वीआईपी कोटे के लिए इस्तेमाल की गई तिकड़म को विजिलेंस ने पकड़ा

मुंबई: विश्वसनीय सूचना के आधार पर, ट्रेन संख्या 12322, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-हावड़ा (CSMT-HWH), कोलकाता मेल में वीआईपी कोटा—जिसे इमरजेंसी कोटा और हेडक्वार्टर कोटा नाम से भी जाना जाता है—के दुरुपयोग के संदर्भ में मध्य रेलवे विजिलेंस द्वारा एक आकस्मिक जांच की गई, जिसमें यह आशंका जताई गई थी कि कुछ टिकट दलाल रेल अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग कर सामान्य यात्रियों के टिकट कंफर्म करा रहे हैं।

विजिलेंस टीम उक्त ट्रेन में कल्याण स्टेशन से चढ़ी और स्लीपर क्लास कोच संख्या एस-2 में छह संदिग्ध यात्रियों—जिनकी सूचना मिली थी—की जांच की, जो HO कोटा से कंफर्म हुई आरक्षित टिकट पर बर्थ संख्या 18, 21, 22, 25, 26 और 27 पर यात्रा कर रहे थे।

आरोपी-रवींद्र कुमार साहू

जांच के दौरान पाया गया कि उनमें से एक यात्री दूसरे व्यक्ति के नाम से यात्रा कर रहा था। उस यात्री से नियमानुसार चार्ज वसूला गया। अन्य पांच यात्री वैध पहचान पत्र के साथ यात्रा कर रहे थे, और उनके विवरण टिकट से मेल खा रहे थे।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इन यात्रियों ने सीएसएमटी स्टेशन के एक व्यक्ति को अतिरिक्त धनराशि देकर वीआईपी कोटे से टिकट कन्फर्म करवाए थे। सभी छह टिकटों को आगे की जांच हेतु विजिलेंस टीम ने जब्त कर लिया।

अपराधी की गिरफ्तारी

उपरोक्त यात्रियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर उनके बयान लिए गए और उसी जानकारी के अनुसार विजिलेंस टीम ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया जिसने उन्हें वीआईपी कोटे से कन्फर्म टिकट उपलब्ध कराए थे।

विजिलेंस टीम के साथ आरोपी-रवींद्र कुमार साहू

उक्त व्यक्ति की पहचान रवींद्र कुमार साहू के रूप में हुई, जो CSMT के ट्रैफिक अकाउंट्स बिल्डिंग की चौथी मंज़िल पर स्थित गार्ड कैंटीन में कार्यरत है। जांच के दौरान उसके पास से रेलवे के विभिन्न विभागों के चार अधिकारियों की नकली मुहरें बरामद की गईं।

कार्यप्रणाली (Modus Operandi)

उक्त व्यक्ति टिकट की रिक्विजिशन फॉर्म/आवेदन पत्रों पर #PNR विवरण भरता था और फर्जी हस्ताक्षर एवं नकली मुहर लगाकर फॉर्म को डीआरएम कार्यालय में इमरजेंसी कोटा सेल के बॉक्स में डाल देता था, जिससे कन्फर्म टिकट प्राप्त कर सके। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह रेलवे टिकट का व्यवसाय करता है और ग्राहकों को वीआईपी कोटे से कन्फर्म टिकट उपलब्ध कराता है।

आरोपी-रवींद्र कुमार साहू के पास से बरामद नकली मुहरें

उसके #UPI लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच करने पर यह पाया गया कि प्रति माह लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये के लेन-देन हुए हैं। जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर उसे रेलवे अधिनियम के तहत आवश्यक कार्रवाई के लिए आरपीएफ को सौंप दिया गया है।