पालघर, महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना में पहली पर्वतीय सुरंग का ब्रेकथ्रू हासिल: अश्विनी वैष्णव
बुलेट ट्रेन मध्यम वर्ग के लिए किफायती यात्रा उपलब्ध कराएगी: अश्विनी वैष्णव
एमएएचएसआर परियोजना से कॉरिडोर के साथ आर्थिक गतिविधियों और रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा
मुंबई–अहमदाबाद की यात्रा बुलेट ट्रेन से मात्र 1 घंटा 58 मिनट में
दिल्ली (पीआईबी): रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी के केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2 जनवरी 2026 को बुलेट ट्रेन परियोजना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा करते हुए महाराष्ट्र के पालघर में दूसरी सुरंग के ब्रेकथ्रू की जानकारी दी। यह राज्य में परियोजना की पहली पर्वतीय सुरंग है। यह उपलब्धि विरार और बोईसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग (एमटी-5) में हासिल की गई है, जो पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में से एक है।
एमटी-5 सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से की गई और अत्याधुनिक ड्रिल एंड ब्लास्ट विधि का उपयोग करते हुए 18 महीनों के भीतर खुदाई पूरी की गई। यह विधि खुदाई के दौरान भू-व्यवहार की वास्तविक समय में निगरानी की सुविधा देती है तथा स्थल की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार शॉटक्रीट, रॉक बोल्ट और लैटिस गर्डर जैसी सहायक प्रणालियों की तैनाती संभव बनाती है। सुरंग निर्माण के दौरान वेंटिलेशन, अग्नि सुरक्षा उपायों तथा उचित प्रवेश-निकास व्यवस्थाओं सहित सभी आवश्यक सुरक्षा सावधानियों का पूरी तरह पालन किया गया।

इससे पहले, ठाणे और बीकेसी के बीच लगभग 5 किलोमीटर लंबी पहली भूमिगत सुरंग सितंबर 2025 में पूरी की गई थी। मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है, जिसमें कुल सुरंग लंबाई 27.4 किलोमीटर है। इसमें 21 किलोमीटर भूमिगत सुरंगें और 6.4 किलोमीटर सतही सुरंगें शामिल हैं। परियोजना में कुल आठ पर्वतीय सुरंगें हैं—महाराष्ट्र में सात सुरंगें, जिनकी संयुक्त लंबाई लगभग 6.05 किलोमीटर है, तथा गुजरात में 350 मीटर लंबी एक सुरंग।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है और परिचालन के दौरान भी अतिरिक्त अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना के पूरा होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय घटकर मात्र 1 घंटा 58 मिनट रह जाएगा, जिससे प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों की अर्थव्यवस्थाओं का बेहतर एकीकरण होगा।

यह परियोजना कॉरिडोर के साथ आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी, ज्ञान हस्तांतरण को बढ़ावा देगी तथा नए औद्योगिक और आईटी हब के विकास में सहायक होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह परियोजना दीर्घकालिक आर्थिक लाभ लाएगी और आरामदायक व किफायती यात्रा प्रदान कर मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि परियोजना के पूर्ण होने पर सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 95 प्रतिशत तक की अनुमानित कमी आएगी।
महाराष्ट्र में सात पर्वतीय सुरंगों पर कार्य प्रगति पर है। एमटी-1 (820 मीटर) में 15 प्रतिशत भौतिक प्रगति हुई है, जबकि 228 मीटर लंबी एमटी-2 में प्रारंभिक तैयारी कार्य चल रहा है। एमटी-3 (1,403 मीटर) में 35.5 प्रतिशत, एमटी-4 (1,260 मीटर) में 31 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। सबसे लंबी पर्वतीय सुरंग एमटी-5 (1,480 मीटर, लगभग 1.5 किमी) में 55 प्रतिशत प्रगति हुई है और 2 जनवरी 2026 को ब्रेकथ्रू हासिल किया गया। एमटी-6 (454 मीटर) में 35 प्रतिशत और एमटी-7 (417 मीटर) में 28 प्रतिशत प्रगति हुई है। इस प्रकार महाराष्ट्र में पर्वतीय सुरंगों की कुल लंबाई लगभग 6 किलोमीटर है।
एमएएचएसआर परियोजना लगभग 508 किलोमीटर में फैली है, जिसमें गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में 352 किलोमीटर तथा महाराष्ट्र में 156 किलोमीटर शामिल हैं। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा, जो भारत के परिवहन अवसंरचना में एक परिवर्तनकारी कदम है।

