स्पाउस ग्राउंड ट्रांसफर के नाम पर रिश्वत: प्रयागराज मंडल के एपीओ और ओएस पर सीबीआई का शिकंजा

प्रयागराज / लखनऊ: उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में कार्मिक विभाग के भीतर भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है, जहाँ पति-पत्नी के एक ही स्थान पर पदस्थापन (स्पाउस ग्राउंड) के आधार पर होने वाले स्थानांतरण के निस्तारण के बदले खुलेआम रिश्वत की मांग की गई। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने शिकायत के गोपनीय सत्यापन के बाद प्रयागराज मंडल के सहायक कार्मिक अधिकारी (एपीओ) और कार्यालय अधीक्षक (ओएस) के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर आपराधिक विवेचना शुरू कर दी है।

सीबीआई, एसीबी लखनऊ द्वारा दर्ज नियमित प्राथमिकी (एफआईआर संख्या: RC0062026A0027) के अनुसार, यह कार्रवाई प्रयागराज लॉबी में तैनात वरिष्ठ सहायक लोको पायलट (सीनियर एएलपी) आशीष केसरवानी की लिखित शिकायत पर की गई है। शिकायतकर्ता की पत्नी श्रीमती सिम्मी केसरवानी भी रेलवे में वरिष्ठ सहायक लोको पायलट के पद पर कार्यरत हैं और उनकी मूल तैनाती जीएमसी लॉबी, कानपुर में है, जबकि वर्तमान में वह ‘ऑन लोन’ आधार पर प्रयागराज लॉबी में अपनी सेवाएं दे रही हैं। श्रीमती सिम्मी केसरवानी ने सरकारी नियमों के तहत कानपुर से प्रयागराज लॉबी में स्थायी स्थानांतरण के लिए स्पाउस ग्राउंड पर औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया था।

शिकायत के मुताबिक, अपने ट्रांसफर आवेदन की स्थिति जानने के लिए आशीष केसरवानी अपनी पत्नी के साथ मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय (डीआरएम ऑफिस), प्रयागराज पहुंचे थे। वहाँ कार्मिक विभाग के एपीओ अरविंद कुमार ने उनसे मुलाकात के दौरान मामले को देखने के लिए अपने कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मणि त्रिपाठी से मिलने को कहा। जब वे दोनों राजेंद्र मणि त्रिपाठी के पास पहुंचे, तो ओएस ने ट्रांसफर की फाइल आगे बढ़ाने और काम कराने के एवज में ₹70,000 की रिश्वत की सीधी मांग रख दी।

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रिश्वत देने के बजाय रेलकर्मी ने 8 सितंबर को सीबीआई पुलिस अधीक्षक, लखनऊ को पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत देकर कानूनी हस्तक्षेप की मांग की। शिकायत मिलने के तुरंत बाद सीबीआई द्वारा मामले का गोपनीय सत्यापन (डिस्क्रीट वेरिफिकेशन) कराया गया। जांच एजेंसी के गोपनीय सत्यापन में यह पुष्ट हुआ कि एपीओ अरविंद कुमार और ओएस राजेंद्र मणि त्रिपाठी की मिलीभगत से ₹50,000 के अनुचित लाभ की मांग की गई थी।

तथ्यों और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर लोक सेवक द्वारा रिश्वत मांगने और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप प्रमाणित पाए जाने पर, सीबीआई के डीआईजी एवं शाखा प्रमुख गौरव सिंह के निर्देश पर 10 सितंबर को दोनों रेलकर्मियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (यथासंशोधित 2018) की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 61(2) के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। मामले की अग्रिम कानूनी जांच और साक्ष्य संकलन की जिम्मेदारी सीबीआई, लखनऊ के निरीक्षक देवेश कुमार को सौंपी गई है।