राष्ट्र के विकास की असली पटरी—समय पर लिया गया निर्णय!
भारतीय रेल देश की जीवन रेखा है। यह केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, औद्योगिक प्रगति और आम नागरिक के जीवन से सीधे जुड़ी पब्लिक यूटिलिटी है। ऐसे में यदि रेलवे की आंतरिक प्रक्रियाओं में शिथिलता, विलम्ब और जवाबदेही का अभाव हो, तो उसका दुष्प्रभाव पूरे राष्ट्र पर पड़ता है।
वर्तमान में यह एक गंभीर तथ्य बनकर उभरा है कि रेलवे के कुछ अधिकारी निविदाओं (टेंडर) को अंतिम रूप देने में अनावश्यक विलम्ब करते हैं। तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति में महीनों लग जाते हैं, जबकि सभी औपचारिकताएँ समय रहते पूरी हो चुकी होती हैं। इस देरी का सीधा लाभ कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को मिलता है, जबकि ईमानदार और सक्षम ठेकेदार हतोत्साहित होते हैं।
निविदा प्रक्रिया में अत्यधिक विलम्ब के कारण कई बार निविदा की वैधता अवधि समाप्त हो जाती है। अनेक ठेकेदार, अनिश्चितता और वित्तीय जोखिम के कारण, निविदा की वैधता बढ़ाने से इंकार कर देते हैं। परिणामस्वरूप पूरी प्रक्रिया पुनः आरंभ करनी पड़ती है, जिससे परियोजनाओं में महीनों-वर्षों की देरी हो जाती है।
इस स्थिति के दुष्परिणाम अत्यंत गंभीर हैं—
- रेलवे परियोजनाओं की गति धीमी हो जाती है।
- लागत में भारी वृद्धि होती है, जिसका बोझ अंततः सरकारी खजाने पर पड़ता है।
- अवसंरचना विकास प्रभावित होता है।
- रोजगार के अवसर घटते हैं।
- राष्ट्र की आर्थिक प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, इत्यादि।
इसका सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस प्रकार की देरी भ्रष्टाचार को जन्म देने का उपजाऊ वातावरण बनाती है। जब प्रक्रिया में देरी की जाती है अथवा निर्णय जानबूझकर रोके जाते हैं, तो दबाव, सिफारिश और अनुचित लाभ की संभावनाएँ स्वतः बढ़ जाती हैं। यह न केवल पारदर्शिता के सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि सुशासन की भावना को भी आघात पहुँचाता है।
रेलमंत्री जी से यह अपेक्षा है कि—
- निविदा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाए।
- अनावश्यक विलंब के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
- ई-टेंडरिंग एवं स्वचालित प्रणाली को और अधिक सशक्त किया जाए।
- ईमानदार ठेकेदारों का विश्वास बहाल किया जाए।
यदि भारतीय रेल को प्रधानमंत्री मोदी जी के विजन “विकसित भारत-2047” की लक्ष्य-प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभानी है, तो निर्णय प्रक्रिया में गति, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व अनिवार्य है। समय पर लिया गया निर्णय ही राष्ट्र के विकास की असली पटरी है।

