफ जवानों पर लगातार बढ़ते कार्यभार, अमानवीय कार्य-घंटों और अधिकारियों के नकारात्मक व्यवहार तथा दंडात्मक रवैये के बीच अब यह मांग उठ रही है कि रेलवे सुरक्षा बल में जवानों के कार्य-घंटों के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पूरी भारतीय रेल में इस कार्य-व्यवहार की स्वतंत्र जांच और समीक्षा कराई जाए।

