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एडीजी/पीआर द्वारा रेलमंत्री एवं रेल राज्यमंत्री की पब्लिसिटी का घोर लापरवाह तरीका    ||    रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने की द.पू.रे. और मेट्रो रेलवे की कार्य-निष्पादन समीक्षा    ||    ‘रेलवे समाचार’ के खिलाफ रेलवे बोर्ड के तीन असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी फतवे    ||    नौकरशाही के ‘संगठित गिरोह’ से लड़ने की अब कौन करेगा हिमाकत !    ||    रेल परिचालन बहुत जिम्मेदारी और सतर्कता का काम है –मुकेश निगम    ||    यूनियन की मनमानी के खिलाफ सभी अधिकारी एकजुट    ||    एआईआरएफ का एफडीआई के खिलाफ विरोध दिवस    ||    आरपीएसएफ कमान्डेंट को रिश्वत लेते सीबीआई ने रंगेहाथ धरा    ||    2 अक्टूबर को की जाएगी रेलवे द्वारा सफाई अभियान की शुरुआत    ||    डकार गए रेलवेमेंस कांग्रेस के महामंत्री उत्तराखंड त्रासदी की आपदा सहायता राशि    ||    मुंबई मंडल, मध्य रेलवे इंजीनियरिंग विभाग का कारनामा    ||    गाड़ियों की संख्या में वृद्धि के साथ संरक्षा भी चिंता का प्रमुख विषय है –प्रदीप कुमार    ||    आईआरएमएस एसोसिएशन द्वारा मेडिकल एजूकेशन कार्यक्रम का आयोजन    ||    नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के तत्वावधान में हिंदी प्रतियोगिताएं आयोजित    ||    उत्तर रेलवे एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल द्वारा संयुक्त मोक ड्रिल    ||    खेद है...    ||    रेल राज्यमंत्री के साथ महाप्रबंधक/उ.म.रे. की कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक    ||    जबलपुर स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन का लोकार्पण    ||    बहुत कठिन है डीजल लॉबी के सामने रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की योजना    ||    लोको रेलवे अस्पताल, कानपुर में भ्रष्टाचार और हेराफेरी चरम पर

Suresh Tripathi, Editor, 105, Doctor House, 1st Floor, Raheja Complex, Kalyan (West) - 421301. Distt. Thane (Maharashtra). Contact:+919869256875 Email : editor@railsamachar.com, railwaysamachar@gmail.com

एडीजी/पीआर द्वारा रेलमंत्री एवं रेल राज्यमंत्री की पब्लिसिटी का घोर लापरवाह तरीका    ||    रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने की द.पू.रे. और मेट्रो रेलवे की कार्य-निष्पादन समीक्षा    ||    ‘रेलवे समाचार’ के खिलाफ रेलवे बोर्ड के तीन असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी फतवे    ||    नौकरशाही के ‘संगठित गिरोह’ से लड़ने की अब कौन करेगा हिमाकत !    ||    रेल परिचालन बहुत जिम्मेदारी और सतर्कता का काम है –मुकेश निगम    ||    यूनियन की मनमानी के खिलाफ सभी अधिकारी एकजुट    ||    एआईआरएफ का एफडीआई के खिलाफ विरोध दिवस    ||    आरपीएसएफ कमान्डेंट को रिश्वत लेते सीबीआई ने रंगेहाथ धरा    ||    2 अक्टूबर को की जाएगी रेलवे द्वारा सफाई अभियान की शुरुआत    ||    डकार गए रेलवेमेंस कांग्रेस के महामंत्री उत्तराखंड त्रासदी की आपदा सहायता राशि    ||    मुंबई मंडल, मध्य रेलवे इंजीनियरिंग विभाग का कारनामा    ||    गाड़ियों की संख्या में वृद्धि के साथ संरक्षा भी चिंता का प्रमुख विषय है –प्रदीप कुमार    ||    आईआरएमएस एसोसिएशन द्वारा मेडिकल एजूकेशन कार्यक्रम का आयोजन    ||    नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के तत्वावधान में हिंदी प्रतियोगिताएं आयोजित    ||    उत्तर रेलवे एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल द्वारा संयुक्त मोक ड्रिल    ||    खेद है...    ||    रेल राज्यमंत्री के साथ महाप्रबंधक/उ.म.रे. की कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक    ||    जबलपुर स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन का लोकार्पण    ||    बहुत कठिन है डीजल लॉबी के सामने रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की योजना    ||    लोको रेलवे अस्पताल, कानपुर में भ्रष्टाचार और हेराफेरी चरम पर

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एडीजी/पीआर द्वारा रेलमंत्री एवं रेल राज्यमंत्री की पब्लिसिटी का घोर लापरवाह तरीका

दिल्ली में 8 सितंबर 2014 को प्रेस को संबोधित करते हुए रेलमंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा. उनके साथ हैं रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा और चेयरमैन, रेलवे बोर्ड अरुणेन्द्र कुमार. 17 सितंबर को रेलवे बोर्ड की वेबसाइट से डाउनलोड की गई इस फोटो के परिचय के साथ कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि रेलमंत्री और रेल राज्यमंत्री किस विषय पर प्रेस को संबोधित कर रहे थे? हमेशा सीआरबी के आगे-पीछे घूमने वाले एडीजी/पीआर/रे.बो. ए. के. सक्सेना और उनके स्टाफ द्वारा की जाने वाली रेलमंत्री एवं रेल राज्यमंत्री की पब्लिसिटी का यह है घोर लापरवाह तरीका !!

रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने की द.पू.रे. और मेट्रो रेलवे की कार्य-निष्पादन समीक्षा

दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय, गार्डन रीच, कोलकाता में हाल ही में रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने दक्षिण पूर्व रेलवे और मेट्रो रेलवे के महाप्रबंधक राधेश्याम के साथ कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक की. इस अवसर पर दक्षिण पूर्व रेलवे और मेट्रो रेलवे के सभी विभाग प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे. बैठक में दक्षिण पूर्व रेलवे एवं मेट्रो के महाप्रबंधक राधेश्याम से चर्चा करते हुए रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा.

‘रेलवे समाचार’ के खिलाफ रेलवे बोर्ड के तीन असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी फतवे

सुरेश त्रिपाठी

रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) ने ‘परिपूर्ण रेलवे समाचार’ और इसके संपादक के खिलाफ सीबीआई की संस्तुति और रेलवे बोर्ड विजिलेंस की सलाह पर (ई(ओ)III-2014/पीएल/07, दि. 21.08.2014, ई(ओ)III-2014/पीएल/07, दि. 27.08.2014 और ई(ओ)III-2014/पीएल/07, दि. 3.9.2014) तीन असंवैधानिक, गैर-क़ानूनी एवं मानहानिकारक आदेश सभी जोनल महाप्रबंधकों को जारी किए हैं. पहले आदेश में संपादक को एक ‘अवांछित’ व्यक्ति करार देते हुए कहा गया है कि उससे कोई भी रेल अधिकारी कोई संबंध न रखे, जबकि दूसरे आदेश में सभी जोनल मुख्य जनसंपर्क अधिकारियों को कहा गया है कि ‘परिपूर्ण रेलवे समाचार’ को कोई विज्ञापन न दिए जाएं. तीसरे आदेश में पहले आदेश को और विस्तारित करते हुए रेलवे के सभी रेलकर्मियों को यह आदेश दिया गया है कि वे ‘परिपूर्ण रेलवे समाचार’ और इसके संपादक से किसी प्रकार का कोई संबंध न रखें.

वर्ष 1997 से प्रकाशित ‘रेलवे समाचार’ ने खासतौर पर भारतीय रेल की तमाम गतिविधियों पर अपना फोकस रखा है. इसके किसी भी प्रतिनिधि ने आजतक रेलवे से किसी भी प्रकार की कोई सरकारी सुविधा का कोई लाभ नहीं लिया है. यदि आपातकालीन कोटा लिया गया है, तो यह हमारा अधिकार है. जहां तक विज्ञापन की बात है, तो डीएवीपी नहीं होने से यह वैसे भी नहीं दिए जाते हैं. ऐसे में उपरोक्त तीन-तीन फतवे जारी करने की आखिर रेलवे बोर्ड को क्या जरुरत आन पड़ी थी? इसका एकमात्र कारण यही हो सकता है कि ‘रेलवे समाचार’ रेलवे बोर्ड और जोनल स्तर के कई वरिष्ठ रेल अधिकारियों के भ्रष्टाचार और जोड़तोड़ को पुरजोर तरीके से उजागर करता रहा है. रेलवे बोर्ड स्तर पर होने वाली नीतिगत जोड़तोड़, उच्च पदों की पदस्थापना में होने वाले भ्रष्टाचार और जोड़तोड़ तथा नीतियों को तोड़ने-मरोड़ने आदि को उजागर किए जाने से रेलवे की नौकरशाही की एक खास लॉबी इससे बुरी तरह बौखलाई हुई है.

नौकरशाही के ‘संगठित गिरोह’ से लड़ने की अब कौन करेगा हिमाकत !

सुरेश त्रिपाठी

देश के प्रशासनिक तंत्र में कुछ ऐसे पद होते हैं, जिनकी प्रतिष्ठा या गरिमा को कायम रखने और उनकी जिम्मेदारी निभाने के लिए यह जरुरी होता है कि उनकी अहमियत को समझा जाए. उन पर बैठकर जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को परखा जाए. पद की प्रतिष्ठा को बनाए रखा जाए और उसकी इज्जत की जाए तथा उसकी गरिमा को सर्वोपरि माना जाए. मगर अफसोस कि ऐसा नहीं हो रहा है. यह अत्यंत शर्मनाक बात है. सीबीआई चीफ का पद भी एक ऐसा ही महत्वपूर्ण पद है. भ्रष्टाचार को रोकने और जांचने सहित देश भर के लगभग सभी गलत कार्यों तथा देश की सुरक्षा से सम्बंधित तमाम मामलों की जांच करने के लिए बनी यह जांच एजेंसी पुलिस एवं सभी सरकारी महकमों की जांच करती है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से जैसी खबरें आ रही हैं, उनसे इस प्रतिष्ठित और पावरफुल पद की गरिमा लगभग तार-तार हो गई है. पूरा देश इस मामले को अपनी सांसें थामकर देख रहा है. देश की सर्वोच्च अदालत सीबीआई चीफ को लगातार घेरती जा रही है. यह सब देखते हुए सर्व-सामान्य आदमी अपना सिर धुन रहा है कि आखिर चारित्रिक गिरावट का यह क्रम कहां जाकर थमेगा?

ऐसा ही एक पद सीएजी का भी है. इस पर विराजमान रहे विनोद राय ने 2जी और कोयला खान आवंटन में हुए नुकसान को 1.76 लाख करोड़ रुपए का बताकर यूपीए सरकार को उखाड़ फेंकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है. इस कथित नुकसान से फैले भ्रम के कारण इससे लाभान्वित हुए लोगों में खुशियां मनाई जा रही हैं, जबकि इसे लेकर हर ऐरा-गैर कोई भी अनाप-शनाप बयान देकर राजनीति के गलियारों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है. सीबीआई चीफ अपने बचाव में चाहे जितनी दलीलें दें, लेकिन यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है कि अरबों रुपए के घोटाले के आरोपियों को कार्यालय समय के बाद वह अपने सरकारी आवास में बुलाकर 15 महीनों में 50 बार मिलें? 2जी घोटाले में आरोपी जिस रिलायंस टेलीकॉम की जांच सीबीआई कर रही है, उसके अधिकारी उनसे उनके घर पर 27 बार मिलें? सर्वाधिक विवादास्पद मांस व्यापारी मोईन कुरैशी और उसके कुछ सहयोगी पिछले 15 महीनों में सीबीआई चीफ से उनके घर पर कुल 90 बार मिले? यह सूची बहुत लंबी है. क्या यह अनैतिक और अस्वाभाविक मेलजोल ‘कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ की श्रेणी में नहीं माना जाना चाहिए?

रेल परिचालन बहुत जिम्मेदारी और सतर्कता का काम है –मुकेश निगम

सेंट्रल रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन ने धूमधाम से मनाया इंजीनियर्स डे

सेंट्रल रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन (सीआरईए) भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्मदिन के अवसर पर हर साल की तरह इस साल भी 15 सितंबर को सीएसटी ऑडिटोरियम, मुंबई में बड़ी धूमधाम से ‘इंजीनियर्स डे’ मनाया. इस अवसर पर ‘सेफ्टी एंड रिलायबिलिटी ऑन ट्रेन ऑपरेशन’ विषय पर सेफ्टी सेमिनार का भी आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन मुंबई मंडल, मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक मुकेश निगम ने किया. उनके साथ एडीआरएम संजीव देशपांडे और ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईआरईएफ) के मुख्य सलाहकार इंजी. ए. एस. तिवारी, संगठन मंत्री इंजी. मनोज पांडेय और सीआरईए के मंडल अध्यक्ष इंजी. डी. पी. सिंह एवं मंडल मंत्री इंजी. जे. के. सिंह और वरिष्ठ सदस्य इंजी. टी. के. मारगाये ने भी दीप-प्रज्वलन किया.

सेफ्टी सेमिनार के विषय पर अपने विचार रखते हुए एआईआरईएफ के मुख्य सलाहकार इंजी. ए. एस. तिवारी ने कहा कि आपदा प्रबंधन समिति ने आरडीएसओ से कहा था कि सभी अपर क्लास कोचों में आपातकालीन लाइट लगाई जाए. रेल प्रशासन ने बिना सोचे-समझे और इस संस्तुति का बिना कोई व्यावहारिक अध्ययन किए ही इस पर अमल कर दिया. नतीजा यह है कि अब तक करीब 75 प्रतिशत कोचों में यह आपातकालीन लाइटें लग चुकी हैं, मगर इनका कोई उपयोग नहीं है. इसकी परफोर्मेंस भी अच्छी नहीं आई है. यह चोरी हो रही हैं, या ख़राब हो रही हैं, तो इन्हें जल्दी रिप्लेस भी नहीं किया जा रहा है. ऐसे में इनका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि उनका यह मानना है कि जो 25 प्रतिशत कोच बचे हैं, उनमें इन्हें न लगाकर उसी खर्च से आवश्यक नट-बोल्ट, जॉली, स्प्रिंग्स आदि स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति की जाए. महिला चपरासी न रखे जाने का मुद्दा उन्होंने फिर से उठाया. इसके अलावा रेल दुर्घटनाएं क्यों होती हैं, इसके लिए उन्होंने स्पेयर पार्ट्स की ख़राब गुणवत्ता और निरीक्षण की कमी को जिम्मेदार ठहराया.

यूनियन की मनमानी के खिलाफ सभी अधिकारी एकजुट

जबलपुर - कटनी सेक्शन की सिरोहा रेलवे क्रासिंग का गेट बंद होने पर भी उसका सिग्नल ग्रीन रहने की बार-बार मिल रही शिकायतों के कारण सीनियर डीएसटीई/समन्वय/जबलपुर गौरव सिंह ने जब वहां जाकर देखा तो पाया कि उन्होंने जिस जेई और तकनीशियन को उक्त गेट का निरीक्षण करने भेजा था, वह वहां कभी गए ही नहीं थे. इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए जब उन्होंने उक्त दोनों कर्मचारियों को डांट लगाई, तो उन्होंने इसे मारपीट का रूप देकर यूनियन का मुद्दा बना दिया. यह घटना 2 सितंबर की है. यूनियन ने गौरव सिंह के निलंबन की मांग पर यहां एक दिन की काम बंद हड़ताल भी कर दी.

यही नहीं, यूनियन ने सम्बंधित कर्मचारियों से सिंह के खिलाफ मारपीट करने और धमकाने की एफआईआर भी 5 सितंबर को पुलिस में दर्ज करवा दी. यात्रियों की संरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले उक्त दोनों कर्मचारियों को यूनियन का सरक्षण प्राप्त होने से प्रशासन भी दबाव में आ गया और उसने किसी प्रकार की औद्योगिक अशांति से बचने के लिए गौरव सिंह को 45 दिन की छुट्टी पर भेज दिया है. यूनियन की इस मनमानी के खिलाफ फेडरेशन ऑफ़ रलवे ऑफिसर्स एसोसिएशन (एफआरओए) से सम्बद्ध पश्चिम मध्य रेलवे ऑफिसर्स एसोसिएशन और पश्चिम मध्य रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स एसोसिएशन से जुड़े सभी अधिकारी भी एकजुट हो गए हैं. उन्होंने बैठक कर सिंह के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित करके प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि यूनियन की मांग को मानते हुए प्रशासन द्वारा गौरव सिंह को अनावश्यक रूप से निलंबित किया जाता है, तो सभी अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे.

एआईआरएफ का एफडीआई के खिलाफ विरोध दिवस

ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) ने रेलवे में विदेश पूंजी निवेश (एफडीआई) के खिलाफ 19 सितंबर को सम्पूर्ण भारतीय रेल के सभी जोनों और मंडल मुख्यालयों पर जोरदार विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया है. इसके लिए एआईआरएफ ने ‘रेल बचाओ – देश बचाओ’ का आकर्षक नारा भी दिया है. रेल बजट के तुरंत बाद 14 जुलाई को रेलमंत्री सदानंद गौड़ा को लिखे गए अपने पत्र में एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने कहा था कि जहां भारतीय रेल को अब तक किसी भी तरह के एफडीआई से बाहर रखा गया था, वहीं अब केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में शत-प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी है. पत्र में यह भी कहा गया था कि रेल मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पालिसी एंड प्रमोशन को भेजे गए अपने नोट में साफ कहा है कि रेलवे के बुनियादी और ढांचागत विकास के लिए निर्माण, परिचालन और परिवहन आदि में सरकार ने सर्वसम्मति से शत-प्रतिशत निजी/घरेलू और विदेशी पूंजी निवेश को मंजूरी दे दी है.


अपने पत्र में एआईआरएफ के महामंत्री ने यह भी कहा है की सरकार के इस निर्णय से रेलवे के करीब 13.30 लाख रेलकर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है. इसलिए किसी प्रकार की औद्योगिक अशांति फैलने से पहले यह जरुरी है कि रेलवे की सभी मान्यताप्राप्त फेडरेशनों के साथ बैठक करके इस विषय पर गंभीर चर्चा की जाए और इसका कोई सर्वमान्य हाल निकाला जाए. परंतु इस संबंध में रेल मंत्रालय अथवा रेलमंत्री के स्तर पर अब तक कोई पहल नहीं किए जाने से नाराज एआईआरएफ ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने का निर्णय लिया है.

आरपीएसएफ कमान्डेंट को रिश्वत लेते सीबीआई ने रंगेहाथ धरा

धनबाद : रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (आरपीएसएफ) की 10वीं बटालियन के कमान्डेंट एस. पी. वशिष्ठ को आरपीएसएफ के दो जवानों से 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रविवार, 14 सितंबर को सीबीआई ने रंगेहाथ धर दबोचा. प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री वशिष्ठ अपने घर पर रविवार की शाम को करीब 6 बजे दोनों जवानों से 10-10 हजार रुपए लेते पकडे गए हैं. इसकी सूचना इन दोनों जवानों ने ही सीबीआई को दी थी.

बताते हैं कि पहले से तय समय के मुताबिक कांस्टेबल मुकेश कुमार और प्रदीप कुमार कायल उक्त राशि देने के लिए कमान्डेंट के आवास पर गए थे. दोनों ने जैसे ही रकम दी, तभी इशारा पाते ही आस-पास ही मौजूद सीबीआई टीम के सदस्यों ने कमान्डेंट को दबोच लिया. कमान्डेंट की गिरफ़्तारी के बाद उनसे पूछताछ के लिए सीबीआई एसपी पी. के. माजी भी मौके पर पहुंचे थे. श्री माजी ने पत्रकारों को बताया कि श्री वशिष्ठ को आरपीएसएफ के दो जवानों से 10-10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है, उनसे पूछताछ के साथ ही उनके घर और कार्यालय की तलाशी ली जा रही है.

2 अक्टूबर को की जाएगी रेलवे द्वारा सफाई अभियान की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के आदेश पर सम्पूर्ण भारतीय रेल में गांधी जयंती, 2 अक्टूबर से सभी रेलवे स्टेशनों और रेलवे कालोनियों में सफाई अभियान की शुरुआत होने जा रही है. इस अभियान में रेलवे के गैंगमैन से लेकर महाप्रबंधक तक के सभी अधिकारी और कर्मचारी भी हाथ में झाड़ू लेकर सफाई करते नजर आएंगे. भुसावल मंडल में इस सफाई अभियान की अगुआई मंडल रेल प्रबंधक महेश कुमार गुप्ता करेंगे. यह जानकारी श्री गुप्ता ने यहाँ पत्रकारों को संबोधित करते हुए दी.

पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए भुसावल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक महेश कुमार गुप्ता. उनके साथ हैं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एन. जी. बोरीकर एवं अन्य अधिकारीगण.

हालांकि इस अवसर पर श्री गुप्ता ने यह भी कहा कि रेलवे द्वारा नियमित रूप से सफाई व्यवस्था की जाती है. परंतु रेल परिसरों और रेलवे स्टेशनों पर भारी संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण कूड़ा-कचरा और गंदगी कुछ ज्यादा ही हो जाती है. तथापि रेल प्रशासन इस पर लगातार नजर रखता है, जिससे इस कारण किसी भी यात्री को आजतक रेल परिसर में कभी कोई बीमारी का सामना नहीं करना पड़ा है. उन्होंने कहा कि रेल परिसर में गंदगी फैलाने वाले लोगों पर कार्यवाही तो की जाती है, मगर यह कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से शुरू हो रहे सफाई अभियान में गैर सरकारी संगठनों, शैक्षिक संस्थाओं, नेशनल कैडेट कोर और स्काउट एंड गॉइड की मदद से जन-जागृति भी की जाएगी.

डकार गए रेलवेमेंस कांग्रेस के महामंत्री उत्तराखंड त्रासदी की आपदा सहायता राशि

संतोष वर्मा, जमशेदपुर

वर्ष 2013 में रेलकर्मियों से संग्रह की गई थी लाखों रुपए की यह धनराशि
प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजे जाने के लिए इकठ्ठा की गई थी यह धनराशि
ममला है उत्तराखंड बाढ़ त्रासदी की आपदा सहायता राशि में हुए घोटाले का
18 साल पहले सेवानिवृत्त सत्यमूर्ति हैं द. पू. रेलवे मेंस कांग्रेस के महासचिव

उत्तराखंड में एक वर्ष पूर्व आई विनाशकारी बाढ़ त्रासदी को लेकर देश भर से राहत सामग्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री राहत कोष में सहायता के लिए सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में आपदा सहायता राशि का संग्रह किया गया था. उत्तराखंड की उक्त तबाही को एक वर्ष बीत गया है, इनमें से कईयों ने यह राशि न तो उत्तराखंड भेजी, और न ही प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवाई है. ऐसी ही एक बानगी दक्षिण पूर्व रेलवे में देखने को मिली है. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब रेलवे इंस्टिट्यूट, कोलकाता में दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांगेस की जोनल कार्यकारणी की बैठक चल रही थी.

मुंबई मंडल, मध्य रेलवे इंजीनियरिंग विभाग का कारनामा

डीप स्क्रीनिंग/ड्रेनेज सुधार/टर्नआउट का काम हुआ नहीं, मगर किया गया दोहरा भुगतान

‘परिपूर्ण रेलवे समाचार’ के 16 से 31 अगस्त 2014 के अंक में ‘मुंबई मंडल, मध्य रेलवे के एक खास ठेकेदार का लगातार किया जा रहा है फेवर’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के क्रम में अब जो जानकारी सामने आई है, वह ज्यादा चौंकाने वाली है. इससे पता चलता है कि कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से रेलवे को कितना नुकसान पहुंचाया जा रहा है. इस मामले में अधिकारी-ठेकेदार गठजोड़ के चलते एक ही काम, वह भी जो हुआ नहीं, या सिर्फ दिखावे के लिए किया गया, के लिए कथित रूप से दोहरा भुगतान किया गया है, जबकि काम किसी डिपो के अंतर्गत हुआ, मगर उसकी बिलिंग किसी अन्य डिपो से करवाई गई. जबकि सम्बंधित सेक्शन के एडीईएन के टेस्ट चेक के बिना ही यह भुगतान किया गया है.


प्राप्त जानकारी के अनुसार टेंडर नंबर इंजीनियरिंग/डीआरएम/डब्ल्यू/बीबी/2012/16/7, दि. 18.05.2012 के अंतर्गत सीएसटी से कल्याण सेक्शन में प्लेटफार्म लाइन/लेंथ में डीप स्क्रीनिंग के साथ ट्रैक ड्रेनेज में सुधार करने तथा टर्नआउट डालने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. इसके लिए दिए गए एक्सेप्टेंस लेटर (नंबर बीबी/डब्ल्यू/886/एस/डब्ल्यूआर, दि. 24.08.2012) के अनुसार इसकी लागत 1,35,10,697 रु. और काम पूरा करने की समयावधि एक साल (23 अगस्त 2013 तक) की थी. इसके तहत सीएसटी-कल्याण सेक्शन के अंतर्गत आने वाले सभी प्लेटफार्मों की लम्बाई के बराबर यानि 500 से 800 मीटर में डीप स्क्रीनिंग के साथ ड्रेनेज को भी सुधारने का मैन्युअल वर्क किया जाना था, क्योंकि प्लेटफार्म लाइन में कुछ तकनीकी कारणों से बीसीएम मशीन नहीं चल पाती है. इसके अलावा इसी के तहत मेन लाइन एवं सबर्बन लाइन में टर्नआउट डालने का भी काम किया जाना था.

गाड़ियों की संख्या में वृद्धि के साथ संरक्षा भी चिंता का प्रमुख विषय है –प्रदीप कुमार

1 सितंबर 2014 से प्रभावी उत्तर रेलवे की नई समय सारिणी का विमोचन

उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार ने राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली 1 सितंबर 2014 से प्रभावी उत्तर रेलवे की नई समय-सारिणी का विमोचन किया. इस अवसर पर उत्तर रेलवे के अपर महाप्रबंधक अनूप साहू, मुख्य परिचालन प्रबंधक मो. जमशेद, मुख्य वाणिज्य प्रंबधक अशोक कुमार, मुख्य यात्री यातायात प्रबंधक संजय बाजपेयी, मंडल रेल प्रबंधक, दिल्ली मंडल अनुराग सचान और उत्तर रेलवे एवं दिल्ली मंडल के अनेक वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित थे. 1 सितंबर 2014 से प्रभावी इस नई समय-सारिणी की प्रमुख विशेषताओं में 57 नई रेलगाड़ियां चलाने की घोषणा की गई है, जिसमें 11 प्रीमियम गाड़ियां, 5 वातानुकूलित एक्सप्रेस गाड़ियां, 4 जनसाधारण एक्सप्रेस गाड़ियां, 32 मेल/एक्सप्रेस गाड़ियां तथा 5 पैसेंजर गाड़ियां शामिल हैं. 9 गाड़ियों का विस्तार, 1 गाड़ी के फेरों में वृद्धि, 2 गाड़ियों के समय में फेरबदल एवं 3 गाड़ियों के नंबरों और 2 गाड़ियों के मार्ग में परिवर्तन भी किया जा रहा है.


इस अवसर पर महाप्रबंधक प्रदीप कुमार ने कहा कि उत्तर रेलवे द्वारा यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ के मद्देनजर अप्रैल से जुलाई 2014 तक कुल 3820 विशेष गाड़ियां चलाई गईं जो कि पिछले वर्ष कुल 2968 गाड़ियों के मुकाबले 41% अधिक हैं. पिछले वर्ष त्योहारों के अवसर पर 1939 विशेष गाड़ियां चलाई गई थीं. देश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से पूरब की ओर आने-जाने वाली गाड़ियों में प्रतीक्षासूची को समाप्त करने के लिए भी विशेष गाड़ियां चलाई गईं. महाप्रबंधक ने कहा कि क्षमता विस्तार उत्तर रेलवे का प्रमुख लक्ष्य रहा है. इसी दिशा में 4 जुलाई 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊधमपुर माता वैष्णो देवी कटड़ा रेल सेक्शन के बीच नवनिर्मित रेलवे लाईन को राष्ट्र को समर्पित किया. इस नये रेल सेक्शन के खुलने से तीर्थ यात्रियों को कटरा तक सीधा रेल मार्ग मिल रहा है, जो कि सड़क द्वारा जाने के मुकाबले अधिक सस्ता और आरामदायक साबित होगा.

आईआरएमएस एसोसिएशन द्वारा मेडिकल एजूकेशन कार्यक्रम का आयोजन

इंडियन रेलवे मेडिकल सर्विस एसोसिएशन ने हाल ही में रेलवे अधिकारी क्लब, स्टेट एंट्री रोड, नई दिल्ली में दो दिवसीय मेडिकल एजूकेशन कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम का उदघाटन रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने किया. इस मौके पर रेलवे बोर्ड के सदस्य कार्मिक ए. के. मित्तल और रेल स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ. एम. के. बुधलाकोटी और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार भी उपस्थित थे.

इस मेडिकल एजूकेशन कार्यक्रम में देश भर के रेल चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया. इसके अंतर्गत हृदय रोग, मधुमेह, शराब पीने से होने वाले लीवर संबंधी रोग, आघात (स्ट्रोक) और पीठ का दर्द इत्यादि रोगों पर हाल ही में हुए विकास पर चर्चा की गई. इस अवसर पर रेल प्रशासन ने आश्वासन दिया कि रेलवे अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और उपकरणों को बेहतर बनाने के लिए आवंटित की जाने वाली निधि को बढ़ाया जायेगा.

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के तत्वावधान में हिंदी प्रतियोगिताएं आयोजित

राजभाषा हिंदी के उत्तरोत्तर प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार के ध्येय से बिलासपुर शहर स्थित सभी सदस्य कार्यालयों यथा केंद्रीय कार्यालयों/बैंकों उपक्रमों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सचिवालय जोनल कार्यालय रेलवे की ओर से 2 सितंबर को जोनल हिंदी प्रशिक्षण केंद्र, बिलासपुर एवं यांत्रिक विभाग सभा कक्ष, बिलासपुर में प्रथम सत्र में हिंदी निबंध एवं हिंदी प्रारूप लेखन तथा टिप्पण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. निबंध के विषय ‘राष्ट्र के विकास में हिंदी की भूमिका‘, ‘जल ही जीवन है‘ और ‘अनेकता में एकता हमारे देश की पहचान है’ पर सारगर्भित निबंध लिखने का अवसर सभी प्रतियोगियों को दिया गया.


कार्यक्रम के दूसरे सत्र में हिंदी वाक़ प्रतियोगिता का भी आयोजन जोनल हिंदी प्रशिक्षण कक्ष में किया किया गया, जिसमें ‘शिक्षा एवं रोजगार के लिए हिंदी की सार्थकता‘, ‘पेड़ लगाओ, प्रदूषण भगाओ’, ‘बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया’ आदि विषयों पर बोलने का अवसर प्रदान किया गया.

उत्तर रेलवे एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल द्वारा संयुक्त मोक ड्रिल

उत्तर रेलवे एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) द्वारा 4 सितंबर को दिल्ली क्षेत्र में संयुक्त मोक ड्रिल किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य एनडीआरएफ एवं रेलवे के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग बनाना था, जिससे बड़ी रेल दुर्घटना एवं एंव प्राकृतिक या अप्राकृतिक आपदाओं/हादसों के दौरान प्रभावितों को शीघ्र एंव प्रभावशाली सहायता पहुंचाई जा सके. इस मोक डिंल का यह भी उद्देश्य था कि कमियों का पता चल सके जिससे सुधारात्मक कार्यवाही की जा सके.


उत्तर रेलवे एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल द्वारा संयुक्त मोक ड्रिल ने प्रदर्शित किया कि स्पेशल यात्री गाड़ी ‘यात्रा स्पेशल’ के पटरी से उतरने या पलटने पर कोच के अंदर फंसे यात्रियों का शीघ्र और बेहतर बचाव किया जा सके. उत्तर रेलवे एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल की टीम के सभी सदस्य हादसे की सूचना मिलने पर दुर्घटना स्थल पर तुरंत पहुंच गए. उन्होंने अपने स्पेशल औजारों से कोच को काटकर उसके अंदर फंसे यात्रियों का बचाव किया.

खेद है...

माननीय कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा 11 अगस्त, 2014 को जी. ए. नंबर 3801/2013, सी. एस. नंबर 326/2013 से सम्बंधित, मामले में दिए गए निर्देश के अनुसार, जिसके तहत सितंबर, 2013 में सुरेश त्रिपाठी और सोहम पब्लिकेशन द्वारा अपने प्रिंट और वेबसाइट दोनों एडीशन में प्रकशित की गई खबरों को टीटागढ़ वैगंस लिमिटेड ने मानहानिकारक मानते हुए मानहानि का मामला दाखिल किया है. मैं, सुरेश त्रिपाठी खुद और सोहम पब्लिकेशन की तरफ से उपरोक्त कार्यवाही के लिए 19 अगस्त 2014 को माननीय हाई कोर्ट के समक्ष विधिपूर्वक अपना हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें मैंने परिपूर्ण रेलवे समाचार में उक्त खबरों के प्रकाशन के लिए बिना शर्त क्षमायाचना की है. हालांकि श्री जे. पी. चौधरी सहित टीटागढ़ वैगंस लिमिटेड और इसके प्रमोटर्स एवं डायरेक्टर्स की छवि या प्रतिष्ठा को जानबूझकर अथवा अनजाने में किसी प्रकार की हानि या क्षति पहुंचाने का हमारा कोई उद्देश्य नहीं था, उक्त खबरों के प्रकाशन के पीछे किसी प्रकार का पूर्वाग्रह अथवा किसी प्रकार की दुर्भावना निहित नहीं थी. इसीलिए मैंने माननीय हाई कोर्ट के आदेश पर वह सभी खबरें अपनी वेबसाइट से हटाते हुए यह वादा भी किया था कि टीटागढ़ वैगंस लिमिटेड और/अथवा इसके प्रमोटर्स/डायरेक्टर्स/मैनेजमेंट एवं ऑफिसर्स के बारे में न तो कोई खबर प्रकाशित की जाएगी, और न ही किसी प्रकार की अपमानजनक और/अथवा मानहानिकारक सामग्री, लेख, बयान आदि कोई भी सामग्री वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी. मेरे द्वारा माननीय हाई कोर्ट के समक्ष विधिपूर्वक दाखिल हलफनामा, मैंने अपनी मर्जी और इच्छा से, बिना किसी व्यक्ति के दबाव अथवा प्रभाव या मजबूरी के दाखिल किया है. अतः श्री जे. पी. चौधरी सहित टीटागढ़ वैगंस लिमिटेड और इसके प्रमोटर्स एवं डायरेक्टर्स को उक्त प्रकाशन से हुए मानसिक क्लेश के लिए मैं खुद और सोहम पब्लिकेशन की तरफ से एक बार पुनः बिना शर्त खेद व्यक्त करता हूं.

संपादक

रेल राज्यमंत्री के साथ महाप्रबंधक/उ.म.रे. की कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक

रेल राज्‍यमंत्री मनोज सिन्‍हा के साथ महाप्रबंधक प्रदीप कुमार ने उत्तर मध्य रेलवे, मुख्यालय सूबेदारगंज में कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक का आयोजन किया. बैठक में महाप्रबंधक/उ.म.रे. प्रदीप कुमार ने रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को एवं मुख्‍य जनसम्‍पर्क अधिकारी नवीन बाबू ने ईडी (इनोवेशन) मधुकर सिन्‍हा को पुष्‍प-गुच्‍छ देकर उनका स्‍वागत किया. बैठक के दौरान संरक्षा, साफ-सफाई, कैटरिंग इत्‍यादि विषयों पर चर्चा हुई. इस अवसर पर अपने संबोधन में रेल राज्‍यमंत्री मनोज सिन्‍हा ने उपस्थित उत्‍तर मध्‍य रेलवे मुख्‍यालय के अधिकारियों तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्‍यम से उत्‍तर मध्‍य रेलवे के तीनों मंडलों तथा आईआरपीएमयू, नई दिल्‍ली के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि क्रियान्‍वयन के स्‍तर पर आने वाली समस्‍याओं के निवारण के लिए रेल मंत्रालय की शक्तियों के विकेंद्रीकरण के निर्णय से यात्री सुविधा से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी.


रेल राज्‍यमंत्री ने रेल मंत्रालय द्वारा यात्रियों के फीडबैक के लिए 5 रेल गाड़ियों में प्रारम्‍भ की गई नई ऑन बोर्ड आईवीआरएस प्रणाली को यथासंभव शीघ्र विस्‍तारित करने की बात कही. उन्‍होंने जोनल स्तर पर रेल यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने एवं स्‍वच्‍छ वातावरण देने की दृष्टि से साफ-सफाई, कैटरिंग इत्‍यादि विषयों पर यात्रियों से फीडबैक प्राप्‍त करने के लिए प्रणाली विकसित करने की बात कही. उन्होंने रेल यात्रियों की शिकायतों के त्‍वरित निस्‍तारण के निर्देश भी दिए, ताकि आम जनता के मध्‍य रेल की छवि को बेहतर बनाया जा सके. उन्‍होंने रेल अधिकारियों को अनधिकृत वेंडिंग के विरूद्ध कड़े कदम उठाने तथा नियमित तौर पर चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए, जिससे अनधिकृत वेंडरों एवं अनिमित टिकट के साथ यात्रा करने वालों पर अंकुश लगाया जा सके.

जबलपुर स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन का लोकार्पण

पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म-1 पर 28 अगस्त को स्थानीय सांसद राकेश सिंह द्वारा इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन का लोकार्पण किया गया. इस अवसर पर महाप्रबंधक/प.म.रे. रमेश चंद्र, मुख्य वाणिज्य प्रबंधक शरत् चंद्र जेठी, मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंह एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक राजेश शर्मा आदि सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थिति थे. रेल मंत्रालय पेपर की बचत हेतु रेलवे कार्यालयों में पेपरलेस कार्य करने हेतु प्रयासरत है, इसी के अनुपालन में पश्चिम मध्य रेल द्वारा लम्बे समय से चली आ रही पेपर चार्टिंग प्रणाली में बदलाव करते हुए इस प्रणाली को पेपरलेस कर इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन लगाए गए हैं.


ऐसा बताया गया है कि जबलपुर स्टेशन पर लगे इस इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन की कुल लागत भारतीय रेल के अन्य स्टेशनों पर लगे इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन की तुलना में बहुत कम है. इस इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन में गाड़ी का चार्ट बनने के पश्चात् कन्फर्म, आरएसी एवं वेटिंग लिस्ट टिकट की स्थिति दर्शाई जाएगी, जिसमें कन्फर्म टिकट हेतु हरा रंग, आरएसी के लिए पीला एवं वेटिंग लिस्ट टिकट की स्थिति लाल रंग में दर्शाई जाएगी.

इस प्रणाली की खासियत यह है कि ट्रेन लेट होने पर इसमें मैनुअल फीडिंग भी की जा सकेगी. इस प्रणाली के लागू होने से यात्रियों को बहुत सुविधा होगी. पेपर चार्टिग प्रणाली में कई बार चार्ट के फटने या अन्य कारणों से यात्रियों को अपने टिकट की स्थिति देखने में असुविधा होती थी, किन्तु अब इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट डिस्प्ले स्क्रीन लगने से यात्री सहजता से अपनी यात्रा टिकट की स्थिति जान सकेंगे.

बहुत कठिन है डीजल लॉबी के सामने रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की योजना

विभागीय वर्चस्व बनाए रखने वाली लॉबी के सामने धीमी पड़ी रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की योजना

रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की रेलमंत्री सदानंद गौड़ा की योजना रेलवे के विभागवाद और रेलवे में हावी डीजल एवं मैकेनिकल लॉबी के सामने धीमी पड़ गई है. रेलमंत्री की इस योजना को ठंडे बस्ते में डालने के लिए रेलवे में विभागीय वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है, जिसके चलते आज तक रेलवे का विकास हमेशा किसी एजेंडा में नहीं रहा है. रेलमंत्री की समस्या यह है कि उन्हें रेलवे का गहन अनुभव नहीं है और न ही उनके पास रेलवे और इसके नौकरशाहों की आपसी राजनीति समझने वाले कोई बेहतर सलाहकार ही हैं. यही वजह है कि रेलमंत्री तेजी से कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं. ऐसा लगता है कि रेलवे की कुटिल नौकरशाही ने उन्हें तमाम मुद्दों पर बुरी तरह से उलझाकर रख दिया है.

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले रेल बजट में रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की बात कही गई थी. मगर अब रेलवे के विभागवाद, विभागीय वर्चस्व, इसे बनाए रखने में नौकरशाही की गहराई तक जम चुकी जड़ें और खास हितों आदि को देखते हुए रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के लिए यह काम इतना आसान नहीं होने वाला है. रेलमंत्री गौड़ा का पहला रेल बजट मैकेनिकल डिपार्टमेंट के लिए एक बड़े सदमे से कम नहीं था, क्योंकि रेलमंत्री ने अपने बजट में रेलवे के तेज इलेक्ट्रिफिकेशन की बात कही थी. रेलवे में मैकेनिकल डिपार्टमेंट सबसे बड़ा और एक आवश्यक डिपार्टमेंट है, जो कि इसे और अधिक कुशल बनाने एवं पर्यावरण के अनुकूल गाड़ियों के संचालन तथा योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके अलावा रेलवे के ज्यादातर फंड का भी इस्तेमाल करता है.

रेलमंत्री को परंपरागत निहितस्वार्थों की रक्षा में डूबी इस नौकरशाही के निहितस्वार्थों के बीच से निकलकर और अंतर्विभागीय प्रतिद्वंद्विता को रोकते हुए इस राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के पुनर्गठन पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा. क्योंकि रेलवे बोर्ड में एक खास और बहुत पावरफुल लॉबी है, जो कि रेलवे के तेजी से विद्युतीकरण, अत्याधुनिक एवं पर्यावरण के अनुकूल ट्रेनों के संचालन, जो कि परंपरागत ट्रेनों से कई गुना ज्यादा कार्यक्षम और बेहतर परिणाम देने वाली हैं, तथा सिग्नलिंग एवं टेलीकम्यूनिकेशन आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को तेजी से लागू करने और समय पर उनको पूरा करने में बहुत सारे रोड़े अटकाती रही रही है. इसके अलावा यही वजह रही है कि यह तमाम रेल परियोजनाएं आवश्यक फंडिंग जुटाने में सफल नहीं हो पाई हैं.

लोको रेलवे अस्पताल, कानपुर में भ्रष्टाचार और हेराफेरी चरम पर

इलाहाबाद मंडल, उत्तर मध्य रेलवे के लोको रेलवे अस्पताल, कानपुर में भ्रष्टाचार और हेराफेरी चरम पर है. तमाम लिखित शिकायतें होने के बावजूद प्रशासन द्वारा आज तक कोई कारगर कार्रवाई नहीं की गई है. अस्पताल सीएमएस का चार्ज एसीएमएस को दिया गया है, जिसकी गतिविधियां काफी पहले से संदिग्ध रही हैं. मरीजों की मेडिकल/ पैथालोजिकल जांच, स्थानीय खरीद, सीटी स्कैन – एमआरआई, बीपी मशीन की खरीद, इम्प्लांट की सप्लाई, अल्ट्रा-साउंड, गाड़ी और एम्बुलेंस का किराए पर लिया जाना और उनका दुरुपयोग, सफाई कर्मियों की घरों में तैनाती, नालों की फर्जी सफाई आदि-आदि मदों में प्रतिमाह यहां लाखों का नुकसान रेलवे को किया जा रहा है. परंतु खुलेआम चल रहे इस भ्रष्टाचार और हेराफेरी पर रेल प्रशासन एवं विजिलेंस का कोई नियंत्रण नहीं हो पा रहा है.

कानपुर लोको रेलवे अस्पताल में चल रहे इस भ्रष्टाचार की विस्तृत लिखित शिकायत गोविंद नगर, कानपुर निवासी रामकेवल यादव ने रेलमंत्री को भेजी है. उन्होंने लिखा है कि इस अस्पताल में सबसे घटिया क्वालिटी वाली बीपी मशीन 2400 रु. में मंगाई जाती है, जबकि सबसे बढ़िया कंपनी (डायमंड) की सबसे बेहतर क्वालिटी की यही बीपी मशीन खुले बाजार में मात्र 800 रु. में उपलब्ध है. उन्होंने लिखा है कि इसमें सप्लायर को फायदा पहुंचाकर घोर कमीशनखोरी की जा रही है. इसके साथ ही पिछले करीब 10 साल से एक ही सप्लायर को इसकी सप्लाई का ठेका दिया जा रहा है.

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