पुष्पक एक्सप्रेस को लखनऊ जंक्शन से गोमतीनगर स्टेशन पर शिफ्ट करने की तैयारी—रेलयात्रियों और रेलकर्मियों में भारी असंतोष

12533, पुष्पक एक्सप्रेस—लखनऊ जंक्शन के बजाय अब गोमतीनगर रेलवे स्टेशन से चलेगी और उसका पहला स्टापेज बादशाहनगर स्टेशन होगा, जो कि मात्र 2 किलोमीटर पर है। इसके बजाय उसका स्टॉपेज ऐशबाग होना चाहिए, जो कि लखनऊ जंक्शन से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि गोमतीनगर स्टेशन से ऐशबाग स्टेशन की दूरी लगभग 10 से 12 किलोमीटर है। इसके अलावा, अन्य ट्रेनों को भी गोमतीनगर शिफ्ट किया जा रहा है, रेल प्रशासन के इस निर्णय से यात्रियों के साथ ही लखनऊ जंक्शन के रेलकर्मियों में भी काफी नाराजगी देखी गई है।

जानकारों का मानना है कि रेल प्रशासन का यह निर्णय यात्रियों के लिए अत्यंत कष्टप्रद साबित होगा, क्योंकि चाहे गोमतीनगर स्टेशन हो या ऐशबाग स्टेशन, इन दोनों स्टेशनों पर यात्रियों को पहुँचने में काफी परेशानी और कठिनाई का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि इन दोनों स्टेशनों पर पहुँचने के लिए एक तो कोई सीधा-सरल मार्ग नहीं है, दूसरे इन दोनों स्टेशनों पर पहुँचने के लिए यात्रियों को भारी ट्रैफिक से गुजरना होगा। उनका यह भी कहना है कि वैसे भी रेल अधिकारियों को यात्रियों और अर्निंग की चिंता कभी नहीं रही, क्योंकि वह मानते हैं कि यात्रियों की मजबूरी है, उन्हें जहाँ कहा जाएगा वहाँ झख मारकर जाएंगे। रही बात अर्निंग की, तो इसकी परवाह उन्हें कभी रही ही नहीं।

लखनऊ जंक्शन के कमर्शियल स्टाफ का कहना है कि रेल प्रशासन का यह निर्णय बिल्कुल गलत है। किसी स्टेशन को आबाद करने के लिए किसी दूसरे बसे-बसाए स्टेशन को उजाड़ना कतई तर्कसंगत नहीं है।पुष्पक एक्सप्रेस लखनऊ जंक्शन से चलने वाली वीआईपी गाड़ियों में से एक है। इसको यहां से हटाने का मतलब वाणिज्यिक आय का नुकसान होगा, चाहे पार्सल आय हो, व्हीकल पार्किंग, विज्ञापन, खानपान इत्यादि ऐसे सेगमेंट हैं, जहां पर आय में कमी होना तय है।

Advertisements

स्टाफ का कहना है कि अगर गोमतीनगर स्टेशन को पैसेंजर ओरिएंटेड बनाना, आबाद करना और अर्निंग सेंट्रिक करना ही है, तो इसके लिए अनेकों अन्य उपाय हो सकते हैं, लेकिन लखनऊ जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन से पुष्पक एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण गाड़ी का शिफ्ट होना बहुत ही गलत और अदूरदर्शिता वाला निर्णय है और रेलवे पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

इस संदर्भ में पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल प्रशासन का कहना है कि इन ट्रेनों का स्थानांतरण रेलवे बोर्ड का निर्णय है। मंडल प्रशासन के अनुसार, “दरअसल गोमतीनगर स्टेशन को लखनऊ क्षेत्र की सभी प्रीमियम ट्रेनें मिलनी चाहिए, जिनमें शताब्दी, वंदे भारत और तेजस भी शामिल हैं।”

जबकि पूर्वोत्तर रेलवे ऑपरेटिंग मुख्यालय के अनुसार, “आजकल ऐसी सभी चीजें रेलवे बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों द्वारा तय की जाती हैं। इसमें जोनल रेलवे की भूमिका नगण्य होती है। यह बात तो अब सभी जानते हैं। तथापि ऐशबाग स्टेशन पर पुष्पक एक्सप्रेस के ठहराव के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त मार्जिन है। इस संबंध में बोर्ड से बात की जा रही है।”

नीचे स्तर पर जब यात्रियों और रेल कर्मचारियों द्वारा रेल प्रशासन के निर्णय की विसंगति को उजागर कर दिया गया तब रेल प्रशासन इसे सुधारने और ऐशबाग स्टेशन पर पुष्पक एक्सप्रेस का ठहराव देने की बात कह रहा है। हालाँकि यह बात सही है कि पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन और उत्तर रेलवे के चारबाग स्टेशन पर ट्रेनों और यात्रियों की संख्या बहुत अधिक हो गई है, इन्हें लखनऊ के गोमतीनगर जैसे अन्य स्टेशनों पर शिफ्ट किया जाना आवश्यक हो गया है। मगर जानकारों का मानना है कि वहां दिल्ली और जम्मू की तरफ जाने वाली ट्रेनों को शिफ्ट किया जाए और मुंबई की तरफ जाने वाली ट्रेनों को लखनऊ जंक्शन से ही आरंभ किया जाए, कुछ इस तरह से ट्रेनों की शिफ्टिंग पर विचार किया जाना चाहिए।

अपुष्ट सूत्रों से यह भी खबर है कि उत्तर रेलवे के वाराणसी जंक्शन स्टेशन को पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल को सौंपने की तैयारी चल रही है—हालाँकि यह वर्षों पुरानी और तर्कसंगत मांग है—इसके बदले में पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन स्टेशन को उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में लेने का प्रयास किया जा रहा है—जो कि कतई तर्कसंगत नहीं है। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के अधीन वाराणसी जंक्शन का होना तर्कसंगत है, क्योंकि वर्तमान में वाराणसी जंक्शन स्टेशन का मंडल मुख्यालय लखनऊ है, और इसकी कंट्रोलिंग लखनऊ से होती है, जबकि पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल का मंडल मुख्यालय वाराणसी में ही है, लेकिन लखनऊ जंक्शन स्टेशन का मंडल मुख्यालय लखनऊ में ही है, इसलिए लखनऊ जंक्शन को उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल को सौंपना कदापि तर्कसंगत नहीं होगा।