नवीन शुक्ला नहीं बनेंगे प्रिंसिपल ईडी/कैटरिंग

    प्रिंसिपल ईडी/कैटरिंग के पद पर अब उ. रे. से नीरज कुमार को ले जाया गया

    प्रिंसिपल सीओएम/उ. रे. ने रो-गाकर रद्द किया मंडल अधिकारियों के ट्रांसफर

    तमाम कोशिशों के बाद भी ट्रांसफर रद्द कराने में सफल नहीं हुए सीसीएम/द.पू.म.रे.

    नई दिल्ली : रेलमंत्री पीयूष गोयल की इच्छानुसार ट्रैफिक निदेशालय, रेलवे बोर्ड ने 19 जनवरी को प्रिंसिपल ईडी/मोबिलिटी नवीन कुमार शुक्ला का पोस्टिंग ऑर्डर प्रिंसिपल ईडी/कैटरिंग के पद पर जारी किया था. परंतु इस दरम्यान श्री शुक्ला ने उक्त पद पर जाने से अपनी अनिच्छा जाहिर करते हुए अपनी पोस्टिंग रद्द करवा ली. रेलवे बोर्ड के विश्वस्त सूत्रों से ‘रेलवे समाचार’ को मिली जानकारी के अनुसार श्री शुक्ला ने उक्त पद पर जाने से तीन कारणों से मना किया है. पहला यह कि वह 31 मार्च को ए. के. उपाध्याय के रिटायर होने पर प्रिंसिपल सीओएम/उ.रे. के पद पर जाने के इच्छुक हैं. दूसरा यह कि यदि वह प्रिंसिपल ईडी/कैटरिंग के पद पर चले जाते, तो दो-ढ़ाई महीने बाद ही पुनः उनकी पोस्टिंग बदलने के लिए शायद रेलमंत्री तैयार नहीं होते. तीसरा कारण यह है कि कैटरिंग में बहुत सारे झंझट हैं, इसलिए उक्त अत्यंत संवेदनशील और हॉट पोस्ट पर रहने से भविष्य में उन्हें तमाम अनावश्यक विवादों का सामना करना पड़ सकता था.

    सूत्रों का कहना है कि उपरोक्त कारणों के चलते ही श्री शुक्ला अब श्री उपाध्याय के रिटायर होने तक प्रिंसिपल ईडी/मोबिलिटी के पद पर पूर्ववत बने रहेंगे. अचानक हुए इस बदलाव के परिणामस्वरूप अब प्रिंसिपल ईडी/कैटरिंग/रे.बो. के पद पर सीएसओ/उत्तर रेलवे के पद से नीरज कुमार को रेलवे बोर्ड में लाया गया है. जबकि उनकी जगह उनकी पत्नी और डीआरएम/कोटा रह चुकी श्रीमती सीमा कुमार को सीसीएम/पीएस के पद से सीएसओ/उ.रे. के पद पर पदस्थ किया गया है. इसी प्रकार 19 जनवरी को ईडी/मोबिलिटी, रेलवे बोर्ड के पद पर पदस्थ किए गए अतीश सिंह का ट्रांसफर उत्तर रेलवे कैडर में कर दिया गया है. जबकि ईडी/एनएफआर एंड टूरिज्म के पद पर श्रीमती स्मिता रावत की पदस्थापना यथावत रखी गई है.

    अंततः रद्द हुए उत्तर रेलवे के मंडल वाणिज्य एवं परिचालन अधिकारियों के तबादले

    उधर खबर है कि उत्तर रेलवे में हाल ही में नव-नियुक्त प्रिंसिपल सीसीएम को अपने मन-मुताबिक अपनी टीम बनाने का अवसर अब भी नहीं दिया जा रहा है. हालांकि प्राप्त जानकारी के अनुसार उनकी जिद के चलते फिरोजपुर एवं मुरादाबाद मंडलों के कुछ मंडल वाणिज्य एवं परिचालन अधिकारियों के अनावश्यक और विवादस्पद तबादलों को किसी तरह रो-गाकर अंततः रद्द कर दिया गया है, जिससे उक्त सभी अधिकारियों ने भारी राहत की सांस ली है.

    तथापि फिरोजपुर मंडल के जिस अधिकारी को प्रिंसिपल सीसीएम द्वारा अंबाला में पदस्थ किए जाने की अनुशंसा की गई थी, उसे न मानकर उक्त अधिकारी को अनावश्यक रूप से दिल्ली मंडल में डाल दिया गया है. जबकि जो अधिकारी अंबाला से दिल्ली आना चाहता था और जिसका परिवार दिल्ली में रहता है तथा जिसके आने से शायद दिल्ली मंडल का ज्यादा भला होता, मगर प्रिंसिपल सीसीएम की यह अनुशंसा नहीं मानी गई.

    उल्लेखनीय है कि सभी जोनल रेलों में प्रिंसिपल सीसीएम हो या कोई अन्य विभाग प्रमुख, सभी विभाग प्रमुखों को अपने विश्वसपात्र अधिकारियों की टीम बनाकर काम करने की अनुमति दी जाती है और विभाग प्रमुख (सीसीएम) द्वारा की गई अनुशंसा को कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी द्वारा अमूमन ज्यों का त्यों स्वीकार कर लिया जाता है. मगर उत्तर रेलवे के वाणिज्य विभाग प्रमुख को यह छूट नहीं मिल रही है. विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि अब तक यह खेल पूर्व प्रिंसिपल सीसीएम की आड़ में खेला जा रहा था, मगर उनको हटाए जाने के बाद अब इस खेल की कलई पूरी तरह से खुल गई है. इस खेल में सीएफटीएम की भूमिका भी अब एक्सपोज हो चुकी है.

    सूत्रों का कहना है कि यह पहली बार है जब उत्तर रेलवे में मंडल अधिकारियों के तबादले अधिकारिक रूप से रद्द किए जाने का ऑफिस ऑर्डर निकाला गया है. जबकि इससे पहले अधिकारियों के किए गए तबादलों पर यदि अमल नहीं होता था, तो उन्हें वैसे ही रद्द मानकर छोड़ दिया जाता था और कोई ऑफिस ऑर्डर नहीं निकाला जाता था. इसके उदाहरण स्वरूप सूत्रों ने मुरादाबाद मंडल के एसीएम दिलीप कुमार सेठ के जून 2017 में मुरादाबाद से दिल्ली के लिए हुए तबादले का प्रमाण भी दिया.

    सूत्रों का कहना है कि श्री सेठ का तबादला अधिकारिक रूप से आज तक रद्द नहीं हुआ है. इसका कारण बताते हुए सूत्रों का कहना है कि उक्त तबादला वसूली के उद्देश्य से कदाचारी पूर्व प्रिंसिपल सीसीएम की अनुशंसा पर किया गया था. मगर जैसे ही पर्याप्त एडवांस राशि के साथ ही उनका माहवारी हफ्ता तय हो गया, वैसे ही पूर्व प्रिंसिपल सीसीएम ने श्री सेठ को मुरादाबाद से रिलीव कराने का कोई दबाव नहीं बनाया और प्रिंसिपल सीओएम भी इससे आज तक अंजान बने हुए हैं.

    यहां यह भी ज्ञातव्य है कि प्रशासनिक कारणों से यदि किसी अधिकारी को अपनी उपयुक्त पोस्टिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है, तो उसे उसके वेतन का पूरा लाभ मिलता है और उसे अपनी व्यक्तिगत छुट्टियां नहीं गंवानी पड़ती हैं. यही नीति और नियम सभी जोनल रेलों में वर्षों से अपनाया जा रहा है. मगर उत्तर रेलवे इसका अपवाद है. यहां इसके लिए अधिकारियों को अपनी व्यक्तिगत छुट्टी गंवानी पड़ती है, जबकि उनका कोई दोष नहीं होता है और न ही वह अपनी व्यक्तिगत वजह या शौक से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे होते हैं.

    सूत्रों का कहना है कि फिरोजपुर मंडल से जिस अधिकारी का तबादला अब दिल्ली मंडल में किया गया है, उसे लखनऊ मंडल से ट्रांसफर हुए अधिकारी को एडजस्ट करने के लिए सीनियर डीओएम/जी की पोस्ट को डाउनग्रेड करके उस पर फिरोजपुर में पदस्थ किया गया था. परंतु जब उक्त पद पर रहे अधिकारी का तबादला रद्द कर दिया गया, तो उसके लिए फिरोजपुर में कोई जगह ही नहीं बची. परिणामस्वरूप उसे दिल्ली लाना पड़ा है, जहां अब उसे वर्षों तक उपयुक्त आवास की समस्या का सामना करना पड़ेगा और जितने दिन पोस्टिंग का इंतजार किया, उसका वेतन भी गंवाना पड़ेगा.

    सूत्रों ने बताया कि फिरोजपुर में उसके पद पर उक्त अधिकारी का कार्यकाल भी पूरा नहीं हुआ था, इसलिए उसको हटाने के बजाय लखनऊ मंडल से ट्रांसफर होकर गए अधिकारी को परिचालन विभाग में एडजस्ट किया जा सकता था. मगर वाणिज्य विभाग की इस अनुशंसा को कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी ने नजरअंदाज करके कदाचारी पूर्व प्रिंसिपल सीसीएम की मंशा को ही पूरा किया है. इसका अनावश्यक दंड एक सीधी भर्ती अधिकारी को अनावश्यक रूप से दरबदर होकर भुगतना पड़ा है.

    सूत्रों ने बताया कि मुख्यालय स्तर पर भी कुछ आवश्यक बदलावों पर प्रिंसिपल सीसीएम की अनुशंसा अब भी नहीं मानी जा रही है. जहां अभी भी कुछ अधिकारी पूर्व प्रिंसिपल सीसीएम को महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचाने में लगे हुए हैं, वहीं बंटी-बबली को पुनः वाणिज्य मुख्यालय में पदस्थ किए जाने की जुगाड़ लगाई जा रही है. जबकि जानकारों का मानना है कि पूर्व प्रिंसिपल सीसीएम सहित बंटी-बबली को यदि दिल्ली से बाहर नहीं भेजा जाता है, तो उत्तर रेलवे वाणिज्य विभाग को कुटिल राजनीति से मुक्त कर पाना संभव नहीं होगा. वैसे भी पूर्व प्रिंसिपल सीसीएम द्वारा कुछ वाणिज्य अधिकारियों के खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत शिकायतें करवाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है.

    तबादला रद्द कराने के लिए प्रिंसिपल सीसीएम/द.पू.म.रे. ने लगाया एड़ी-चोटी का जोर

    18 जनवरी को रेलवे बोर्ड द्वारा प्रिंसिपल सीसीएम/द.पू.म.रे. को प्रिंसिपल सीसीएम/पूर्वोत्तर रेलवे के पद पर भेजे जाने का आदेश जारी हुआ था. इसके तत्काल बाद वह अपना यह तबादला रद्द कराने की जुगाड़ में लग गए थे. इसी बीच बताते हैं कि उन्होंने मेंबर ट्रैफिक को कॉल करके उनसे अपना तबादला रद्द करने की अनुनय-विनय के साथ ही नाराजगी भी जाहिर की है और बिलासपुर में ही प्रिंसिपल सीओएम की खाली हो रही पोस्ट पर खुद की पोस्टिंग करने को भी कहा, जिससे उन्हें अपनी ‘सहेली’ को छोड़कर नहीं जाना पड़े. बताते हैं कि एमटी की तरफ से जब उन्हें कोई पुख्ता आश्वासन नहीं मिला, तब उन्होंने दक्षिण पूर्व रेलवे, कोलकाता से उनकी जगह आने वाले अधिकारी को कॉल करके कहा कि वह आने से मना कर दे. तथापि, इस तमाम कवायद में वह फिलहाल सफल नहीं हो पाए हैं.

    बताते हैं कि 23 जनवरी को रेलवे बोर्ड से संबंधित जोनल महाप्रबंधकों को कहा गया कि जिन अधिकारियों के तबादले हुए हैं, उन्हें आज शाम चार बजे तक तत्काल रिलीव कर दिया जाए. इसमें प्रिंसिपल सीसीएम/द.पू.म.रे. का नाम सबसे ऊपर था, क्योंकि उनकी कुचालों को देखते हुए ही रेलवे बोर्ड को उक्त आदेश जारी करना पड़ा था. बताते हैं कि इस आदेश के मद्देनजर उस दिन सभी विभाग प्रमुखों सहित नागपुर में सांसदों के साथ बैठक कर रहे जीएम/द.पू.म.रे. ने बिलासपुर मुख्यालय से फैक्स द्वारा रिलीविंग ऑर्डर मंगाकर मीटिंग के दौरान ही प्रिंसिपल सीसीएम/द.पू.म.रे. को नागपुर में ही थमा दिया था. इससे तिलमिलाए प्रिंसिपल सीसीएम/द.पू.म.रे. मीटिंग को बीच में ही छोड़कर चले गए थे.

    बताते हैं कि गत सप्ताह बिलासपुर दौरे के समय सीआरबी को प्रिंसिपल सीसीएम/द.पू.म.रे. के खिलाफ अपने बंगले पर रेलकर्मियों के अवैध इस्तेमाल सहित हर मामले में मोटी धनराशि की उगाही सहित उनके द्वारा व्यवस्था के दुरुपयोग की कई शिकायतें मिली थीं. इसके अलावा उनके खिलाफ व्यभिचार की भी गंभीर शिकायत रेलवे बोर्ड को भी पहले ही मिल चुकी थी. द.पू.म.रे. मुख्यालय सहित बिलासपुर मंडल के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों में उनके इस व्यभिचार और कदाचार की बात सर्वविदित है, जो कि उनके तबादले से अब पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रहे हैं.

    बताते हैं कि द.पू.म.रे. के पूर्व महा-कदाचारी महाप्रबंधक जिसको छोड़कर गए हैं, उसे वर्तमान कदाचारी महाशय ने तभी हथिया लिया था. बताते हैं कि पूर्व जीएम ने उसे सारे निर्धारित नियमों को ताक पर रखकर वाणिज्य विभाग से कैडर चेंज करके इंजीनियरिंग विभाग में क्लर्क बना दिया था, उसने आज तक टाइपिंग का टेस्ट भी नहीं पास किया है, बल्कि उसके पास न होने पर इन महाशय ने हाल ही में पूरी परीक्षा ही रद्द करा दी. कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व जीएम के रिटायर होने के बाद उसे इन महाशय ने अपनी ‘सहेली’ बना लिया था. कर्मचारियों ने बताया कि यह महाशय उस पर अब तक न सिर्फ लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं, बल्कि ज्यादा पैसों की मांग पर उनके बीच एक बार झगड़ा भी हो चुका है. उनका कहना है कि अब उसे छोड़कर जाने में इन महाशय को भारी असमंजस हो रहा है, जबकि कतिपय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने मोहजाल में फंसाकर उनसे पैसा ऐंठना अब उसका शौक बन चुका है.

    कार्यालय में हमेशा आरक्षित वर्ग का झंडा उठाए रखने वाले इस कदाचारी और व्यभिचारी अधिकारी से अकेले मिलने और बात करने से भी अन्य वर्ग के अधिकारियों को डर लगा रहता है. इस बात की भी शिकायत रेलवे बोर्ड को मिली थी. कर्मचारियों का कहना है कि जातिवाद फैलाने वाले इस अधिकारी को अब पूर्वोत्तर रेलवे यानि उत्तर प्रदेश में काम करने से डर लग रहा है, जबकि रेलवे बोर्ड के आदेश के तुरंत बाद 23 जनवरी को ही इसका चार्ज तत्काल प्रभाव से प्रिंसिपल सीओएम को सौंप दिया गया था.

    तथापि, यह महाशय अपनी नई जगह ज्वाइन करने जाने के बजाय लगातार अपने कार्यालय में बैठकर फाइल्स निपटा रहे हैं और नजराना वसूल करने में लगे हुए हैं. जबकि उनके चले जाने की गलत जानकारी (कंप्लायंस) उसी दिन रेलवे बोर्ड को दे दी गई थी. यह जानकारी ‘रेलवे समाचार’ को प्रत्यक्षदर्शी कई कर्मचारियों ने दी है. बहरहाल, इस बारे में जब ‘रेलवे समाचार’ ने रेलवे बोर्ड से दरयाफ्त किया, तो कहा गया कि उन्हें सोमवार या मंगलवार (29 या 30 जनवरी) को वहां से रिलीव कर दिया जाएगा.

    टिकट चेकिंग स्टाफ से संबंधित विवाद पर सीआरबी ने लगाई लगाम

    पश्चिम रेलवे में अहमदाबाद से सूरत के बीच राणकपुर एक्स. में एक टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा पैसा लेकर अवैध रूप से सामान्य यात्रियों को आरक्षित कोच में बैठने की अनुमति देने की शिकायत रेलमंत्री पीयूष गोयल तक 19 जनवरी को पहुंचने के बाद मचे हड़कंप से रेलवे बोर्ड सहित सभी जोनल रेलों के वाणिज्य अधिकारी हरकत में आ गए थे. रेलमंत्री के आदेश पर तत्काल उक्त टिकट चेकिंग स्टाफ को निलंबित कर दिया गया था और सभी जोनल रेलों को चलती गाड़ियों में ऑन बोर्ड टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा यात्रियों से पैसा लेने या मांगने की जांच के लिए विजिलेंस एवं अन्य अधिकारियों की तैनाती करने सहित स्थानीय आदेश निकालकर सभी संबंधित कार्यालयों में चस्पा करने का रेलवे बोर्ड से तत्काल एक एडवाइजरी आदेश जारी कर दिया गया.

    फोटो परिचय : रेल भवन में चेयरमैन, रेलवे बोर्ड अश्वनी लोहानी के साथ उत्तर रेलवे के प्रधान टिकट निरीक्षक अनिल मोहला.

    बताते हैं कि सादे कागज पर रेलवे बोर्ड की यह एडवाइजरी तत्काल सिर्फ सभी जोनल प्रिंसिपल सीसीएम को ही भेजी गई थी. तथापि यह कब, कैसे और किस सीसीएम के पास से निकलकर समस्त चेकिंग स्टाफ के मोबाइल पर वायरल हो गई, किसी को इसकी जानकारी नहीं है. बहरहाल, 16 में से चार जोनों के प्रिंसिपल सीसीएम ने इसके आधार पर न तो स्थानीय आदेश निकालने में देरी की, और न ही चलती गाड़ियों में अधिकारियों और विजिलेंस की तैनाती करने में देर लगाई. बताते हैं कि यह चारों वह प्रिंसिपल सीसीएम हैं, जो कि एसडीजीएम रहकर आए हैं. इससे पूरी भारतीय रेल के टिकट चेकिंग स्टाफ में भारी हड़कंप मच गया और चौतरफा इस आदेश के खिलाफ सभी टिकट जांच कर्मियों का भयंकर आक्रोश फूट पड़ा.

    प्राप्त जानकारी के अनुसार टिकट जांच कर्मियों को इस प्रकार सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने और उनके गुस्से को देखते हुए उत्तर रेलवे के प्रधान टिकट निरीक्षक अनिल मोहला ने सीआरबी अश्वनी लोहानी से तत्काल मुलाकात करके उन्हें न सिर्फ स्टाफ की भयंकर प्रतिक्रियाओं से अवगत कराया, बल्कि यह भी कहा कि एक तरफ रेलवे बोर्ड टिकट जांच कर्मियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने और प्रशासनिक सामंजस्य स्थापित करने तथा रेलवे रेवेन्यु बढ़ाने की बात कहता है, तो दूसरी तरफ उसे इस प्रकार के आदेश से सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा रहा है. इस पर सीआरबी श्री लोहानी ने तत्काल उपरोक्त एडवाइजरी वापस लेने और जोनों एवं मंडलों द्वारा जारी किए गए सभी स्थानीय आदेश रद्द करने को कहा. यह एडवाइजरी शुक्रवार, 19 जनवरी को जारी की गई थी, जबकि शनिवार, 20 जनवरी को सीआरबी के तत्काल हस्तक्षेप से इसे वापस ले लिया गया था.

    परंतु एक लेबर फेडरेशन ने उक्त एडवाइजरी के विरुद्ध और सीआरबी के निर्णय के एक दिन बाद यानि रविवार, 21 जनवरी को एक पत्र जारी करके सीआरबी के निर्णय का श्रेय खुद लेने का निरर्थक प्रयास किया. उधर रेलमंत्री पीयूष गोयल रेलकर्मियों और अधिकारियों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं. बताते हैं कि जब उन्हें उपरोक्त शिकायत मिली थी, तब उन्होंने मुंबई में अधिकारियों के साथ हो रही एक बैठक में कहा कि यह सभी टिकट जांच कर्मी भ्रष्ट हैं. पता चला है कि उन्होंने यह भी कहा कि कभी टिकट चेकिंग स्टाफ को पैसा देकर उन्होंने भी इसी तरह गाड़ी में यात्रा की थी. इससे जाहिर है कि रेलमंत्री न सिर्फ सभी रेलकर्मियों को एक साथ भ्रष्ट मान रहे हैं, बल्कि इसी बहाने वह उनसे अपनी पुरानी खुन्नस निकालते हुए उन्हें हर मौके पर अपमानित कर रहे हैं.

    इसके अलावा यह बात भी सही है कि रेल प्रशासन द्वारा टारगेट के नाम पर रेलयात्रियों को जमकर लूटा जा रहा है. इस टारगेट को पूरा करने के लिए टिकट जांच कर्मचारी सामान्य यात्रियों का डिफरेंस बनाकर उन्हें आरक्षित डिब्बों में यात्रा की अनुमति प्रदान कर रहे हैं, जिससे आरक्षित यात्रियों को भारी मुश्किलों और समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. 72 बर्थ वाले एक आरक्षित स्लीपर कोच में डेढ़-दो सौ यात्रियों के घुस जाने से पानी और शौचालय की समस्या पैदा हो रही है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है.

    इसके साथ ही गाड़ी में जाने के बजाय प्लेटफार्म पर खड़े होकर डिफरेंस बनाकर अपना टारगेट पूरा कर रहे टिकट जांच कर्मचारी प्रति दिन 800-800 रुपये का फर्जी ट्रेवलिंग एलाउंस (टीए) लेकर रेलवे रेवेन्यु को भी चूना लगा रहे हैं. यह सारा भ्रष्टाचार संबंधित मंडल एवं जोनल वाणिज्य अधिकारियों की शह पर हो रहा है, जो कि अवैध रूप से ज्यादा से ज्यादा टिकट जांच रेवेन्यु दिखाकर डीआरएम, जीएम और रेलवे बोर्ड की टिकट जांच शील्ड हासिल करके अपनी आउटस्टैंडिंग एसीआर बना रहे हैं. रेल प्रशासन को इस अधिकारिक और विभागीय भ्रष्टाचार पर लगाम लगानी चाहिए और उतने ही टिकट जारी किए जाने चाहिए, जितनी गाड़ी में जगह हो.

सम्पादकीय