पश्चिम रेलवे: भावनगर वर्कशॉप और कर्मचारियों के आरोप!
पश्चिम रेलवे का भावनगर कारखाना और उसमें कार्यरत कर्मचारियों की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है। यहां कोई स्थाई मुख्य कारखाना प्रबंधक (#CWM) नहीं है। कर्मचारियों का आरोप है कि यहाँ जो दो DyCME हैं वह किसी काम के नहीं हैं। वे केवल अपनी जुगाड़ में लगे रहते हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि यहाँ दो उपमुख्य कारखाना प्रबंधक (#DyCME) हैं, मगर स्थिति यह है कि उनमें से कर्मचारियों के लिए एक भी नहीं है। उनका आरोप है कि एक को कांट्रेक्टरों से फुर्सत नहीं है। और जो दूसरे अभी-अभी नए नियुक्त हुए हैं, उन साहब का तो कोई जवाब ही नहीं है।
उनका आरोप है कि नए आए अधिकारी ने तो आते ही एडमिन बिल्डिंग में अफसरों के बने-बनाए ऑफिस तोड़कर करीब 80 लाख का खर्च करके नए ऑफिस का निर्माण करवाया है और नए कलर तथा उससे मैच होता नया फर्नीचर मंगवा लिया। अर्थात् अफसरों को काम कुछ नहीं, केवल खर्च और कमाई पर सारा ध्यान लगा हुआ है।
उनका आरोप है कि जबकि हर छोटी-छोटी चीज के लिए परेशानी से त्रस्त हो चुके कर्मचारियों की परेशानी यहाँ किसी को दिखाई नहीं देती। एक डिप्टी आर्ट गैलरी बनाने में डूबा है, तो दूसरा नए ऑफिस के निर्माण में व्यस्त है।
उल्लेखनीय है कि भावनगर वर्कशॉप का जीएम इंस्पेक्शन 22 जनवरी को निर्धारित है, जिसके चलते कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
यहाँ अधिकारी—कर्मचारियों और सुपरवाइजरों से कहते हैं कि अगर जीएम इंस्पेक्शन में कोई भी गड़बड़ी हुई और सब कुछ अच्छा नहीं हुआ तो सबको मेजर पेनल्टी चार्जशीट (SF-5) पकड़ा देंगे। कर्मचारियों का आरोप है कि यह अधिकारी कभी वर्कशॉप का राउंड नहीं लेते, न ही कर्मचारियों की परेशानी दूर करते हैं, मगर उनको धमकी अवश्य देते रहते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ अधिकारियों की साफ धमकी है कि कोई भी उनके सामने बोला या नियम की बात की, तो उनसे बुरा कोई नहीं होगा और उसको तुरंत सस्पेंड करके दंडित किया जाएगा। इसके चलते वर्कशॉप का हर सुपरवाइजर और प्रत्येक कर्मचारी डरा हुआ है।
कर्मचारियों का आरोप है कि वर्कशॉप प्रशासन केवल आउट टर्न की बात करता है और वह भी बिना इंस्पेक्शन जल्दी-जल्दी पूरा करने का दबाव बनाता है, बाकी मैटीरियल की उपलब्धता और प्रबंधन की कोई परवाह प्रशासन को नहीं है।
उनका आरोप है कि यहाँ अधिकारी खुद के नियम से जोर-जबरदस्ती करते हैं, इससे गड़बड़ी होने की आशंका से सभी कर्मचारी डरे रहते हैं। सभी सुपरवाइजरों को अपने केबिन में बुलाकर बहुत अपमानजनक भाषा का प्रयोग करके डराया-धमकाया जाता है। इससे न जाने जीएम इंस्पेक्शन तक कितने कर्मचारियों को परेशान और सस्पेंड होना पड़ेगा।

