सुप्रीम कोर्ट में नहीं हो पाई ‘सीधी भर्ती बनाम प्रमोटी अधिकारी’ मामले की सुनवाई

    रेलवे बोर्ड के आदेश और हाई कोर्ट के स्टे पर हो सकता है सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

    रेलवे बोर्ड और प्रमोटी खेमे को करना पड़ सकता है कठिन परिस्थितियों का सामना

    नई दिल्ली : रेलवे में हुए अरबों रुपये के अधिकारी पदोन्नति घोटाले पर शुक्रवार, 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में ‘सीधी भर्ती बनाम प्रमोटी अधिकारियों’ के मामले में तारीख निर्धारित थी. परंतु किन्हीं कारणों के चलते इस दिन मामला सुनवाई में नहीं आ पाया. फिलहाल अगली तारीख भी निर्धारित नहीं हुई है, जिससे प्रमोटी खेमे में भारी ख़ुशी की लहर देखी जा रही है. उधर, कैट/मुंबई में मामले की सुनवाई के बाद के निर्णय का भी फिलहाल पता नहीं चल पाया है. जबकि कैट/जबलपुर द्वारा स्टे हटा दिए जाने के बाद जबलपुर हाई कोर्ट ने पुनः स्टे दे दिया है.

    उल्लेखनीय है कि 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के नतीजे पर रेलवे बोर्ड की गहरी नजर थी, मगर मामला सुनवाई में नहीं आ पाने के कारण रेलवे बोर्ड में फिलहाल मायूसी का माहौल है, जबकि प्रमोटी खेमा इससे भारी राहत महसूस कर रहा है. हाई कोर्ट, जबलपुर द्वारा दिए गए स्टे के संदर्भ में कुछ कानूनी जानकारों का कहना है कि हाई कोर्ट ने कैट द्वारा स्टे खत्म करने पर दिए गए निर्णय को शायद ध्यान से नहीं पढ़ा है, जबकि कैट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रमोटी अधिकारियों को स्टे सहित कोई राहत नहीं दिए जाने का स्पष्ट उल्लेख करते हुए स्टे खत्म किया था. इससे अब सुप्रीम कोर्ट में इस पर विवाद होना निश्चित है.

    उल्लेखनीय है कि रेलवे बोर्ड द्वारा कैट/पटना के आदेश पर अमल करते हुए 6-7 दिसंबर 2017 को जो एडहाक जेएजी रिवर्शन के आदेश जारी किए गए थे, उसके खिलाफ सभी जोनल रेलों के प्रमोटी अधिकारी और उनके जोनल संगठनों ने लगभग सभी कैट में मामले दायर किए थे. इनमें से करीब 6 कैट से उन्हें स्टे भी मिल गया था, परंतु प्रमोटी खेमे द्वारा मामले में जल्दी संज्ञान लिए जाने के आवेदन पर 15 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में पुनः कोई राहत नहीं मिलने के बाद जबलपुर कैट सहित लगभग सभी कैट ने अपना स्टे खत्म कर दिया था.

    तत्पश्चात पश्चिम मध्य रेलवे के प्रमोटी अधिकारी संगठन ने कैट द्वारा स्टे खत्म करने को जबलपुर हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर हाई कोर्ट ने उन्हें पुनः स्टे दे दिया, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में कोई राहत नहीं दिए जाने के विरुद्ध बताया जा रहा है. इस पर सीधी भर्ती अधिकारियों के खेमे द्वारा क्या रणनीति बनाई जा रही है, इसकी जानकारी फिलहाल ‘रेलवे समाचार’ को नहीं मिल पाई है. परंतु इतना निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि रेलवे बोर्ड द्वारा सीधी भर्ती अधिकारियों की पदोन्नतियों को स्थगित किए जाने के 19 दिसंबर 2017 के आदेश और जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा दिए गए गलत स्टे ऑर्डर पर अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कड़ा संज्ञान लिए जाने की पूरी संभावना है, जहां रेलवे बोर्ड और प्रमोटी खेमे को काफी कठिन स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है.

सम्पादकीय