ईंधन संकट और महंगाई के बीच सरकार से राहत की मांग तेज

देश में गैस, पेट्रोल-डीजल और निर्माण सामग्री की बढ़ती कमी तथा लगातार बढ़ती महंगाई के बीच सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों, एजेंसियों और श्रमिक वर्ग ने केंद्र सरकार से अनावश्यक सरकारी टेंडरों पर पुनर्विचार करने तथा चल रहे कार्यों के लिए विशेष आर्थिक राहत देने की मांग तेज कर दी है।

निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि कई सरकारी टेंडर उस समय जारी किए गए थे जब बाजार दरें सामान्य थीं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, ईंधन संकट, सप्लाई चेन में बाधा और कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण उन्हीं दरों पर काम करना लगभग असंभव हो गया है।

उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में सरकारी परियोजनाओं को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा करवाना चाहती है, तो उसे वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ठेकेदारों/निर्माण एजेंसियों को विशेष राहत पैकेज देना होगा।

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निर्माण क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि जिस प्रकार कोविड-19 काल में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों को राहत दी थी, उसी प्रकार आज भी सरकारी निर्माण कार्यों, ठेकेदारों, एजेंसियों को राहत प्रदान की जाए।

प्रतिनिधियों का कहना है कि राहत मिलने से न केवल कार्यों की गति बनी रहेगी, बल्कि अधिक से अधिक मजदूरों और श्रमिकों को गांव लौट जाने के बजाय काम पर लगाए रखना संभव हो सकेगा, इससे रोजगार और अर्थव्यवस्था दोनों को सहारा मिलेगा। उनका कहना है कि यदि वर्तमान परिस्थितियों में बिना किसी संशोधन या राहत के पुराने रेट पर काम करवाने का दबाव बनाया गया, तो इसका असर सीधे तौर पर परियोजनाओं की गुणवत्ता, समयसीमा और कार्य निष्पादन पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को ऐसी स्थिति में रेट रिवीजन, प्राइस एस्केलेशन राहत, फोर्स मेज्योर प्रावधानों का उपयोग, और गैर-जरूरी परियोजनाओं की अस्थायी समीक्षा जैसे कदमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

निर्माण एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा है कि यदि समय रहते सरकार द्वारा इस विषय पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका कुप्रभाव केवल ठेकेदारों या निर्माण कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, श्रमिक रोजगार और विकास कार्यों पर भी व्यापक रूप से पड़ सकता है।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वर्तमान आर्थिक और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अनावश्यक सरकारी टेंडरों पर अस्थायी रोक, तथा आवश्यक परियोजनाओं के लिए विशेष वित्तीय राहत, संशोधित दरें और श्रमिक हित में सहायता पैकेज तत्काल घोषित किया जाए।