नए साल में उत्‍तर मध्‍य रेलवे ने लिया ‘जीरो एक्सीडेंट इयर’ का संकल्‍प

    नए वर्ष में नए उत्साह के साथ निरंतर सुधार का प्रयास करना है -एम.सी.चौहान

    इलाहाबाद ब्यूरो : महाप्रबंधक, उत्‍तर मध्‍य रेलवे एम. सी. चौहान ने नव-वर्ष के अवसर पर 1 जनवरी को उत्‍तर मध्‍य रेलवे मुख्‍यालय के विभाग प्रमुखों एवं वरिष्ठ अधिकारियों तथा उत्‍तर मध्‍य रेलवे के तीनों मंडलों - आगरा, झांसी, इलाहाबाद - के मंडल रेल प्रबंधकों और उनके ब्रांच अधिकारियों को संबोधित करते हुए उ.म.रे. के लिए नए वर्ष 2018 को ‘जीरो एक्सीडेंट इयर’ का संकल्प घोषित किया. उन्होंने उ.म.रे. के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बीते वर्ष में किए गए उल्‍लेखनीय कार्यों विशेष तौर पर समयपालन में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार के साथ ही लोडिंग, राजस्‍व अर्जन में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन और वर्ष 2017 में जीरो स्पेड वाली एक मात्र क्षेत्रीय रेल बनाने की उपलब्धि के लिए बधाई दी.

    नए वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्‍यों का उल्लेख करते हुए महाप्रबंधक श्री चौहान ने कहा कि यद्यपि उत्‍तर मध्‍य रेलवे ने वर्ष 2017 में शानदार प्रगति की है, तथापि हमें अपनी उपलब्धियों पर यहीं नहीं रूक जाना है, बल्कि नए वर्ष में नए उत्साह के साथ इसमें निरंतर सुधार के लिए प्रयास करने हैं. उन्होंने अपनी बात को और स्‍पष्‍ट करते हुए कहा कि वर्ष 2018 को उत्‍तर मध्‍य रेलवे के लिए ‘जीरो एक्‍सीडेंट इयर’ बनाना है. उन्होंने कहा कि ‘संरक्षा के लिए जमीनी स्‍तर पर पूरे जुड़ाव की आवश्‍यकता होती है. इसके लिए हम सभी को संरक्षा के प्रति जागरूकता का भाव जमीनी स्‍तर तक ले जाना होगा. ऊपर से आने वाले सुझावों एवं इनोवेशनों पर विशेष ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है.

    इसी क्रम में महाप्रबंधक द्वारा नए वर्ष के रोड मैप को स्‍पष्‍ट रूप से निम्‍न बिंदुओं में अधिकारियों के समक्ष रेखांकित किया गया-

    * ‘लांग वेल्डेड रेलों के अनुरक्षण मैनुअल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शीत मौसम में सघन पेट्रोलिंग.

    * अधिकारियों/पर्यवेक्षकों द्वारा रात्रिकालीन निरीक्षणों को अधिक सघन करना. विशेष तौर पर  स्‍टेशन स्‍टाफ, गेटमैन, गार्ड एवं ड्राइवरों की सतर्कता की जांच करना.

    * फील्‍ड स्‍टाफ को संरक्षित परिचालन की कीमत पर शार्टकट न अपनाने के लिए जागरूक करना.

    * फोकस्‍ड निरीक्षण एवं सरलीकृत फोकस्‍ड निरीक्षण फॉरमेट. संरक्षा को कार्य-प्रणाली एवं निरीक्षणों का हिस्‍सा बनाया जाए.

    * प्रणाली में उत्पन्न होने वाली कमी के संकेतों पर ध्यान देना, क्योंकि कोई भी दुर्घटना होने से पहले कई संकेत देती है.

    * संरक्षित परिचालन में क्रू-मेंबर्स का बहुत महत्‍वपूर्ण योगदान होता है, उनको जागरूक किया जाए. किसी असामान्‍य स्थिति पर तत्‍काल नियंत्रण कक्ष को सूचित किया जाए.

    * निरीक्षणों एवं कार्यों की प्रगति का ‘सुपर चेक’ किया जाए.

    * मंडलों के वरिष्‍ठ मंडल संरक्षा अधिकारियों द्वारा प्रणालियों में मिली कमियों का समाधान होने तक उसका फॉलोअप किया जाए.

    * रेलवे ट्रैक पर ‘जीरो मिसिंग फिटिंग’ सुनिश्चित की जाए.

    * वरिष्‍ठ मंडल इंजीनियरों, सहायक इं‍जीनियरों एवं परमानेंट वे इंस्‍पेक्‍टरों द्वारा फील्‍ड में अधिक समय दिया जाए.

    * ‘रोलिंग इन’ एवं ‘रोलिंग आउट’ परीक्षण रोलिंग स्‍टॉक की कमियों को पकड़ने का एक मौका होता है. इसकी गुणवत्‍ता उच्‍च स्‍तर की होनी चाहिए एवं कर्मियों को इन परीक्षणों के लिए संपूर्ण जानकारी हेतु प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए. इस संबंध में कर्मियों को सभी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए.

    * कोहरे के मौसम के दौरान लोको इंस्‍पेक्‍टरों द्वारा नियमित ‘फुट-प्‍लेटिंग’ सुनिश्चित की जाए.

    * लोको पायलटों/सहायक लोको पायलटों को देय विश्राम समय का उल्‍लंघन नहीं किया जाए.

    * एम्‍बुश चेक किया जाए, जिससे लोको पायलटों/सहायक लोको पायलटों की सिग्‍नल के बारे में अनुमान लगाने की प्रवृत्ति को पकड़ा और रोका जा सके.

    * ‘प्‍वाइंटों’ और ‘क्रासिंगो’ का नियमित निरीक्षण किया जाए एवं मापे गए आंकड़ों को अवश्‍य दर्ज किया जाए.

    * ‘प्‍वाइंटों’ और ‘क्रासिंगो’ एवं तीव्र मोड़ वाली पटरियों के बाहरी रेल की गेज फेस पर नियमित ग्रीसिंग की जाए.

    * आग से बचाव के लिए बिजली और सिग्‍नल एवं दूरसंचार उपकरणों में उचित ‘अर्थिंग’ की व्‍यवस्‍था सुनिश्चित की जाए.

    * सिग्‍नल फेलियर को ठीक करने के दौरान ‘डिस्कनेक्शन मेमो’ जारी करना सुनिश्चित किया जाए.

    * सिग्‍नल एवं दूरसंचार केबल्स की समयबद्ध ‘मैग्‍रिंग’ को सुनिश्चित किया जाए.

    * रनिंग रूमों की स्थिति में सुधार के तहत साउंड प्रूफिंग एवं वातानुकूलन को दुरुस्त किया जाए.

    * कर्मचारियों की शिकायतों का त्‍वरित निस्‍तारण एवं उनकी ट्रेनिंग पर व्यापक रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए.

    * मानव संसाधन को मुख्य फोकस एरिया में रखा जाए. पेयजल उपलब्‍ध्‍ाता एवं रेल आवासों की स्थिति को बेहतर करने के साथ-साथ हॉस्पिटलों एवं डिस्‍पेन्‍सरियों में उपलब्‍ध सुविधाओं में सुधार और सेवानिवृत्‍त कर्मियों के लिए अलग ओपीडी तथा दवा काउंटर सुनिश्चित किया जाए.

    अंत में महाप्रबंधक/उ.म.रे. श्री चौहान ने रेलकर्मियों एवं अधिकारियों की समर्पित टीम पर विश्‍वास व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि हम न सिर्फ ‘जीरो स्पेड’ की उपलब्धि को कायम रखेगें, बल्कि रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्‍यों को पार करते हुए ‘जीरो एक्‍सीडेंट इयर-2018’ के लक्ष्‍य को हासिल करेंगे.

सम्पादकीय