मेंबर, जीएम, डीआरएम—ये उच्च अधिकारी हैं—उन्हें अधिकारियों की तरह ही व्यवहार करना चाहिए!
पूर्व रेलवे, हावड़ा मंडल के बर्धमान रेलवे स्टेशन पर परसों हुई भगदड़ की घटना के बाद चेयरमैन, रेलवे बोर्ड (#CRB) के ताबड़तोड़ मैसेज सभी जोनों में महाप्रबंधकों (#GM) और मंडल रेल प्रबंधकों (#DRM) के पास गए, सभी तथाकथित वॉर रूम के नंबर उनको स्वयं चाहिए थे। तत्पश्चात सारी जानकारी पूरी भारतीय रेल के सभी कंट्रोल रूम्स से ली गई और चेयरमैन साहब को सौंपी गई।
प्रश्न ये है कि चेयरमैन साहब ये सारे नंबर लेकर क्या स्वयं सभी कंट्रोल रूम्स या तथाकथित वॉर रूम्स को फोन मिलाते और पोजीशन लेते बैठेंगे? क्या यह उनका काम है? प्रश्न यह भी है कि जब दैनंदिन काम नहीं होंगे, ध्यान वीसी में लगा रहेगा, प्रोजेक्ट्स में सभी ओपन लाइन स्टाफ/अधिकारी लगा दिए जाएँगे, स्वच्छता अभियान और मंत्री -प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों के लिए तंबू-कनात-कुर्सियाँ लगवाने-भीड़ जुटाने में सारे डीआरएम, सारे ब्रांच अधिकारी लगे रहेंगे, तो आश्चर्य नहीं कि ये दुर्घटनाएँ नहीं होंगी!
अभी प्री-फैब्रिक्टेड होल्डिंग एरिया अजमेरी गेट साइड, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बनाया गया है, परसों ही मंत्री जी उसका निरीक्षण करने गए थे—अच्छी बात है कि ऐसे प्रयास किए जाएँ। परंतु देखने वाली बात यह है कि दिल्ली मंडल, उत्तर रेलवे के दिल्ली में कई सेटॅलाइट स्टेशन हैं, आनंद विहार, बिजवासन इत्यादि-वे क्यों नहीं हॉलिडे स्पेशल ट्रेनों का पूरा लोड लेते? नई दिल्ली स्टेशन वैसे भी बहुत भीड़भाड़ वाले कनॉट प्लेस के बगल में है, इस क्षेत्र में और अधिक भीड़ इकट्ठा करना कहीं से लॉजिकल नहीं लगता! दिल्ली मंडल का मुख्यालय इसी भीड़ वाले क्षेत्र के बीच में है और डिजास्टर मैनेजमेंट के सिद्धांत के बिल्कुल विपरीत है।
बिना ट्रेनिंग का बोर्ड, बिना डीआरएम अनुभव के जीएम, बिना ट्रेनिंग के डीआरएम—ये सौ अधिकारियों की व्यवस्था रेल के सुपरवाइजर्स की तरह हो गई है, न कि शीर्ष अधिकारियों जैसी! वर्तमान में अधिकांश डीआरएम-जीएम-मेंबर में लीडरशिप जैसी गुणवत्ता का नितांत अभाव देखने को मिल रहा है। वे उच्च अधिकारी जैसा व्यवहार करते दिखाई नहीं देते। समय रहते सरकार को #NAIR को पुनर्जीवित करना चाहिए, ह्वाट्सऐप और सोशल मीडिया पर रेल चलाने और वीसी में वाइवा लेने से यह नहीं हो पाएगा, जो आज अधिकतर जीएम और चेयरमैन कर रहे हैं।
मेंबर, जीएम, डीआरएम—ये उच्च रेल अधिकारी हैं—उन्हें अधिकारियों की तरह ही व्यवहार करना चाहिए, न कि सुपरवाइजर्स की तरह पेश आना चाहिए! चेयरमैन को सोचना होगा कि क्या उन्हें ये कॉन्ट्रैच्युअल एक्सटेंशन छोड़ देना चाहिए और कमान किसी नए योग्य एवं सक्षम अधिकारी को दे देनी चाहिए?
जनरल मैनेजमेंट के पर्याप्त अनुभव के बिना कुछ जीएम न तो अपना काम कर रहे हैं, न ही नीचे काम होने दे रहे हैं। यह उनकी गलती नहीं है, यह चेयरमैन को देखना और समझना चाहिए! और यदि वे देख-समझ नहीं पा रहे हैं, तो सरकार उपयुक्त अधिकारी को इस शीर्ष पद पर लाए, जो ये सब देख-समझ सके!

