झाँसी में रेल निर्माण विंग में गहराया संकट: DyCEE/C के उत्पीड़न से त्रस्त 8 इंजीनियरों ने मांगा सामूहिक स्थानांतरण, PMC बने बिचौलिया!

झांसी/प्रयागराज: भारतीय रेल के निर्माण संगठन में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (#PMC) के बढ़ते हस्तक्षेप, उच्च अधिकारियों की मनमानी और फील्ड इंजीनियरों के मानसिक उत्पीड़न का एक सनसनीखेज मामला उत्तर मध्य रेलवे (#NCR) के झाँसी मंडल से सामने आया है। कार्यालय उप मुख्य विद्युत अभियंता/निर्माण (#DyCEE/C), झांसी के अधीन कार्यरत आठ सीनियर सेक्शन इंजीनियरों (#SSE) और जूनियर इंजीनियरों (#JE) ने प्रशासनिक उत्पीड़न, कार्यस्थल के विषैले वातावरण और तकनीकी नियमों की घोर अनदेखी से तंग आकर सामूहिक रूप से अपने अन्यत्र स्थानांतरण की गुहार लगाई है।

इंजीनियरों द्वारा पहला आधिकारिक विरोध 23 अप्रैल 2026 को लिखित रूप से किया गया था, जब उन्होंने Dy.CEE/C/झांसी को सौंपे अपने संयुक्त पत्र में कार्यस्थल के दमघोंटू वातावरण का ब्योरा दिया। पत्र में आरोप लगाया गया कि ठेकेदारों और एजेंसियों से आंतरिक वार्ता कर फील्ड इंजीनियरों पर अनावश्यक कार्यों और गुणवत्ता से समझौता करने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा है। स्वीकृत तकनीकी मानकों और स्पेसिफिकेशन की अनदेखी कर शीघ्रता से कार्य निपटाने के प्रक्रिया-विरुद्ध निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में सतर्कता और लेखा जांच का बड़ा जोखिम पैदा हो रहा है। इसके अलावा ठेकेदारों के सामने तकनीकी पर्यवेक्षकों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है तथा अनुचित प्रशासनिक कार्रवाई की धमकियां देकर उनका मनोबल तोड़ा जा रहा है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि फील्ड कर्मचारियों को उनके मूल दायित्व से भटकाकर निरर्थक कामों में उलझाया जा रहा है, जिससे साइट की मॉनिटरिंग पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

पहली शिकायत के बावजूद स्थिति में सुधार न होने पर ठीक एक महीने बाद, 22 मई 2026 को इंजीनियरों ने बड़ा कदम उठाया। अंजनी कुशवाहा, बीरेन्द्र कुमार मीना, अरुण कुमार दिवगइयां, सचेन्द्र, किशोर मजुमदार, सौरभ प्रभात वर्मा, आशीष कुमार गुप्ता और कपिल—इन सभी 8 तकनीकी पर्यवेक्षकों ने मुख्य विद्युत अभियंता/निर्माण (#CEE/C), प्रयागराज और मुख्य परियोजना प्रबंधक/निर्माण (#CPM/C), झांसी को पत्र भेजकर सामूहिक स्थानांतरण की मांग कर दी। उन्होंने स्पष्ट लिखा कि वर्तमान अधिकारी के अधीन निष्पक्ष, पारदर्शी और नियम-सम्मत कार्य करना असंभव हो चुका है तथा नियमों पर अड़ने वाले कर्मचारियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है, उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है, जिसके चलते वे अब इस पदस्थापना में कार्य करने के बिल्कुल इच्छुक नहीं हैं।

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पीड़ित कर्मचारियों का दर्द है कि रेलवे के नियमित इंजीनियरों को केवल रबर स्टैंप बनाकर रख दिया गया है। सच बोलने या तकनीकी नियमों की बात करने पर तुरंत स्थानांतरण की धमकी दी जाती है या नौकरी करना मुश्किल कर दिया जाता है। कर्मचारियों का यह भी गंभीर आरोप है कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (#PMC) के बाहरी कार्मिकों से रेलवे के अति-गोपनीय आपूर्ति और निर्माण कार्यों की फाइलें तक निपटाई जा रही हैं।

झांसी का यह घटनाक्रम सीधे तौर पर ‘रेलविजन टीवी’ (#RailVisionTV, #Ep254: #PMC—प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट: रेल में दलाली और बिचौलियों का खेल!) शीर्षक की वीडियो रिपोर्ट उस खुलासे पर मुहर लगाती है, जिसमें प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) को रेलवे में दलाली और बिचौलियों का खेल बताया गया है। जब रेलवे के पास देश के सबसे योग्य, प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम इंजीनियर मौजूद हैं, तब करोड़ों रुपये की कंसल्टेंसी के नाम पर निजी पीएमसी को घुसाया गया। जानकारों का मानना है कि पीएमसी का इस्तेमाल अफसरों और बड़े सिंडिकेट्स के बीच बिचौलिये के रूप में किया जा रहा है, ताकि उगाही, डीलिंग और घटिया काम का ठीकरा विजिलेंस या सीबीआई से बचकर नीचे के कर्मचारियों पर फोड़ा जा सके। जब नियमित इंजीनियर गलत काम का विरोध करते हैं, तो उन्हें प्रताड़ित कर अधिकारविहीन कर दिया जाता है।

एक साथ आठ जिम्मेदार फील्ड इंजीनियरों का सामूहिक स्थानांतरण मांगना यह साबित करता है कि झांसी निर्माण संगठन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। यह मामला न केवल प्रशासनिक निरंकुशता को उजागर करता है, बल्कि यह गंभीर प्रश्न भी खड़े करता है कि क्या रेलवे में स्थायी इंजीनियरों की भूमिका खत्म कर पूरे सिस्टम को बाहरी पीएमसी और सिंडिकेट्स के हवाले करने की तैयारी है। उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन और रेलवे बोर्ड को इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय सतर्कता जांच कर फील्ड कर्मियों को भयमुक्त कार्य वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए।