रेलवे फाटक पर तैनात गेटमैन की गोली मारकर हत्या

    आक्रोशित रेल कर्मचारियों ने संबंधित गेट पर गाड़ी रोककर दिया धरना

    फिरोजपुर : उत्तर रेलवे, फिरोजपुर मंडल के ब्यास एवं श्री खडूर साहिब खंड में रामपुर भूतविंड गांव के पास जलालाबाद रेलवे फाटक नं. सी-21 पर तैनात गेटमैन राजीव कुमार (33) की शुक्रवार, 2 फरवरी की रात को हथियारबंद कुछ अज्ञात लोगों ने गेट केबिन में ही गोली मारकर हत्या कर दी. इससे मंडल सहित पूरी भारतीय रेल के सभी गेटमैनों और ट्रैकमैनों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया. यूनियन ने भी इस घटना पर रेलकर्मियों की सुरक्षा को लेकर रेल प्रशासन पर दबाव बना दिया है. परंतु मंडल प्रशासन एवं स्थानीय पुलिस द्वारा तब मानवीयता और मानवीय गरिमा को ताक पर रख दिया गया जब मृतक रेलकर्मी का पार्थिव शारीर एक खुले ट्रक में रखकर पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया.

    हत्या की घटना से आक्रोशित रेलकर्मियों से प्राप्त जानकारी अनुसार गेटमैन राजीव कुमार पुत्र शिव नरायण सोनपुर, जिला छपरा (बिहार) का रहने वाला था. जीआरपी थाना प्रभारी धरमिंदर कल्याण के अनुसार आईपीसी की धारा 302, 255, 459 और 34 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है. घटना की जानकारी उस समय हुई जब सुबह ब्यास स्थित संबंधित रेल अधिकारी राजीव कुमार को गाड़ी चलाने की सूचना देने के लिए कॉल कर रहे थे.

    गेटमैन द्वारा कॉल रिसीव न किए जाने पर दूसरे कर्मचारी रेशम सिंह को मौके पर भेजा. गेट पर पहुंचकर रेशम सिंह ने देखा कि गेटमैन राजीव कुमार केबिन में मृत पड़ा हुआ था. उसने इसकी जानकारी तुरंत अपने अधिकारी और स्थानीय पुलिस को दी. इसके बाद वेरोवल पुलिस थाने की एसएचओ सोनमदीप कौर समेत पुलिस पार्टी तथा रेलवे के अधिकारी एवं कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे.

    गेटमैन की हत्या की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में रेलकर्मियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया. उत्तरी रेलवे मजदूर यूनियन ने घटना पर रोष जताते हुए गेटमैनों एवं ट्रैकमैनों की सुरक्षा की मांग की. कर्मचारियों ने सुरक्षा को लेकर उक्त रेलवे फाटक भी बंद कर दिया. उन्होंने गोइन्दवाल से ब्यास की तरफ जा रही गाड़ी को रोक कर रेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की. उन्होंने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये और उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की. डीएम द्वारा मृतक के परिवार को उचित मुआबजा दिलाए जाने के आश्वासन के बाद रेलकर्मियों ने धरना समाप्त किया.


    तदर्थ आधार पर होता है अमृतसर वर्कशॉप में समस्त कामकाज

    अमृतसर वर्कशाप में उल्टा राष्ट्रध्वज फहराने पर हो रही है लीपापोती

    अमृतसर : गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी को अमृतसर वर्कशॉप के मुख्य कारखाना प्रबंधक (सीडब्ल्यूएम) संजय गोयल द्वारा कारखाने में उल्टा राष्ट्रध्वज फहराने के मामले ने हालांकि काफी तूल पकड़ा, परंतु वर्कशॉप प्रशासन ने इस पर पूरी लीपापोती करके मामले को रफादफा कर दिया है. घटना की खबर ‘रेलवे समाचार’ में आने के बाद रेलवे बोर्ड और उत्तर रेलवे मुख्यालय से मामले की जांच करने का आदेश दिया गया था. खबर के बाद अब इसकी जांच में काफी गोपनीयता बरती जा रही है.

    उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस के आयोजन हेतु 18 जनवरी को सीडब्ल्यूएम द्वारा जारी किए गए प्रोटोकॉल लेटर में भी भारी त्रुटियां हैं. इस पत्र को देखने से ऐसा लगता है कि या तो वर्कशॉप के संबंधित अधिकारी एकदम अनपढ़-गंवार और काहिल हैं, या फिर वर्कशॉप प्रबंधन के लिए गणतंत्र दिवस के आयोजन का कोई खास महत्व नहीं है. उक्त पत्र में एक जगह गणतंत्र दिवस को ‘स्वतंत्रता दिवस’ लिखा गया है. इसके अलावा पत्र में भाषा संबंधी तमाम गलतियां हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. किसी मातहत कर्मचारी द्वारा बनाए गए इस पत्र को देखने से जाहिर होता है कि सीडब्ल्यूएम अथवा वर्कशॉप के अन्य किसी भी अधिकारी ने इस पर एक नजर डालना भी जरूरी नहीं समझा. कर्मचारियों का कहना है कि जिस लापरवाही से यह पत्र जारी किया गया है, उसी तरह वर्कशॉप का कामकाज भी किया जा रहा है.

    ‘रेलवे समाचार’ को उक्त ध्वजारोहण का एक वीडियो प्राप्त हुआ है, जिसमें उल्टा ध्वज फहराने के बाद सीडब्ल्यूएम के चेहरे पर परेशानी स्पष्ट देखी जा सकती है. तथापि उन्होंने उल्टा ध्वज फहराने के बाद दिए गए अपने वक्तव्य में इस पर एक बार भी खेद व्यक्त नहीं किया. कई कर्मचारियों का कहना है कि घटना की जांच सीडब्ल्यूएम को ही दिए जाने का कोई उचित परिणाम नहीं निकलने वाला है. इस पर कर्मचारियों ने मुख्यालय पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जांच का उचित निष्कर्ष नहीं निकलने और इसकी जिम्मेदारी तय नहीं किए जाने पर यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय और ग्रह मंत्रालय के संज्ञान में लाया जाएगा. उल्लेखनीय है कि भाजपा सांसद श्वेत मलिक ने रेल कारखाने में उल्टा राष्ट्रध्वज फहराए जाने की निंदा की है.

सम्पादकीय