लखनऊ जं. से गोमतीनगर—गाड़ियों की शिफ्टिंग का निर्णय किसका है—मंडल, मुख्यालय या रेलवे बोर्ड का?

रेलवे के साथ बिजनेस करने वाले कई व्यापारियों से बातचीत करने पर पता चला कि पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन से सीएसएमटी मुंबई के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर 12533, पुष्पक एक्सप्रेस को गोमतीनगर से चलाने का निर्णय—डिवीजन, मुख्यालय अथवा रेलवे बोर्ड में से—जिसने भी किया है, उससे बड़ा मूढ़ कोई नहीं हो सकता। उनका कहना था कि अगर इसका निर्णय डिवीजन लेवल से हुआ है, तो जोनल मुख्यालय ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं की? और यदि यह निर्णय दोनों—डिवीजन और मुख्यालय—की सहमति से हुआ है, तो फिर इस मूढ़ता के लिए दोनों प्रधान दोषी हैं।

विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि पुष्पक एक्सप्रेस में पार्सल वैन (VP) और कैब-वे पार्किंग का कॉन्ट्रैक्ट लेने वालों ने पुष्पक एक्सप्रेस को गोमतीनगर शिफ्ट किए जाने के विरोध स्वरूप रेल से कॉन्ट्रैक्ट समाप्त करने का निर्णय लिया है। यही नहीं, ये लोग अपने घाटे की भरपाई के लिए कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। उनका गुस्सा साफ झलक रहा है। वस्तुस्थिति का आकलन करने पर पाया गया कि उनका गुस्सा जायज है।

गोमतीनगर स्टेशन का कितना भी डेवलपमेंट कर लिया जाए, लेकिन फ्रेट कस्टमर के लिए पार्सल ट्रैफिक चारबाग/लखनऊ जंक्शन ही बेहतर जगह है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट नगर लखनऊ जंक्शन स्टेशन के नजदीक है, जिससे परिवहन लागत कम है, जबकि गोमतीनगर तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त लगभग पंद्रह किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ेगा और रास्ते में अनेकों प्रकार के टोल का भुगतान भी करना पड़ेगा।

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उनका कहना है कि गोमतीनगर से गाड़ी पकड़ना यात्रियों की मजबूरी हो सकती है, लेकिन हमारी मजबूरी नहीं है। वह कहते हैं कि आरएलडीए को लाभ पहुँचाने के एक गलत निर्णय ने एक महत्वपूर्ण स्टेशन का अस्तित्व समाप्त करने के कगार पर पहुँचा दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग चार करोड़ रुपये प्रति वर्ष वीपी की एवज में और डेढ़ करोड़ रुपये कैब-वे पार्किंग की एवज में लखनऊ जंक्शन को मिलता था, जो अब विवाद में पड़ गया है।

अब जो जानकारी मिली है उसकी वस्तुस्थिति का पता लगाने पर पाया गया कि गाड़ियों को लखनऊ जंक्शन से गोमतीनगर स्टेशन पर शिफ्ट करने का निर्णय रेलवे बोर्ड ने नहीं , बल्कि पूर्वोत्तर रेलवे (#NERailway) के लखनऊ डिवीजन और जोनल मुख्यालय की अनुशंसा पर किया गया है। यदि यह बात सही है, तो रेलमंत्री को उन तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए जिनके मूर्खतापूर्ण निर्णय के कारण इस प्रकार की आपाधापी हुई और जनता के बीच रेलवे की छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया।

और, यदि यह निर्णय रेलवे बोर्ड स्तर पर किया गया है, तो जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। अभी तो रेलवे रेवेन्यू के नुकसान का प्रारंभिक आंकड़ा पता चल रहा है, वह भी रेलवे से व्यापार करने वालों के द्वारा दी गई जानकारी के हिसाब से। आगे कितना नुकसान होगा और यात्रियों को होने वाली असुविधा का क्या परिणाम होगा, उसकी विस्तृत जानकारी और आकलन की प्रतीक्षा है। क्रमशः—विस्तृत वीडियो विश्लेषण शीघ्र..