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रेल राज्यमंत्री के साथ महाप्रबंधक/उ.म.रे. की कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक    ||    जबलपुर स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन का लोकार्पण    ||    बहुत कठिन है डीजल लॉबी के सामने रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की योजना    ||    लोको रेलवे अस्पताल, कानपुर में भ्रष्टाचार और हेराफेरी चरम पर    ||    सीनियर डीईएन और इंचार्ज पीडब्ल्यूआई की मिलीभगत का कारनामा    ||    ‘लार्जेस’ योजना : कैट के आदेश पर 8 महीने से रेलवे बोर्ड मौन    ||    कामनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली वेटलिफ्टर स्वाती सिंह का सम्मान    ||    महाप्रबंधक द्वारा नवनिर्मित रनिंग रूम का उदघाटन और सुविधाओं का निरीक्षण    ||    ईआरपीओए की एजीएम और नए पदाधिकारियों का चुनाव संपन्न    ||    पूर्व तट रेलवे : अधिकारी द्वारा अधिकार का दुरुपयोग    ||    मुंबई मंडल, म.रे. के एक खास ठेकेदार का लगातार किया जा रहा है फेवर    ||    ‘लार्जेस’ पर रेलवे बोर्ड की चुप्पी    ||    रेल टिकट की बिक्री के विकेंद्रीकरण का चौतरफा स्वागत    ||    दिल्ली हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विधि व्याख्यान    ||    एक बालक था, जिसका नाम था अरुण कुमार गुप्ता..    ||    असुरक्षित तथाकथित प्रतिष्ठित राजधानी एक्सप्रेस    ||    रेलमंत्री द्वारा आईआरसीटीसी के चौथे ‘रेल-नीर’ संयंत्र का उदघाटन    ||    पूर्व रेलवे का कार्य-निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर -आर.के.गुप्ता    ||    पश्चिम रेलवे द्वारा माल लदान, आमदनी बढ़ाने तथा यात्री सुविधाओं पर जोर    ||    चालू वित्तवर्ष के पहले चार महीनों में बढ़िया रहा है म. रे. का कार्य-निष्पादन

Suresh Tripathi, Editor, 105, Doctor House, 1st Floor, Raheja Complex, Kalyan (West) - 421301. Distt. Thane (Maharashtra). Contact:+919869256875 Email : editor@railsamachar.com

रेल राज्यमंत्री के साथ महाप्रबंधक/उ.म.रे. की कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक    ||    जबलपुर स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन का लोकार्पण    ||    बहुत कठिन है डीजल लॉबी के सामने रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की योजना    ||    लोको रेलवे अस्पताल, कानपुर में भ्रष्टाचार और हेराफेरी चरम पर    ||    सीनियर डीईएन और इंचार्ज पीडब्ल्यूआई की मिलीभगत का कारनामा    ||    ‘लार्जेस’ योजना : कैट के आदेश पर 8 महीने से रेलवे बोर्ड मौन    ||    ईआरपीओए की एजीएम और नए पदाधिकारियों का चुनाव संपन्न    ||    पूर्व तट रेलवे : अधिकारी द्वारा अधिकार का दुरुपयोग    ||    मुंबई मंडल, म.रे. के एक खास ठेकेदार का लगातार किया जा रहा है फेवर    ||    ‘लार्जेस’ पर रेलवे बोर्ड की चुप्पी    ||    रेल टिकट की बिक्री के विकेंद्रीकरण का चौतरफा स्वागत    ||    एक बालक था, जिसका नाम था अरुण कुमार गुप्ता..    ||    असुरक्षित तथाकथित प्रतिष्ठित राजधानी एक्सप्रेस    ||    रेलमंत्री द्वारा आईआरसीटीसी के चौथे ‘रेल-नीर’ संयंत्र का उदघाटन    ||    पूर्व रेलवे का कार्य-निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर -आर.के.गुप्ता    ||    पश्चिम रेलवे द्वारा माल लदान, आमदनी बढ़ाने तथा यात्री सुविधाओं पर जोर    ||    चालू वित्तवर्ष के पहले चार महीनों में बढ़िया रहा है म. रे. का कार्य-निष्पादन    ||    पश्चिम मध्य रेल ने उल्लासपूर्वक मनाया स्वतंत्रता दिवस समारोह    ||    आईआरपीएस अधिकारी राकेश कुमार को 70 हजार की रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने पकड़ा    ||    आईआरसीटीसी के पूर्व सीआरएम के. एम. त्रिपाठी को पांच साल की जेल

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रेल राज्यमंत्री के साथ महाप्रबंधक/उ.म.रे. की कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक

रेल राज्‍यमंत्री मनोज सिन्‍हा के साथ महाप्रबंधक प्रदीप कुमार ने उत्तर मध्य रेलवे, मुख्यालय सूबेदारगंज में कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक का आयोजन किया. बैठक में महाप्रबंधक/उ.म.रे. प्रदीप कुमार ने रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को एवं मुख्‍य जनसम्‍पर्क अधिकारी नवीन बाबू ने ईडी (इनोवेशन) मधुकर सिन्‍हा को पुष्‍प-गुच्‍छ देकर उनका स्‍वागत किया. बैठक के दौरान संरक्षा, साफ-सफाई, कैटरिंग इत्‍यादि विषयों पर चर्चा हुई. इस अवसर पर अपने संबोधन में रेल राज्‍यमंत्री मनोज सिन्‍हा ने उपस्थित उत्‍तर मध्‍य रेलवे मुख्‍यालय के अधिकारियों तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्‍यम से उत्‍तर मध्‍य रेलवे के तीनों मंडलों तथा आईआरपीएमयू, नई दिल्‍ली के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि क्रियान्‍वयन के स्‍तर पर आने वाली समस्‍याओं के निवारण के लिए रेल मंत्रालय की शक्तियों के विकेंद्रीकरण के निर्णय से यात्री सुविधा से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी.


रेल राज्‍यमंत्री ने रेल मंत्रालय द्वारा यात्रियों के फीडबैक के लिए 5 रेल गाड़ियों में प्रारम्‍भ की गई नई ऑन बोर्ड आईवीआरएस प्रणाली को यथासंभव शीघ्र विस्‍तारित करने की बात कही. उन्‍होंने जोनल स्तर पर रेल यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने एवं स्‍वच्‍छ वातावरण देने की दृष्टि से साफ-सफाई, कैटरिंग इत्‍यादि विषयों पर यात्रियों से फीडबैक प्राप्‍त करने के लिए प्रणाली विकसित करने की बात कही. उन्होंने रेल यात्रियों की शिकायतों के त्‍वरित निस्‍तारण के निर्देश भी दिए, ताकि आम जनता के मध्‍य रेल की छवि को बेहतर बनाया जा सके. उन्‍होंने रेल अधिकारियों को अनधिकृत वेंडिंग के विरूद्ध कड़े कदम उठाने तथा नियमित तौर पर चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए, जिससे अनधिकृत वेंडरों एवं अनिमित टिकट के साथ यात्रा करने वालों पर अंकुश लगाया जा सके.

जबलपुर स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन का लोकार्पण

पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म-1 पर 28 अगस्त को स्थानीय सांसद राकेश सिंह द्वारा इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन का लोकार्पण किया गया. इस अवसर पर महाप्रबंधक/प.म.रे. रमेश चंद्र, मुख्य वाणिज्य प्रबंधक शरत् चंद्र जेठी, मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंह एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक राजेश शर्मा आदि सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थिति थे. रेल मंत्रालय पेपर की बचत हेतु रेलवे कार्यालयों में पेपरलेस कार्य करने हेतु प्रयासरत है, इसी के अनुपालन में पश्चिम मध्य रेल द्वारा लम्बे समय से चली आ रही पेपर चार्टिंग प्रणाली में बदलाव करते हुए इस प्रणाली को पेपरलेस कर इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन लगाए गए हैं.


ऐसा बताया गया है कि जबलपुर स्टेशन पर लगे इस इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन की कुल लागत भारतीय रेल के अन्य स्टेशनों पर लगे इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन की तुलना में बहुत कम है. इस इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन में गाड़ी का चार्ट बनने के पश्चात् कन्फर्म, आरएसी एवं वेटिंग लिस्ट टिकट की स्थिति दर्शाई जाएगी, जिसमें कन्फर्म टिकट हेतु हरा रंग, आरएसी के लिए पीला एवं वेटिंग लिस्ट टिकट की स्थिति लाल रंग में दर्शाई जाएगी.

इस प्रणाली की खासियत यह है कि ट्रेन लेट होने पर इसमें मैनुअल फीडिंग भी की जा सकेगी. इस प्रणाली के लागू होने से यात्रियों को बहुत सुविधा होगी. पेपर चार्टिग प्रणाली में कई बार चार्ट के फटने या अन्य कारणों से यात्रियों को अपने टिकट की स्थिति देखने में असुविधा होती थी, किन्तु अब इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन लगने से यात्री सहजता से अपनी यात्रा टिकट की स्थिति जान सकेंगे.

बहुत कठिन है डीजल लॉबी के सामने रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की योजना

विभागीय वर्चस्व बनाए रखने वाली लॉबी के सामने धीमी पड़ी रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की योजना

रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की रेलमंत्री सदानंद गौड़ा की योजना रेलवे के विभागवाद और रेलवे में हावी डीजल एवं मैकेनिकल लॉबी के सामने धीमी पड़ गई है. रेलमंत्री की इस योजना को ठंडे बस्ते में डालने के लिए रेलवे में विभागीय वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है, जिसके चलते आज तक रेलवे का विकास हमेशा किसी एजेंडा में नहीं रहा है. रेलमंत्री की समस्या यह है कि उन्हें रेलवे का गहन अनुभव नहीं है और न ही उनके पास रेलवे और इसके नौकरशाहों की आपसी राजनीति समझने वाले कोई बेहतर सलाहकार ही हैं. यही वजह है कि रेलमंत्री तेजी से कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं. ऐसा लगता है कि रेलवे की कुटिल नौकरशाही ने उन्हें तमाम मुद्दों पर बुरी तरह से उलझाकर रख दिया है.

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले रेल बजट में रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की बात कही गई थी. मगर अब रेलवे के विभागवाद, विभागीय वर्चस्व, इसे बनाए रखने में नौकरशाही की गहराई तक जम चुकी जड़ें और खास हितों आदि को देखते हुए रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के लिए यह काम इतना आसान नहीं होने वाला है. रेलमंत्री गौड़ा का पहला रेल बजट मैकेनिकल डिपार्टमेंट के लिए एक बड़े सदमे से कम नहीं था, क्योंकि रेलमंत्री ने अपने बजट में रेलवे के तेज इलेक्ट्रिफिकेशन की बात कही थी. रेलवे में मैकेनिकल डिपार्टमेंट सबसे बड़ा और एक आवश्यक डिपार्टमेंट है, जो कि इसे और अधिक कुशल बनाने एवं पर्यावरण के अनुकूल गाड़ियों के संचालन तथा योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके अलावा रेलवे के ज्यादातर फंड का भी इस्तेमाल करता है.

रेलमंत्री को परंपरागत निहितस्वार्थों की रक्षा में डूबी इस नौकरशाही के निहितस्वार्थों के बीच से निकलकर और अंतर्विभागीय प्रतिद्वंद्विता को रोकते हुए इस राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के पुनर्गठन पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा. क्योंकि रेलवे बोर्ड में एक खास और बहुत पावरफुल लॉबी है, जो कि रेलवे के तेजी से विद्युतीकरण, अत्याधुनिक एवं पर्यावरण के अनुकूल ट्रेनों के संचालन, जो कि परंपरागत ट्रेनों से कई गुना ज्यादा कार्यक्षम और बेहतर परिणाम देने वाली हैं, तथा सिग्नलिंग एवं टेलीकम्यूनिकेशन आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को तेजी से लागू करने और समय पर उनको पूरा करने में बहुत सारे रोड़े अटकाती रही रही है. इसके अलावा यही वजह रही है कि यह तमाम रेल परियोजनाएं आवश्यक फंडिंग जुटाने में सफल नहीं हो पाई हैं.

लोको रेलवे अस्पताल, कानपुर में भ्रष्टाचार और हेराफेरी चरम पर

इलाहाबाद मंडल, उत्तर मध्य रेलवे के लोको रेलवे अस्पताल, कानपुर में भ्रष्टाचार और हेराफेरी चरम पर है. तमाम लिखित शिकायतें होने के बावजूद प्रशासन द्वारा आज तक कोई कारगर कार्रवाई नहीं की गई है. अस्पताल सीएमएस का चार्ज एसीएमएस को दिया गया है, जिसकी गतिविधियां काफी पहले से संदिग्ध रही हैं. मरीजों की मेडिकल/ पैथालोजिकल जांच, स्थानीय खरीद, सीटी स्कैन – एमआरआई, बीपी मशीन की खरीद, इम्प्लांट की सप्लाई, अल्ट्रा-साउंड, गाड़ी और एम्बुलेंस का किराए पर लिया जाना और उनका दुरुपयोग, सफाई कर्मियों की घरों में तैनाती, नालों की फर्जी सफाई आदि-आदि मदों में प्रतिमाह यहां लाखों का नुकसान रेलवे को किया जा रहा है. परंतु खुलेआम चल रहे इस भ्रष्टाचार और हेराफेरी पर रेल प्रशासन एवं विजिलेंस का कोई नियंत्रण नहीं हो पा रहा है.

कानपुर लोको रेलवे अस्पताल में चल रहे इस भ्रष्टाचार की विस्तृत लिखित शिकायत गोविंद नगर, कानपुर निवासी रामकेवल यादव ने रेलमंत्री को भेजी है. उन्होंने लिखा है कि इस अस्पताल में सबसे घटिया क्वालिटी वाली बीपी मशीन 2400 रु. में मंगाई जाती है, जबकि सबसे बढ़िया कंपनी (डायमंड) की सबसे बेहतर क्वालिटी की यही बीपी मशीन खुले बाजार में मात्र 800 रु. में उपलब्ध है. उन्होंने लिखा है कि इसमें सप्लायर को फायदा पहुंचाकर घोर कमीशनखोरी की जा रही है. इसके साथ ही पिछले करीब 10 साल से एक ही सप्लायर को इसकी सप्लाई का ठेका दिया जा रहा है.

सीनियर डीईएन और इंचार्ज पीडब्ल्यूआई की मिलीभगत का कारनामा

डीआरएम के लिखित आदेश को बायपास किया गया
खुद के बजाय अपने जूनियर को निलंबित करवाया

रेलवे में यदि किसी को फेवर करना हो और सम्बंधित अधिकारी यदि ऐसा ठान ले, तो स्याह को सफेद और सफेद को स्याह बनाने में उसे कोई देर नहीं लगती है. ऐसा ही एक कारनामा पूर्व सीनियर डीईएन2/लखनऊ मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे और वर्तमान सीपीएम/आरवीएनएल, कोलकाता हरिशंकर यादव ने तत्कालीन पीडब्ल्यूआई/गोरखपुर और वर्तमान एक्सईएन/आरई, इलाहाबाद एन. के. चौधरी को फेवर करने के लिए किया था.

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला 12 जनवरी 1999 का है. उस दिन रेल लाइन फैल जाने के कारण गोरखपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 5 पर प्रवेश करते हुए गाड़ी संख्या 5208 की 6 बोगियां डिरेल हो गई थीं. सुपरवाईजरी पीडब्ल्यूआई आर. आर. विसेन ने तत्काल इस डिरेलमेंट की सूचना कंट्रोल मैसेज से मुख्यालय और लखनऊ मंडल को दी थी. उनके साथ उनके इंचार्ज पीडब्ल्यूआई/मेंटेनेंस निशाकांत चौधरी उर्फ एन. के. चौधरी भी थे, जो इस डिरेलमेंट के लिए दोषी पाए गए थे.

तत्कालीन महाप्रबंधक और प्रमुख मुख्य अभियंता आर. के. सिंह (जो बाद में 16 वरिष्ठों को बायपास करके सीआरबी बने थे) तथा मंडल रेल प्रबंधक वी. के. जायसवाल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था. महाप्रबंधक ने उसी समय डीआरएम को निर्देश दिया था कि सेक्शन के इंचार्ज पीडब्ल्यूआई/मेंटेनेंस एन. के. चौधरी को लापरवाही के लिए तत्काल निलंबित करके उन्हें मेजर पेनाल्टी चार्जशीट (एसएफ-5) दी जाए तथा सुपरवाईजरी पीडब्ल्यूआई आर. आर. विसेन को सुपरविजन में कोताही के लिए माइनर पेनाल्टी चार्जशीट (एसएफ-11) दी जानी चाहिए.

उपरोक्त तथ्य की पुष्टि डीआरएम जायसवाल द्वारा 13 जनवरी 1999 को दिए गए गोपनीय नोट (संख्या जेड/एसएस-एलजेएन/इंजी./99) से भी होती है. जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि जीएम और सीई ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि रेल लाइन के फैलने (स्प्रेड होने) के कारण गाड़ी डिरेल हुई. इसके लिए इंचार्ज पीडब्ल्यूआई/मेंटेनेंस को लापरवाही के लिए तत्काल निलंबित किया जाए और सुपरविजन में कोताही के लिए सुपरवाईजरी पीडब्ल्यूआई को सुपरविजन में कोताही के लिए माइनर पेनाल्टी चार्जशीट दी जाए. (देखें- डीआरएम का उक्त नोट).

‘लार्जेस’ योजना : कैट के आदेश पर 8 महीने से रेलवे बोर्ड मौन

कैट ने कहा है –
यह पूरी योजना असंवैधानिक है..
इस योजना से वंशवाद को बढ़ावा मिल रहा है..
यह देश के प्रतिभावान लोगों के साथ भेदभाव है..
यह योजना नागरिकों के समानता के मूल अधिकारों के विरुद्ध है..
ऐसी योजना का जारी रहना संविधान की मूल भावना के विपरित है..

लिब्रलाइज्ड रिटायरमेंट स्कीम फॉर गारंटीड एम्लोयमेंट फॉर सेफ्टी स्टाफ (एलएआरएसजीईएसएस उर्फ लार्जेस) योजना रेलवे के कुछ विभागों के कर्मचारियों के लिए लागू की गई थी, जिसका लाभ रेलवे के ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट एवं कुछ अन्य विभागों के ग्रुप ‘डी’ कर्मचारियों को मिल रहा था. केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) जयपुर ने जनवरी 2014 में दिए गए अपने एक आदेश में इस पूरी योजना को असंवैधानिक करार दे दिया है. परंतु इसे लागू करने की बात तो दूर, रेल मंत्रालय द्वारा करीब 8 महीने बीत जाने के बाद भी कैट के इस आदेश पर कोई उचित निर्णय नहीं लिया गया है. रेल मंत्रालय द्वारा एक तरफ रेल कर्मचारियों की संख्या दिन-ब-दिन घटाने के का तमाम उपाय किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस प्रकार के आदेशों से भी कर्मचारियों को मिली सुविधा को कम करने के प्रयास जारी हैं.

कैट राजस्थान की जयपुर ब्रांच ने इस पूरी योजना को खत्म करने सम्बंधी अपने आदेश में रेलवे बोर्ड को दो महीने के भीतर देश भर में इस आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है. रेलवे में सेवारत कर्मचारी के स्थान पर वीआरएस के बदले उसके आश्रित को नौकरी देने को बैकडोर एंट्री मानते हुए कैट ने कहा है कि यह पूरी योजना असंवैधानिक है. यह देश के प्रतिभावान लोगों के साथ भेदभाव है और इससे वंशवाद को बढ़ावा मिल रहा है. कैट के सदस्य डॉ. के. बी. सुरेश और अनिल कुमार की पीठ ने अलवर के रेलकर्मी सुलेमान खान और उनके बेटे गनी खान द्वारा दायर की गई याचिका (654/2013) का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है.

कामनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली वेटलिफ्टर स्वाती सिंह का सम्मान

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक के. के. अटल एवं पूर्वोत्तर रेलवे महिला संगठन की अध्यक्ष श्रीमती अनीता अटल ने हाल ही में यहां आयोजित एक अभिनंदन समारोह में पूर्वोत्तर रेलवे एवं देश का नाम रोशन करने वाली वेटलिफ्टर स्वाती सिंह को ग्लास्गो, स्काटलैंड में संपन्न 20वें कामनवेल्थ गेम्स में 53 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतने पर प्रतीक चिन्ह, नकद पुरस्कार एवं उपहार प्रदान कर सम्मानित किया. इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री अटल ने कु. स्वाती सिंह की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि इन्होंने खेल जगत में अपनी इस विशिष्ट उपलब्धि से पूर्वोत्तर रेलवे के साथ ही भारतीय रेल एवं पूरे देश का मान बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि कु. स्वाती की यह उपलब्धि उनकी लगनशीलता, एकाग्रता, समर्पण एवं लक्ष्य के प्रति समर्पित दृष्टि का ही प्रतिफल है. श्री अटल ने आशा व्यक्त की कि कु. स्वाती सिंह द्वारा जीता गया यह कांस्य पदक उन्हें भविष्य में कई स्वर्ण पदक जीतने की प्रेरणा देगा. उन्होंने उनके परिवार के सदस्यों को भी बधाई देते हुए कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन द्वारा कु. स्वाती सिंह को हर प्रकार की अपेक्षित खेल सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन दिया जिससे वे खेल क्षितिज में एक उदीयमान तारे की तरह चमकती रहें.


इस अवसर पर पूर्वोत्तर रेलवे क्रीड़ा संघ के अध्यक्ष एवं मुख्य यांत्रिक इंजीनियर अनिल शर्मा ने कु. स्वाती सिंह को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि जल्दी ही में ताजकिस्तान में आयोजित होने वाली विश्व चैम्पियनशिप में वे भारत का नेतृत्व करते हुए स्वर्ण पदक हासिल करेंगी. इस मौके पर अपने प्रति वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा व्यक्त किए गए उदगारों से अभिभूत स्वाती सिंह ने पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक के. के. अटल एवं पूर्वोत्तर रेलवे महिला कल्याण संगठन की अध्यक्ष श्रीमती अनीता अटल के प्रति आभार व्यक्त किया और पूर्वोत्तर रेलवे क्रीड़ा संघ के अध्यक्ष एवं मुख्य यांत्रिक इंजीनियर अनिल शर्मा एवं अन्य सभी सम्बंधित अधिकारियों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद दिया. उन्होंने पूर्वोत्तर रेलवे क्रीड़ा संघ द्वारा प्रदान की गई सुविधाओं और सहयोग को अपनी सफलता का एक महत्वपूर्ण कारक बताया.

महाप्रबंधक द्वारा नवनिर्मित रनिंग रूम का उदघाटन और सुविधाओं का निरीक्षण

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक कृष्ण कुमार अटल ने 20 अगस्त को गोरखपुर रेलवे स्टेशन परिसर स्थित रनिंग स्टाफ हेतु नवीनीकृत एवं नवनिर्मित एकीकृत क्रू-रनिंग रूम का उद्घाटन किया. इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्मित डायनिंग हाल एवं किचन ‘अन्नपूर्णा’ का उद्घाटन तथा रनिंग रूम के नवनिर्मित पार्क में वृक्षारोपण भी किया. इस अवसर पर उनके साथ मंडल रेल प्रबंधक, लखनऊ अनूप कुमार, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर अनिल शर्मा, प्रमुख मुख्य इंजीनियर ओ. पी. अग्रवाल, मुख्य परिचालन प्रबंधक जी. डी. पांडेय तथा मुख्य वाणिज्य प्रबंधक अरविंद कुमार और मुख्यालय एवं मंडल के वरिष्ठ अधिकारी तथा रनिंग कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में रेलकर्मी उपस्थित थे.


इस मौके पर रेलवे सुरक्षा बल द्वारा गार्ड ऑफ़ ऑनर तथा स्काउट्स एंड गाइड्स द्वारा स्वागत धुन से महाप्रबंधक का स्वागत किया गया. तत्पश्चात महाप्रबंधक ने सलामी गारद का निरीक्षण किया. महाप्रबंधक अटल ने सभी उपस्थितों को संबोधित करते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा हेतु यातायात संचालन की महत्वपूर्ण धुरी ड्राइवर एवं गार्ड को सुरूचिपूर्ण एवं आरामदायक रनिंग रूम की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड में इस रनिंग रूम के उन्नयन तथा सम्पूर्ण भारतीय रेल पर सर्वोत्तम रनिंग रूम के लिए प्रतिवर्ष दी जाने वाली शील्ड तथा पुरस्कार देने का प्रस्ताव भेजा गया. रेलवे बोर्ड ने इस संदर्भ में पूरा सहयोग देते हुए यह व्यवस्था लागू कर दी है.

ईआरपीओए की एजीएम और नए पदाधिकारियों का चुनाव संपन्न

अधिकारियों की नाराजगी के चलते ए. के. श्रीवास्तव छह महीनों में ही ईआरपीओए से बाहर

ईस्टर्न रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स एसोसिएशन (ईआरपीओए) की वार्षिक सर्वसाधारण सभा (एजीएम) 21-22 अगस्त को यहां फेयरली प्लेस, कोलकाता स्थित पूर्व रेलवे मुख्यालय, जीएम कांफ्रेंस हाल में संपन्न हुई. इस अवसर पर जोनल कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों सहित पूर्व रेलवे मुख्यालय एवं सभी मंडलों के प्रतिनिधि और मंडल पदाधिकारी उपस्थित थे. अध्यक्ष वी. के. मणि के अध्यक्षीय संबोधन और महासचिव रिपोर्ट तथा कोषाध्यक्ष केशब भट्टाचार्जी के लेखा-जोखा प्रस्तुत करने के पश्चात् नए पदाधिकारियों एवं नई जोनल कार्यकारिणी का चुनाव भी कराया गया. पूर्व महासचिव डी. एन. वर्मा को इस मौके पर सर्वसम्मति से चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया.

श्री वर्मा के नेतृत्व में तीन साल के लिए चुनी गई नई जोनल कार्यकारिणी इस प्रकार है.. अध्यक्ष – एस. एस. कन्नन, सीनियर मैनेजर/पीएंडएस/मुख्यालय, कार्याध्यक्ष – अनिमेष साहा, डीईएन/कंस्ट्र./ट्रैक/मुख्यालय, उपाध्यक्ष – कार्तिक सिंह, डीसीएम/आसनसोल, केशब भट्टाचार्जी, एडब्ल्यूएम/लिलुआ, महासचिव – राना बंद्योपाध्याय, सीनियर एक्सईएन/कंस्ट्र./सियालदह, कोषाध्यक्ष – एल. के. नंदी, डीईएन/कंस्ट्र./सियालदह, संयुक्त सचिव – एस. के. बसु, एपीओ/राज./मुख्यालय, एस. एम. देब, डीईएन/मुख्यालय, संगठन सचिव – जयदिपेंदु खान, ओएसडी/एमएंडसी/लिलुआ, बी. राकेश, एपीओ/आसनसोल, के. भगत, एडब्ल्यूएम/मैन्यु./जमालपुर, डी. कुमार, एसएमई/क्रेन/पी/मुख्यालय, पी. टोप्पो, एडब्ल्यूएम/जमालपुर, एस. सी. यादव, एएमई/सीएंडडब्ल्यू/हावड़ा, एम. घोष, एलओ/हावड़ा, कार्यालय सचिव – के. सी. मिश्रा, डीईएन/बीआरसी/सियालदह, सहायक सचिव – मोहम्मद टी. अहमद, डीपीओ/हावड़ा, एस. हेम्ब्रम, सीनियर एलओ/मुख्यालय, कार्यकारिणी सदस्य – एस. दास, एएमपीएस/सेफ्टी/हावड़ा, जी. मंडल, एपीओ/मालदा, बी. मुर्मू, पीआरओ/आसनसोल, बी. पी. के. मिंज, एईई/जी/सियालदह.

पूर्व तट रेलवे : अधिकारी द्वारा अधिकार का दुरुपयोग

भ्रष्ट अधिकारी की गैर-क़ानूनी गतिविधियों की लिखित शिकायत करने वाले कर्मचारी का किया जा रहा है लगातार उत्पीड़न

भुवनेश्वर : कोई पावरफुल और प्रभावशाली अधिकारी चाहे तो वह उसके कृत्यों अथवा भ्रष्ट गतिविधियों में साथ न देने के लिए अपने मातहत किसी रेल कर्मचारी को किस हद तक परेशान और उत्पीड़ित कर सकता है, यह प्रस्तुत मामले से जाहिर होता है. पू.त.रे. कमर्शियल क्लेम्स विभाग के पूर्व प्रजेंटिंग ऑफिसर कुबेर चंद प्रधान उर्फ के. सी. प्रधान ने अपने मातहत कार्यरत रहे सीनियर क्लर्क डी. के. प्रतिहारी का इसलिए कथित उत्पीड़न किया, क्योंकि प्रतिहारी ने उनकी तमाम कथित गैर-क़ानूनी गतिविधियों में उनका साथ नहीं दिया था.

कमर्शियल क्लेम्स विभाग, पू.त.रे. में 5 जून 2009 से कार्यरत प्रतिहारी ईमानदारी से अपना काम कर रहे थे और अधिकारियों द्वारा दी गई जिम्मेदारी का निर्वाह भी पूरे दायित्व से कर रहे थे, कि तभी 6 अप्रैल 2010 को बतौर प्रजेंटिंग ऑफिसर के. सी. प्रधान कमर्शियल क्लेम्स में पदस्थापित हुए और वहां का सारा कार्य-वातावरण बदल गया. उनकी कथित गलत गतिविधियों में शामिल नहीं होने और अनर्गल एवं गैर-क़ानूनी आदेशों, जिससे रेलवे रेवेन्यु एवं रेल संपत्ति का नुकसान हो रहा था, का पालन नहीं करने के लिए उन्होंने सीनियर क्लर्क प्रतिहारी को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित और उत्पीड़ित करना शुरू कर दिया. कमर्शियल क्लेम्स में बतौर प्रजेंटिंग ऑफिसर प्रधान का कार्यकाल पू.त.रे. में एक काला धब्बा है. यह कहना है सीनियर क्लर्क प्रतिहारी का. प्रधान वर्तमान में प.त.रे. मुख्यालय, भुवनेश्वर में डिप्टी सीसीएम/पीएस-प्लानिंग के पद पर काम कर रहे हैं.

प्रतिहारी का कहना है कि यदि रेल प्रशासन के. सी. प्रधान के कार्यकाल में उनके अनेक आदेशों और किए गए तमाम कार्यों की समीक्षा एवं गहन जांच करवाए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि पूर्व प्रजेंटिंग ऑफिसर के. सी. प्रधान कितने ईमानदार अधिकारी हैं और उनके गैर-क़ानूनी आदेशों से रेलवे को कितना भारी नुकसान हुआ है? प्रतिहारी का कहना है कि प्रधान के गलत और रेलवे को नुकसान पहुंचाने वाले आदेशों को न मानने के कारण ही प्रधान ने अपनी जॉइनिंग के मात्र 24 दिन बाद ही उनका तबादला सीसीएम कार्यलय में कर दिया था. मगर उनके काम और लगन को देखते हुए 4 मार्च 2011 को पुनः उनकी पोस्टिंग कमर्शियल क्लेम्स में कर दी गई थी. परंतु बिना किसी गलती अथवा बिना किसी वाजिब कारण के ही प्रधान ने उन्हें 6 सितंबर 2011 को निलंबित कर दिया था.

मुंबई मंडल, म.रे. के एक खास ठेकेदार का लगातार किया जा रहा है फेवर

एक अन्य इंजीनियरिंग ठेकेदार फर्जी काम के करीब साढ़े तीन करोड़ लेकर गायब

मध्य रेल, मुंबई मंडल का इंजीनियरिंग विभाग हमेशा से कुछ खास ठेकेदारों का फेवर करता रहा है. और जब बात बिरादरी की हो, तो यह फेवर आंख बंद करके दूध पीने वाली बिल्ली की तरह और भी बेशर्मी से किया जाता है. यही स्थिति पिछले दो साल से मुंबई मंडल, मध्य रेलवे के एक खास इंजीनियरिंग ठेकेदार के साथ चल रही है. यहां ठेकेदार एवं अधिकारी ‘मौसेरे भाई’ हो गए हैं, जिससे ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ वाली कहावत अब बदल गई है.

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडल के एक खास ठेकेदार को फेवर करने के लिए उत्तर-पूर्व सेक्शन के कई इंजीनियरिंग कार्यों को क्लब करके एक बड़ा टेंडर किया गया. यह टेंडर 14 अगस्त को ओपन हुआ है. इसकी कुल लागत 4.30 करोड़ रुपए रखी गई है. सूत्रों का कहना है कि 4.30 करोड़ का यह टेंडर उक्त खास ठेकेदार के लिए ही बनाया गया था और आखिर उसे ही मिल गया है. बताते हैं कि इससे पहले जब यह टेंडर कई कार्यों को क्लब करके करीब 4.70 करोड़ का बनाया गया था, तब मंडल के कई इंजीनियरिंग अधिकारियों सहित कुछ ठेकेदारों के कथित विरोध के बहाने इसे घटाकर बाद में 4.30 करोड़ का कर दिया गया.

‘लार्जेस’ पर रेलवे बोर्ड की चुप्पी

रेलवे बोर्ड ने श्रमिक संगठनों से पंगा न लेने के लिए कैट के निर्णय को दबा दिया

रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) ने कुछ समय पहले रेलवे के मान्यताप्राप्त श्रमिक संगठनों के दबाव में 57 साल तक की आयु पूरी कर चुके सेफ्टी कैटेगरी के रेल कर्मचारियों के लिए एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना शुरू की थी. पहले इसमें 55 साल तक आयु सीमा थी, जिसे बाद में श्रमिक संगठनों के ही दबाव में बढ़ाकर 57 साल किया गया था. इस योजना के तहत 57 साल की आयु पूरी कर चुके सेफ्टी कैटेगरी के रेल कर्मचारी पूरे सेवानिवृत्ति लाभ के साथ सेवानिवृत्त होकर अपनी जगह अपने किसी एक बच्चे या किसी सगे-सम्बंधी को रेलवे की नौकरी पर रखवा सकते हैं.

हालांकि इस योजना का पूरा नाम भी शायद किसी श्रमिक नेता और रेल अधिकारी को याद नहीं होगा, मगर शार्ट में इसे ‘लार्जेस’ (एलएआरएसजीईएसएस) कहा जाता है. इस योजना का भारी दुरुपयोग हुआ है. कई श्रमिक नेताओं ने अपने खास और आगे-पीछे घूमने वाले लोगों तक ही इस योजना का लाभ पहुंचाया है, जबकि इससे असल में लाभान्वित होने वाले अधिकांश कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है, क्योंकि इसकी प्रक्रिया को इतना जटिल और अधिकारियों एवं श्रमिक नेताओं की ही समझ में आने वाला बनाया गया है कि कोई भी पात्र कर्मचारी बिना उन्हें दान-दक्षिणा चढ़ाए इस योजना का लाभ नहीं ले सकता है, और न ही अब तक कोई कर्मचारी यह लाभ ले पाया है.

रेल टिकट की बिक्री के विकेंद्रीकरण का चौतरफा स्वागत

रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) ने 8 अगस्त को एक कमर्शियल सर्कुलर (नंबर 33/2014) जारी करके रेलवे की आरक्षित एवं अनारक्षित टिकटों की बिक्री का विकेंद्रीकरण किए जाने को मंजूरी दे दी है. इससे अब सभी यूटीबीएस के साथ सभी पूर्व रेलवे टिकट सर्विस एजेंट (आरटीएसए) को आरक्षित एवं अनारक्षित रेल टिकटों की बिक्री करने की सुविधा विस्तारित होगी. उल्लेखनीय है कि हाल ही में रेलवे बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की आड़ में नियमों को तोड़-मरोड़कर देश भर में फैले करीब एक हजार आरटीएसए की मान्यता तुरंत प्रभाव से खत्म कर दी थी और रेलमंत्री पर भी कुछ इस तरह का दबाव बनाया हुआ था कि वह चाहकर भी इस मामले में आरटीएसए की अपील पर कुछ नहीं कर पाए थे, जिससे कुछ आरटीएसए ने बोर्ड के निर्णय को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती भी दी है.

परंतु अब रेलमंत्री के इस नए निर्णय से न सिर्फ सभी आरटीएसए खुश हो गए हैं, बल्कि उनके करीब दस हजार कर्मचारी भी बेरोजगार होने से बच गए हैं. इसके अलावा करोड़ों रेल यात्रियों और जन-सामान्य द्वारा भी इस रेल टिकट बिक्री विकेंद्रीकरण योजना का चौतरफा स्वागत किया गया है. इससे अब उन्हें रेलवे के आरक्षण कार्यालयों और टिकट घरों पर लंबी लाइन लगाने से छुटकारा मिल जाएगा तथा उनके कीमती समय की भी बचत होगी. इसके अलावा रेलवे स्टेशनों और उनके आसपास भीड़ भी नहीं होगी, जिससे लोगों की आवाजाही सुगम हो सकेगी.

दिल्ली हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विधि व्याख्यान

‘नागरिक गरिमा - विधिक परिप्रेक्ष्य’ के संदर्भ में न्यायाधीश श्री दीपक मिश्रा का सारभूत उद्बोधन

दिल्ली हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिऐशन द्वारा आयोजित विधि व्याख्यान में पधारे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश माननीय श्री दीपक मिश्रा द्वारा भारतीय संविधान में लिखित प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए भारतीय नागरिकों की गरिमा विषय पर प्रकाश डाला गया. विधि व्याख्यान के विषय - ‘नागरिक गरिमा - विधिक परिप्रेक्ष्य’ के संदर्भ में उन्होंने भारतीय नागरिकों की तब और अब की स्थिति पर उनके हितार्थ बनाए गए विभिन्न कानूनों की विस्तृत जानकारी दी. इसी विषय के संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सबको सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार है. इस संदर्भ में माननीय न्यायमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का भी उल्लेख भी किया.


कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया. हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार सोसिऐशन के पूर्व प्रतिनिधियों द्वारा मंचासीन अतिथियों का पुष्प-गुच्छ देकर स्वागत किया गया. स्वागत समारोह के उपरांत कार्यक्रम के अध्यक्ष मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री ए. एम. खानविलकर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सभी नागरिकों की गरिमा की महत्ता को रेखांकित करते हुए अधिवक्ताओं के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के अन्य कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में उपस्थित महाधिवक्ता श्री आर. डी. जैन भी उपस्थित थे. स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष श्री रामेश्वर नीखरा द्वारा भी विधि व्याख्यान के विषय पर जानकारी प्रस्तुत की गई.

एक बालक था, जिसका नाम था अरुण कुमार गुप्ता..

अरुणेंद्र कुमार का डीएनए टेस्ट करवाकर इनकी असली उम्र तय की जानी चाहिए
नौवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान अरुणेंद्र कुमार ने अपना नाम बदलने के साथ दो साल चार महीने कम करवाई थी अपनी उम्र

एक बालक था, जिसका नाम था ‘अरुण कुमार गुप्ता’.. जो कि बाद में ‘अरुणेंद्र कुमार’ बन गया.. हां, ये सच है कि आज के ‘अरुणेंद्र कुमार’ कभी ‘अरुण कुमार गुप्ता’ हुआ करते थे. ये पैदाइसी चालबाज रहे हैं, जो कि इनकी भीतरघाती गतिविधियों से आज तक जाहिर है. ये कुटिल और खुंदकी भी हैं, जिसे ये कभी जाहिर नहीं होने देते, मगर भीतरघाती प्रवृत्ति के चलते अपने विरोधियों अथवा अपने से इत्तिफाक न रखने वालों को बड़ी चालाकी से एक-एक करके दरकिनार करने में इन्हें बहुत बड़ी महारत हासिल है, जिसे इन्होंने सीआरबी बनने से पहले और उसके बाद बड़ी खूबी से अंजाम दिया है. जिसके तमाम उदाहरण अब तक लगभग सभी बोर्ड मेंबरों, बोर्ड के तमाम अधिकारियों और जोनल रेलों को मिल चुके हैं.

तो ये आज के ‘अरुणेंद्र कुमार’ कभी ‘अरुण कुमार गुप्ता’ हुआ करते थे. जी हां, ये सौ फीसदी सही है. इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है. लखनऊ के सुप्रसिद्ध ‘काल्विन तालुकदार कॉलेज’ में पढ़ने वाले ‘अरुण कुमार गुप्ता’ ने नौवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान एक हलफनामा देकर अपना नाम बदलकर ‘अरुणेंद्र कुमार’ कर लिया था. यही नहीं, उसी समय इन्होंने अपनी उम्र भी दो साल चार महीने कम करवा ली थी. उसी की बदौलत आज ये रेलवे बोर्ड के चेयरमैन बने बैठे हैं. यह काम इनके सम्माननीय माता-पिता ने करवाया था, जिनकी दूरंदेसी की वास्तव में दाद देनी होगी, कि उन्होंने अपनी व्यावसायिक चालाकी के सारे गुण-अवगुण भी अपने इस कुटिल बेटे के जेहन में तभी भर दिए थे, जिसकी बदौलत आज ये सीआरबी हैं.

असुरक्षित तथाकथित प्रतिष्ठित राजधानी एक्सप्रेस

सुरेश त्रिपाठी

पिछले दिनों पश्चिम रेलवे की मुंबई राजधानी एक्सप्रेस में लगातार तीन दिन तक यात्रियों का समान चोरी हुआ. इस दौरान करीब पांच महिलाओं का समान चोरी हुआ. ज्यादा हंगामा तब मचा, जब चोरों ने पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक की पत्नी का ही समान उड़ा लिया, जो कि सामान्य यात्रियों की ही तरह राजधानी एक्सप्रेस के सेकंड एसी कोच में मुंबई से दिल्ली की यात्रा कर रही थीं. हालत ये है कि चोरों को उसी कोच में यात्रा कर रहे मुंबई मंडल, पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, रेलवे सुरक्षा बल की उपस्थिति का भी कोई खौफ नहीं रहा है. विडम्बना इस बात की है कि चोरों ने पूरी व्यवस्था को चुनौती देते हुए लगातार तीन दिन इस तथाकथित प्रतिष्ठित गाड़ी में चोरी की, मगर उन्हें आज तक पकड़ा नहीं जा सका है. अब जब महाप्रबंधक की पत्नी खुद लुट गईं हैं, तो इस गाड़ी में सादी वर्दी में सुरक्षा स्टाफ को लगाए जाने का निर्णय लिया गया है.

इस तथाकथित प्रतिष्ठित गाड़ी की बड़ी चर्चाएं होती हैं, मगर अन्य गाड़ियों की अपेक्षा दिल्ली जाने-आने के लिए इसके कम समय लेने के अलावा इसकी अन्य कोई खूबी नहीं है. फिर चाहे इसकी झटके खाती कपलिन की बात हो, या इसके रख-रखाव की बात हो, अथवा खानपान या कैटरिंग एवं कोच स्टाफ के व्यवहार की बात हो, या थर्ड एसी कोचों के यात्रियों को थर्ड क्लास खाना परोसे जाने और हाथ में पकड़ाए जाने वाले चाय/कॉफी के किट और थर्मस हों, कंबलों और लिनन से उठती धूल के तो क्या कहने? यानि इस तथाकथित प्रतिष्ठित गाड़ी में कोई एक ही कमी नहीं है. यह तो इनमें से कभी-कभी कोई एक कमी उछलकर बाहर आ जाती है, तो उसकी चर्चा हो जाती है. बाकी तो सब अपने ढ़र्रे पर चलता रहता है. यात्री भी तभी अपनी आवाज उठाते हैं जब किसी बात की अति हो जाती है और उनकी सहनशीलता जवाब दे जाती है.

रेलमंत्री द्वारा आईआरसीटीसी के चौथे ‘रेल-नीर’ संयंत्र का उदघाटन

आईआरसीटीसी की रेल नीर उत्पादन क्षमता हुई सवा छह लाख बोतल प्रतिदिन

भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम लि. (आईआरसीटीसी) के मुंबई स्थित चौथे ‘रेल-नीर’ संयंत्र का उदघाटन बुधवार, 13 अगस्त को रेलमंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा द्वारा रिमोट के जरिए रेल भवन, दिल्ली से किया गया. इस अवसर पर रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, रेलवे बोर्ड के मेंबर ट्रैफिक देवीप्रसाद पांडेय सहित आईआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक एवं अन्य सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. आईआरसीटीसी का आधुनिक तकनीक से सुसज्ज यह चौथा ‘रेल-नीर’ संयंत्र मुंबई से करीब 65 किमी. दूर ठाणे जिले के अंबरनाथ में स्थित है. कुल करीब 23.50 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 2 लाख बोतल बंद पानी की है.

आईआरसीटीसी के इस नए और चौथे रेल-नीर संयंत्र की उत्पादन क्षमता इसके पहले के तीनों संयंत्रो से ज्यादा है. उल्लेखनीय है कि आईआरसीटीसी का पहला संयंत्र दिल्ली के पास नांगलोई में वर्ष 2003 में शुरू हुआ था. इसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 1.30 लाख बोतल की है. इसका दूसरा संयंत्र पटना के पास दानापुर में वर्ष 2004 में शुरू हुआ था, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 1 लाख बोतलों की है. जबकि इसका तीसरा संयंत्र चेन्नई के पास पालूर में स्थित है. यह वर्ष 2011 में शुरू हुआ था और इसकी प्रतिदिन उत्पादन क्षमता 1.80 लाख बोतलों की है. आईआरसीटीसी द्वारा मुंबई के पास अंबरनाथ में शुरू किए गए अपने इस चौथे संयंत्र से मध्य एवं पश्चिम रेलवे के मुंबई सहित पुणे, सोलापुर और नासिक जिलों तक के रेलवे स्टेशनों पर रेल नीर ब्रांड के गुणवत्तापूर्ण बोतल-बंद पानी की आपूर्ति की जाएगी. इससे स्थानीय और लोकल ब्रांड के गैर-गुणवत्तापूर्ण बोतल-बंद पानी से यात्री को काफी हद तक छुटकारा मिलेगा.

पूर्व रेलवे का कार्य-निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर -आर.के.गुप्ता

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक आर. के. गुप्ता ने पूर्व रेलवे मुख्यालय, फेयरली प्लेस, कोलकाता पर 68वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को ध्वजारोहण के बाद सभी रेलकर्मियों, उनके परिजनों तथा रेल उपभोगकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूर्व रेलवे ने चालू वित्तवर्ष के पहले तीन महीनों के निर्धारित माल लोडिंग के लक्ष्य को पार करके बेहतर कार्य-निष्पादन का संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि यात्रियों परिवहन के मामले में भी पूर्व रेलवे अपने काम को बेहतरीन तरीके से अंजाम देकर राष्ट्र की आर्थिक तथा औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार माह में भी पूर्व रेलवे का कार्य निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में काफी अच्छा है.

इस अवसर पर श्री गुप्ता ने कहा कि पूर्व रेलवे ने चालू वर्ष के लिए तय लक्ष्य 15.660 मिलियन टन को पार करके अप्रैल से जून 2014 की पहली तिमाही के दौरान कुल 16.172 मिलयन टन की फ्रेट रेवेन्यु लोडिंग दर्ज की है. गत वर्ष की समान अवधि में यह कुल 14.046 मिलियन टन थी. इस प्रकार पूर्व रेलवे ने गत वर्ष की तुलना में पहली ही तिमाही में 15.14% की वृद्धि हासिल की है. इस अवधि में पूर्व रेलवे की कोयला लोडिंग 11.07 मिलियन टन रही है. जो कि गत वर्ष की समान अवधि में 9.315 मिलियन टन थी.

पश्चिम रेलवे द्वारा माल लदान, आमदनी बढ़ाने तथा यात्री सुविधाओं पर जोर

68वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर चर्चगेट स्थित प्रधान कार्यालय में आयोजित समारोह में पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक हेमंत कुमार ने ध्वजारोहण किया. इस अवसर पर आरपीएफ परेड का निरीक्षण किया और मार्चपास्ट की सलामी ली. रेलकर्मियों एवं उनके परिवारों को शुभकामनाएँ देते हुए महाप्रबंधक हेमंत कुमार ने हाल ही में कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने वाले पश्चिम रेलवे के खिलाड़ियों को उनकी सफलता पर बधाई दी. महाप्रबंधक हेमंत कुमार ने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों के दौरान पश्चिम रेलवे पर 26 मिलियन टन से भी अधिक माल का लदान हुआ है, इसी अवधि में प्रारम्भिक माल आमदनी लगभग 3517 करोड़ रु. रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है. जुलाई, 2014 तक कुल प्रारम्भिक आमदनी 5100 करोड़ रु. से अधिक रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत ज़्यादा है. चालू वर्ष के दौरान लैंड रिसोर्सेज से लगभग 38 करोड़ रु. प्राप्त हुए, जो लक्ष्य की तुलना में 200 प्रतिशत से भी अधिक हैं.

उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के दौरान पश्चिम रेलवे में मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों का समयपालन लगभग 97 प्रतिशत रहा है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में प.रे. द्वारा 6531 हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, जो 2012-13 की तुलना में 106 प्रतिशत अधिक हैं. इस वर्ष के बजट में पश्चिम रेलवे पर 34 नई ट्रेनें घोषित की गई हैं. इनमे से अब तक 3 ट्रेनें शुरू की गई हैं. साथ ही 2059 हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं. अस्थायी अथवा दैनिक आधार पर विभिन्न ट्रेनों में 3300 से अधिक अतिरिक्त डिब्बे जोड़े गए, जिनके फलस्वरूप लगभग 2 लाख 55 हज़ार अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध कराई गई हैं. इस वर्ष 7 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की गति बढ़ाई गई है.

चालू वित्तवर्ष के पहले चार महीनों में बढ़िया रहा है म. रे. का कार्य-निष्पादन

68वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को महाप्रबंधक सुनील कुमार सूद ने मध्य रेलवे मुख्यालय, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर ध्वजारोहण के बाद सभी रेलकर्मियों, उनके परिजनों तथा लाखों रेल उपभोगकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्य रेल माल एवं यात्रियों परिवहन को दक्षतापूर्ण एवं किफायती तरीके से अंजाम देकर राष्ट्र की आर्थिक तथा औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार माह में म.रे. का कार्य निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर रहा है. इस दौरान कुल प्रारंभिक अर्जन 2980 करोड़ रु. से बढ़कर 3472 करोड़ रु. हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 16% अधिक है. इसी तरह कुल प्रभाजित अर्जन 3331 करोड़ रु. से बढ़कर 3792 करोड़ रु. हुआ, जो कि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14% अधिक है.

उन्होंने कहा कि चालू वर्ष के पहले चार महीनों में प्रारंभिक फ्रेट लोडिंग 17.31 मिलियन टन से बढ़कर 19.21 मिलियन टन हुई है, जो कि पिछले वर्ष से 11 तथा 18.35  मिलियन टन के लक्ष्य से 4.7% अधिक है. इस अवधि में 179 वीपी रेकों को लोड किया गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 101 रेकों को लोड किया गया था. चालू वित्तीय वर्ष में टिकट जांच अर्जन 34 करोड़ से बढ़कर 39 करोड़ रु. हुआ, जो कि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14% अधिक है. उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में 67 करोड़ रु. के स्कैप की बिक्री हुई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 47 करोड़ रु. के स्क्रैप की बिक्री की गई थी. इस मद में 44% की बढ़ोतरी हुई है. म.रे. ने 2013-14 के रेल बजट में की गई घोषणा के अनुसार लंबी दूरी की गाड़ियां भी चलाई हैं.

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