कीजिए स्ट्राइक या छोड़िये कुर्सी !

    हड़ताल और रेलवे की तमाम समस्याओं पर रेलकर्मियों की मनोदशा को व्यक्त करता संदेश

    एक तरफ रेलवे के दोनों मान्यताप्राप्त लेबर फेडरेशनों द्वारा समस्त रेल कर्मचारियों के हित में सरकार पर वाजिब दबाव बनाए जाने के लिए हड़ताल की तैयारी की जा रही है, तो दूसरी तरफ उनके दोनों लेबर फेडरेशनों के प्रमुख पदाधिकारियों के नाम सोशल मीडिया में एक संदेश चल रहा है, जो कि उनके पक्ष और प्रोत्साहन में ही नहीं, बल्कि सरकार को भी हड़ताल को लेकर रेलकर्मियों की मनोदशा को भांपने में सहायक हो सकता है. यह संदेश हड़ताल और रेलवे में उत्पन्न तमाम समस्याओं को लेकर रेलकर्मियों की अनिश्चिततापूर्ण मनोदशा को व्यक्त करता है.. दोनों फेडरेशन के प्रमुख पदाधिकारियों के अवलोकनार्थ यहां प्रस्तुत है उसका संशोधित रूप..

    आदरणीय श्री शिवगोपाल मिश्रा जी एवं श्री एवं राघवैय्या जी,

    विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि आपने वेतन आयोग की कर्मचारी विरोधी सिफारिशों के विरोध में रेल का चक्का जाम किए जाने की बात कही है. हमें खुशी है कि आपने इस मुद्दे पर काफी मजबूत स्टैंड लिया है, लेकिन कर्मचारियों को इसमें शक है कि आप शायद ही रेल का चक्का जाम करेंगे?

    1974 के बाद करीब 41 वर्षों के दौरान बहुत से कर्मचारी विरोधी फैसले रेलवे में आए और लागू भी हुए, मगर एक बार भी न तो एआईआरएफ ने और न ही एनएफआईआर ने रेल का चक्का जाम किया.

    यहां तक कि दिसंबर 2013 में एआईआरएफ ने और जनवरी 2014 में एनएफआईआर ने कर्मचारी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर पूरे देश में ‘स्ट्राइक बैलट’ करवाया था, जिसमें 96% से भी ज्यादा मेहनतकश कर्मचारियों ने रेल हड़ताल के पक्ष में अपना मत दिया था. इसके बाबजूद आपने हड़ताल नहीं की, क्यों?

    आप नारा देते हैं कि पूंजीवाद मुर्दाबाद ! लेकिन कायाकल्प कमेटी में देश के जाने माने पूंजीपति रतन टाटा के साथ बैठकर रेलवे के कायकल्प की रूपरेखा तैयार करते हैं, यह कैसे होगा?

    रेलवे में एनपीएस आई, ठेकेदारी प्रथा आई, पीपीपी मॅाडल आया, एफडीआई आया, कैडर रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पूरी रेलवे से करीब 50% पद सरेंडर हो गए, कभी हमारी संख्या करीब साढ़े 20 लाख से ज्यादा थी, जो कि आज घटकर लगभग 13 लाख से भी कम रह गई है.

    सब कुछ बदल गया, लेकिन आपका नारा नहीं बदला, अब किस बात का इंतजार है? कब होगी हड़ताल? कब करेंगे रेल का चक्का जाम? अब आपसे कर्मचारी फैसला चाहते हैं, न कि आश्वासन ! कीजिए स्ट्राइक या छोड़िये कुर्सी !

सम्पादकीय