वर्ष 2018 में ‘इसरो’ के उपग्रहों से जुड़ जाएंगे भारतीय रेल के सभी इंजन

    संरक्षा-सुरक्षा के साथ दुर्घटनाओं और मानवीय भूलों पर होगा पूरा नियंत्रण

    नई दिल्ली : रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2018 में अपने सभी रेल इंजनों को ‘इसरो’ के उपग्रहों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है. रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने ‘रेलवे समाचार’ को बताया कि इससे गाड़ियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और चालक दल के सदस्यों से संपर्क करना अत्यंत आसान हो जाएगा. रेलवे बोर्ड के इस वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि साल के अंत तक रेलवे के सभी 10,800 इंजनों में उपग्रहों के एंटीना लगा दिए जाएंगे और ड्राइवर कैब के अंदर से इनकी निगरानी की जाएगी.

    रेलवे बोर्ड के इस वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इससे पहले ही 10 इंजनों में यह प्रयोग करके देखा जा चुका है और दिसंबर 2018 तक इस ‘उपग्रह निगरानी प्रणाली’ को भारतीय रेल के सभी उपलब्ध इंजनों में लगाए जाने का काम पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस प्रणाली का परीक्षण नई दिल्ली से गुवाहाटी के बीच चार और नई दिल्ली से मुंबई मार्ग पर बिजली से चलने वाले छह इंजनों पर किया जा चुका है.

    उन्होंने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के साथ मिलकर रेलवे द्वारा यह काम किया जा रहा है, ताकि इसरो के उपग्रह आधारित सिस्टम का इस्तेमाल रेलवे द्वारा मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाली दुर्घटनाओं और ट्रेनों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए किया जा सके. इसरो के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम करते हुए रेलवे ने कुछ रेल इंजनों पर एक निजी एजेंसी द्वारा विकसित इंटिग्रेटेड सर्किट (आईसी) चिप लगाई है.

    अधिकारी ने बताया कि रेलवे द्वारा भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली का इस्तेमाल मानवरहित क्रॉसिंग में लगाए गए हॉर्न के जरिए सड़क उपयोगकर्ताओं को करीब आ रही ट्रेनों के प्रति आगाह करने के लिए भी किया जाएगा. इससे न सिर्फ मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग्स पर, बल्कि चलती ट्रेनों में संरक्षा और सुरक्षा का स्तर बहुत बढ़ जाएगा, जिससे रेल दुर्घटनाओं सहित मानवीय भूलों को नियंत्रित करने में भारी मदद मिलेगी.

सम्पादकीय