गाड़ी को पटरी पर सुरक्षित चलाना अब रेल प्रबंधन की प्राथमिकता नहीं रही!

ट्रेन नं. 12204, अमृतसर–सहरसा गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेन आज शनिवार सुबह सरहिंद रेलवे स्टेशन के पास आग की लपटों में घिर गई। गनीमत यह रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। केवल एक यात्री को हल्की चोटें लगीं और उसे अस्पताल भेजा गया और ट्रेन के संबंधित कोचों को काटकर नई व्यवस्था के साथ आगे रवाना किया गया। जानकारी के अनुसार, कोच नं. 19 में आग शॉर्ट सर्किट से लगी। इसमें लुधियाना के कई व्यापारी भी यात्रा कर रहे थे।

बताते हैं कि इस ट्रेन ने सुबह सात बजे सरहिंद स्टेशन क्रॉस किया था। इसी दौरान एक यात्री को ट्रेन के कोच नं. 19 से धुआं उठता दिखा। उसने तुरंत शोर मचाते हुए कोच की चेन खींच दी। धुएं के साथ आग की लपटें भी उठने लगीं जिससे अफरातफरी मच गई। यात्री शोर मचाते-भागते, मदद की गुहार लगाते दिखाई दिए।

Fire breaks out in Amritsar-Saharsa Garib Rath Express in Punjab

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#RailSamachar और #Railwhisper बार-बार ये जमीनी फीडबैक दे रहे हैं कि गाड़ी को पटरी पर सुरक्षित चलाना अब रेल प्रशासन की प्राथमिकता नहीं रही—स्वच्छता, उद्घाटन, बात-बात पर तथाकथित वाकथॉन, हेडक्वार्टर ड्राइव, रेलवे बोर्ड ड्राइव, वीसी, क्लब-कल्चर, पार्टियां आदि इत्यादि रेल प्रबंधन की पहली प्राथमिकताएँ बन गई हैं।

अब “संरक्षा, सुरक्षा और समयपालन” जैसे बोध-शब्दों का रेल प्रबंधन के लिए कोई महत्व नहीं रह गया है। पिछले एक-डेढ़ हफ्ते में मुंबई डिवीजन में #SPAD, प्रयागराज-बीकानेर डिवीजन में डिरेलमेंट, और अब ये नॉर्दर्न रेलवे में आग। चारों ओर सेफ्टी का गिरता स्तर बता रहा है कि रेल प्रबंधन के सारे फार्मूले फेल हो चुके हैं।

कांट्रैक्ट पर रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बनाने, और रेल के सर्वोच्च पद पर इस कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन से पूरे रेल सिस्टम की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है। नीचे अधिकारी ‘Art of Deal’ में प्रशिक्षित और प्रवीण हो रहे हैं, वे खुलकर करप्शन और कदाचार में लिप्त हो रहे हैं, मगर विजिलेंस, महाप्रबंधक और बोर्ड मेंबर मूकदर्शक बन चुके हैं।

अब मंत्री के स्तर के #hashtagged इंस्पेक्शन के दौरे हो रहे हैं, यह अच्छी बात है, मगर ध्यान इस पर नहीं है कि एसी कोचों के तापमान पर नियंत्रण हो, कंबल का कवर उपलब्ध कराने को मंत्री जी और महाप्रबंधक एक बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं।

खैर, संरक्षा, सुरक्षा और समयपालन जैसी आवश्यक चीजों पर ध्यान होगा भी कैसे, #RDSO और #NAIR को नेस्तानाबूद करने के बाद रंग-बिरंगे चादर, तकिये और कंबल के कवर ही बचते हैं काम करने के लिए! वहीं स्टेशन डेवलपमेंट के नाम पर सारे आर्थिक और मानव संसाधन कैपेसिटी बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट से अलग हो चुके हैं। आज जहाँ स्टेशन क्लीनिंग के लिए बजट कम पड़ रहा है, तो नई बिल्डिंगों को साफ और रिपेयर करने का पैसा कहाँ से आएगा?

ऐसे में आग तो लगेगी—डिरेलमेंट तो होंगे—सेफ्टी तो लूज होगी—क्योंकि शीर्ष रेल प्रबंधन “कॉन्ट्रैक्ट” पर है, #HOD/#PHOD निरंकुश हैं, चूँकि वर्तमान जीएम/बोर्ड मेंबर लेवल का तथाकथित नेतृत्व अपारदर्शी #IRMS की उपज है, इसीलिए ट्रेन ऑपरेशन की पहली प्राथमिकता दरकिनार हो गई, और बाकी सब काम प्राथमिक हो गए हैं!