भारतीय रेल वर्ष-2025 में प्राप्त कर लेगी स्कोप-1 नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य

नई दिल्ली: भारतीय रेल द्वारा वर्ष 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा गया था। तेजी से किए गए विद्युतीकरण कार्यों के फलस्वरूप वर्ष-2025 में भारतीय रेल स्कोप-1 नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करेगी। स्कोप-1 नेट जीरो बहुत बड़ा लक्ष्य है। भारतीय रेल के लिए नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने हेतु डीजल ट्रैक्शन को विद्युत ट्रैक्शन में बदला जा रहा है।

भारतीय रेल पर वर्ष 2014-15 से 2023-24 के दौरान रेलवे क्षेत्र में 9 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। रेलवे क्षेत्र में मौजूदा वृक्षारोपण के कारण कार्बन उत्सर्जन ऑफसेट 5 लाख टन प्रति वर्ष है।

भारतीय रेल भारत के लिए प्रतिबद्धता से पहले नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक का दर्जा हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्बन उत्सर्जन को ‘प्रत्यक्ष उत्सर्जन’ (स्कोप-I) और अप्रत्यक्ष उत्सर्जन (स्कोप-II और स्कोप-III) में वर्गीकृत किया गया है।

भारतीय रेल ने डीजल ट्रैक्शन से विद्युत ट्रैक्शन में बदलाव के गेम चेंजर कदम के माध्यम से प्रत्यक्ष उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारतीय रेल अपने संचालन तथा रखरखाव में विभिन्न ऊर्जा दक्षता उपायों को लागू कर रही है।

यह भारतीय रेल को वर्ष 2025 के भीतर नेट जीरो (स्कोप-I) लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, क्योंकि मॉडल शिफ्ट (सड़क से रेल तक) और वनीकरण के मामले में भारतीय रेल के पास उपलब्ध कार्बन ऑफसेट की तुलना में नगण्य प्रत्यक्ष उत्सर्जन है।

इसके अतिरिक्त, भारतीय रेल जीवाश्म ईंधन आधारित के बजाय गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों से बिजली का स्रोत बना रही है, जिससे अप्रत्यक्ष उत्सर्जन में और भी कमी आएगी।

भारतीय रेल सड़क क्षेत्र की तुलना में न केवल कम कार्बन उत्सर्जक परिवहन विकल्प प्रदान करके, बल्कि हरित ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से इस हरित परिवहन को बढ़ावा देकर भारतीय परिवहन क्षेत्र को हरित बनाने में अग्रणी और सर्वोच्च योगदानकर्ता है।