रेलवे अधिनियम, 1989 के प्रमुख प्रावधानों में संशोधन: भाग-II: सुरक्षित यात्रा को खतरे में डालने वाले अपराधों के विरुद्ध त्वरित अनुपालन एवं निपटान
मुंबई: मध्य रेलवे ने यह विज्ञप्ति जारी करके सर्वसाधारण को सूचित किया है कि रेलवे अधिनियम, 1989 की कई धाराओं में प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संशोधन किया गया है। इन संशोधनों का उद्देश्य धूम्रपान, रेल परिसर में अनधिकृत प्रवेश (ट्रेसपासिंग), अनधिकृत फेरी लगाना (हॉकिंग), भीख मांगना तथा सुरक्षित यात्रा में बाधा डालने वाली अन्य गतिविधियों—अपराधों के विरुद्ध अधिक प्रभावी निवारक व्यवस्था तथा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
धूम्रपान एवं अन्य असुरक्षित यात्रा संबंधी अपराधों के विरुद्ध संशोधित प्रावधान
A. धारा 167–धूम्रपान
- पूर्व प्रावधान: अधिकतम ₹100 का जुर्माना।
- संशोधित प्रावधान: ₹2,000 का दंड, पास/टिकट जब्त किया जाएगा तथा रेल परिसर से हटाया जाएगा। यदि दंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो न्यायालय ₹5,000 तक का जुर्माना लगा सकता है।
B. धारा 145–नशे की अवस्था या उपद्रव
- पूर्व प्रावधान: रेल परिसर से हटाना, पास/टिकट जब्त करना, 6 माह तक का कारावास तथा ₹500 तक का जुर्माना। प्रथम अपराध पर न्यूनतम ₹100 का जुर्माना तथा पुनरावृत्ति पर 1 माह का कारावास एवं ₹250 का जुर्माना।
- संशोधित प्रावधान: रेलवे परिसर से हटाना, पास/टिकट जब्त करना, 24 घंटे तक का साधारण कारावास अथवा ₹1,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों अथवा सामुदायिक सेवा।
- यदि उपद्रव जारी रहता है, तो 6 माह तक का कारावास अथवा ₹5,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान। यह भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) की धाराओं 355, 270, 292 एवं 293 के अनुरूप है।
C. धारा 147–अनधिकृत प्रवेश एवं परिसर छोड़ने से इनकार
- पूर्व प्रावधान: रेलवे के किसी भी भाग में अनधिकृत प्रवेश (ट्रेसपास) पर 6 माह तक का कारावास अथवा ₹1,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों तथा रेलवे परिसर से हटाया जाना (न्यूनतम जुर्माना ₹500)।
- संशोधित प्रावधान: यात्री क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश कर परिसर छोड़ने से इनकार करने पर ₹500 का दंड।
- रेलवे क्षेत्र का दुरुपयोग करने पर 3 माह तक का कारावास अथवा ₹5,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों (न्यूनतम जुर्माना ₹2,000)। कार्रवाई से पूर्व चेतावनी दी जाएगी। यह प्रावधान भारतीय न्याय संहिता की धारा 329 के अनुरूप है।
D. धारा 146–रेल कर्मचारी को कर्तव्य पालन में बाधा पहुंचाना
- पूर्व प्रावधान: 6 माह तक का कारावास अथवा ₹1,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों।
- संशोधित प्रावधान: 3 माह तक का कारावास अथवा ₹2,500 तक का जुर्माना अथवा दोनों। यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 221 के अनुरूप है।
E. धारा 144–अनधिकृत फेरी लगाना (हॉकिंग) एवं भीख मांगना
- पूर्व प्रावधान: 1 वर्ष तक का कारावास अथवा ₹2,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों।
- संशोधित प्रावधान: प्रथम तीन उल्लंघनों पर प्रत्येक बार ₹2,000 का दंड। यदि दंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो न्यायालय 3 माह तक का कारावास अथवा ₹5,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों का आदेश दे सकता है। दंड का भुगतान न करने पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।
- चौथे एवं उसके बाद के प्रत्येक अपराध पर 1 वर्ष तक का कारावास तथा ₹5,000 तक का जुर्माना। आदतन अपराधियों के लिए इसे आपराधिक अपराध के रूप में बनाए रखा गया है।
- जन विश्वास अधिनियम, 2023 के तहत भिक्षावृत्ति को पहले ही अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा चुका है।
F. धारा 165–अवैध रूप से आपत्तिजनक वस्तुएं लाना
- पूर्व प्रावधान: ₹500 तक का जुर्माना तथा किसी भी प्रकार की हानि, नुकसान या क्षति के लिए उत्तरदायित्व। इसे धारा 67 के अंतर्गत अपराध माना जाता था।
- संशोधित प्रावधान: न्यूनतम ₹10,000 का दंड, वस्तुओं की जब्ती/हटाया जाना तथा हुए नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी। यदि दंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो न्यायालय 1 वर्ष तक का कारावास अथवा न्यूनतम ₹10,000 का जुर्माना अथवा दोनों का आदेश दे सकता है।
यात्रियों से अपील
मध्य रेल ने अपने सभी सम्मानित यात्रियों एवं कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि वे इन संशोधित प्रावधानों की जानकारी प्राप्त करें और उनका पालन करें। मध्य रेल ने सभी यात्रियों से अपील किया है कि वे सदैव वैध टिकट के साथ यात्रा करें, आरक्षित सीटों पर न बैठें एवं डिब्बों में न चढ़ें, रेल परिसर में अनधिकृत प्रवेश, अनधिकृत फेरी लगाना तथा धूम्रपान जैसी गतिविधियों से बचें तथा रेल कर्मचारियों के साथ सहयोग करें, ताकि सभी के लिए सुरक्षित, सुगम एवं आरामदायक यात्रा सुनिश्चित की जा सके।

