बिड कैपेसिटी नीति पर निष्पक्ष जांच की मांग
यदि वर्ष 2021 में ऑल इंडिया रेलवे कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा रेलवे बोर्ड को यह लिखित रूप से अवगत कराया गया था कि तत्कालीन बिड कैपेसिटी (#BidCapacity) प्रणाली के कारण कुछ ठेकेदार चल रहे कार्यों (Ongoing Works) को छिपाकर नए टेंडरों में पात्रता प्राप्त कर सकते हैं, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।
यदि रेलवे बोर्ड को इस संभावित खामी की पूर्व से जानकारी थी, तो यह जांच का विषय है कि उसके बाद भी कुछ ठेकेदारों को कथित रूप से चल रहे कार्यों को छिपाकर अतिरिक्त लाभ कैसे प्राप्त हुआ, जबकि अन्य ठेकेदारों को उसी नीति के आधार पर अयोग्य घोषित किया गया या प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ा।
निम्नलिखित बिंदुओं की स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए—
- क्या सभी ठेकेदारों द्वारा अपनी वास्तविक चल रही परियोजनाओं का पूर्ण एवं सही विवरण दिया गया था?
- क्या रेल अधिकारियों ने Bid Capacity घोषणाओं का केंद्रीय अभिलेखों से सत्यापन किया था?
- क्या सभी रेलवे जोनों में एक समान मानकों के अनुसार Bid Capacity का मूल्यांकन किया गया?
- क्या किसी विशेष ठेकेदार को नियमों से हटकर अनुचित लाभ (Undue Advantage) प्राप्त हुआ?
- क्या सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) के सिद्धांत—पारदर्शिता, समान अवसर एवं निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा—का पालन किया गया?
यदि जांच में यह पाया जाता है कि Bid Capacity संबंधी घोषणाओं को जानबूझकर छिपाया गया, गलत प्रस्तुत किया गया अथवा अधिकारियों द्वारा उनका उचित सत्यापन नहीं किया गया, तो यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि सार्वजनिक धन, निष्पक्ष निविदा प्रक्रिया तथा इंजीनियरिंग नैतिकता से जुड़ा गंभीर विषय होगा।
अतः इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) द्वारा स्वतंत्र जांच कराई जाए। यदि जांच में आपराधिक कदाचार, मिलीभगत, जालसाजी या भ्रष्टाचार के प्रथमदृष्टया साक्ष्य प्राप्त होते हैं, तो मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। आवश्यकता होने पर, निष्पक्षता एवं जनहित सुनिश्चित करने के लिए इस जांच की निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित उपयुक्त मॉनिटरिंग व्यवस्था के अंतर्गत कराने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी होना चाहिए कि:
क्या किसी स्तर पर किसी लोक सेवक द्वारा भ्रष्टाचार, अनुचित प्रभाव, मिलीभगत या किसी अन्य अवैध लाभ के कारण कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया?
यदि इस संबंध में किसी प्रकार के दस्तावेज़ी, डिजिटल, वित्तीय अथवा अन्य विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हों, तो उनकी स्वतंत्र जांच की जाए और यदि प्रथमदृष्टया आपराधिक कदाचार या भ्रष्टाचार के प्रमाण प्राप्त हों, तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध विधि के अनुसार CBI द्वारा जांच तथा अभियोजन की कार्रवाई की जाए।
इस जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति को पूर्वनिर्धारित रूप से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि सार्वजनिक खरीद प्रणाली पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार-मुक्त रहे।

