निगमीकरण और निजीकरण से गिर रहा है रेल सेवाओं का स्तर -डॉ. एम. राघवैया

    संरक्षा कोटि के डेढ़ लाख रिक्त पदों के कारण दबाव में रेलकर्मी और संकटग्रस्त रेल-संरक्षा

    अधिक सघनता के कारण वर्तमान ट्रैक पर ज्यादा ट्रेनें चलाने की नहीं बची है कोई गुंजाइश

    भारतीय रेल के वर्तमान नेटवर्क पर किया जा रहा है 130% से अधिक गाड़ियों का संचालन

    मुंबई/वड़ोदरा/रतलाम : नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (एनएफआईआर) के महामंत्री डॉ. एम. राघवैया ने मई 2017 से लेकर दिसंबर 2017 तक लगातार पश्चिम रेलवे के रतलाम, वड़ोदरा एवं मुंबई मंडलों का सघन दौरा किया. 4 मई 2017 की मध्यरात्रि को मुंबई राजधानी एक्सप्रेस से रतलाम पहुंचे महामंत्री डॉ. राघवैया का रतलाम स्टेशन पर स्वागत करने के लिए वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ (डब्ल्यूआरएमएस) के लगभग 300 कार्यकर्ताओं के साथ डब्ल्यूआरएमएस के महामंत्री दादा जे. जी. माहुरकर, अध्यक्ष शरीफ खान पठान, रतलाम मंडल के सचिव बी. के. गर्ग, मंडल अध्यक्ष जसविंदर सिंह इत्यादि पदाधिकारियों ने गगनभेदी नारों के साथ जोरदार स्वागत किया. डॉ. राघवैया के स्वागत में पूरा स्टेशन परिसर फूलों एवं झंडियों से सजाया गया था. पुनः 3 दिसंबर 2017 को रतलाम आगमन पर मंडल के सभी समाचार पत्र डॉ. राघवैया द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों और उनके न्यायपूर्ण निर्णयों तथा उनकी नैतिक कार्य-प्रणाली से भर गए थे.

    फोटो परिचय : पश्चिम रेलवे की लोअर परेल वर्कशॉप में रेलकर्मियों को संबोधित करते हुए एनएफआईआर के महामंत्री डॉ. एम. राघवैया. उनके साथ मंच पर हैं डब्ल्यूआरएमएस के महामंत्री दादा जे. जी. माहुरकर, अध्यक्ष शरीफ खान पठान एवं अन्य पदाधिकारीगण.

    डब्ल्यूआरएमएस द्वारा ‘रेलवे समाचार’ को भेजी गई एक विज्ञप्ति के अनुसार डॉ. एम. राघवैया ने रतलाम डीजल शेड के हजारों रेल कर्मचारियों को संबोधित किया. उन्होंने रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) दवारा एनएफआईआर/डब्ल्यूआरएमएस की सभी मांगों और फेडरेशन की अब तक की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने रेलकर्मियों को बताया कि किस तरह दोनों संगठन एनएफआईआर/डब्ल्यूआरएमएस रेलकर्मियों के हितों के लिए तत्परता से काम कर रहे हैं. उन्होंने डीजल शेड में आर्टीजन श्रेणी में पदोन्नति के लिए इसका विभागीय कोटा 25% से बढ़ाकर अन्य विभागों की तरह 50% करवाने का प्रयास एनएफआईआर ने किया है. डॉ. राघवैया ने उपस्थित रेलकर्मियों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही इस मुद्दे पर एनएफआईआर/डब्ल्यूआरएमएस का प्रयास सफल होगा तथा सभी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रेल के 3350 सीनियर सुपरवाइजरों को ग्रुप ‘बी’ गजटेड का दर्जा दिलाने की हमारी मांग पर भी रेलवे बोर्ड से शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय होने की संभावना है.

    रतलाम के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय परिसर में आयोजित डॉ. राघवैया की दूसरी सभा में भी भारी संख्या में रेल कर्मचारी उपस्थित थे. डॉ राघवैया ने कार्यालयों में क्लर्कों तथा कंप्यूटरों, प्रिंटरों की कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कमियों के कारण काम करने वाले हमारे कार्यालयीन स्टाफ को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. सभा के तत्काल बाद डब्ल्यूआरएमएस कार्यालय, रतलाम में आयोजित एक प्रेस वार्ता डॉ. राघवैया ने रेल एवं यात्री संरक्षा के संबंध में बात करते हुए कहा कि भारतीय रेल की निर्धारित ट्रैक क्षमता का कई गुना इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे ट्रैक पर अत्यधिक सघनता पैदा हो गई है और इससे वर्तमान ट्रैक पर ज्यादा ट्रेनें चलाने की अब कोई गुंजाइश नहीं बची है.

    फोटो परिचय : मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय परिसर वड़ोदरा में रेलकर्मियों के भारी जन-समूह को संबोधित करते हुए एनएफआईआर के महामंत्री डॉ. एम. राघवैया.

    उन्होंने बताया कि भारतीय रेल के वर्तमान 70 हजार रूट किलोमीटर नेटवर्क पर 130% अधिक गाड़ियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे गाड़ियों के सुरक्षित संचालन पर प्रतिकूल परिणाम हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण रेल दुर्घटनाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है. डॉ. राघवैया ने कहा कि 30% रेल दुर्घटनाएं मानवीय भूलों से तथा 70% रेल दुर्घटनाएं सिस्टम फेल होने से हो रही हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय रेल में ट्रेकमेन के लगभग 60 हजार पद रिक्त पड़े हैं. इसके कारण लगभग 2.5 लाख रेलकर्मियों को 12 घंटे से ज्यादा इयूटी करनी पड़ती है, जबकि रेलवे की एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने सुझाव दिया है कि किसी भी कर्मचारी से 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करवाया जाना चाहिए. परंतु रेल प्रशासन इस सुझाव को अनदेखा कर मनमाने ढंग से 12 घंटे की इयूटी रेल कर्मचारियों से करा रहा है.

    डॉ. राघवैया का कहना था कि वर्तमान परिदृश्य में बुलेट ट्रेन का निर्माण देश की जनता के कठिन परिश्रम से अर्जित धन का दुरुपयोग है. इससे समाज को कोई फायदा नहीं होगा. उन्होंने रेलवे में विभिन्न कार्यों के निजीकरण की प्रथा की कठोर शब्दों में निंदा की. उन्होंने बताया कि इस प्रथा से रेल उपयोगकर्ता संतुष्ट नही होंगे, जिससे रेलवे की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा. डॉ. राघवैया ने कहा कि बुलेट ट्रेन की जगह जापान से रेलपथ के रख-रखाव की उन्नत तकनीक लाने पर करार किया गया होता, तो ज्यादा बेहतर होता. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रेलवे के निगमीकरण और निजीकरण से रेल सेवाओं का स्तर गिरता जा रहा है.

    फोटो परिचय : डीजल शेड रतलाम में एनएफआईआर के महामंत्री डॉ. एम. राघवैया और डब्ल्यूआरएमएस के महामंत्री दादा जे. जी. माहुरकर का भारी पुष्पहार से स्वागत करते हुए रतलाम मंडल के मंडल सचिव बी. के. गर्ग एवं डब्ल्यूआरएमएस के अध्यक्ष शरीफ खान पठान.

    इस अवसर पर डब्ल्यूआरएमएस के महामंत्री दादा जे. जी. माहुरकर, अध्यक्ष शरीफ खान पठान, रतलाम मंडल के सचिव बी. के. गर्ग, मंडल अध्यक्ष जसविंदर सिंह के साथ डॉ. राघवैया ने दाहोद वर्कशाप का भी दौरा किया. वहां भी उन्होंने करीब दो घंटे तक विशाल सभा को संबोधित किया. डॉ. राघवैया ने इस सभा में कहा कि एनएफआईआर/डब्ल्यूआरएमएस का लक्ष्य सभी रेल कारखानों में काम कर रहे रेल कर्मचारियों को बेहतर इंसेंटिव दिलाना है, जिससे कारखानों में काम कर रहे सुपरवाइजरों और आर्टीजनों के वेतन में 3000 से 4000 रुपए तक की वृद्धि हो जाएगी.

    डॉ. राघवैया ने 5 दिसंबर को डब्ल्यूआरएमएस महामंत्री जे. जी. माहुरकर, अध्यक्ष शरीफ खान पठान के साथ इलेक्ट्रिक लोको शेड वड़ोदरा में आयोजित पहली सभा को संबोधित किया, जिसमें लगभग 1400 रेल कर्मचारी उपस्थित थे. सभा से पहले वड़ोदरा मंडल के मंडल सचिव एन. के. महानी, मंडल अध्यक्ष जे. एम. काकड़े तथा जोनल कोषाध्यक्ष के. पी. गुप्त ने डॉ. एम. राघवैया का गर्मजोशी और जोरदार नारों के साथ स्वागत किया. सभा को संबोधित करते हुए डॉ. राघवैया ने एनएफआईआर/डब्ल्यूआरएमएस की उपलब्धियों को विस्तार से कर्मचारियों को बताया तथा यह भी कहा कि रनिंग स्टाफ को 14.29% पे-फिक्सेसन का लाभ केवल एनएफआईआर के प्रयास से ही मिलना संभव हो पाया है. उन्होंने बताया कि 01.01.2004 के बाद रेलसेवा में आए कर्मचारियों के परिजनों को 50% पेंशन दिलवाने का महत्वपूर्ण कार्य भी एनएफआईआर ने ही किया है.

    उन्होंने सभा में उपस्थित हजारों रेलकर्मियों को बताया कि 2016 की रिस्ट्रक्चरिंग (अपग्रेडेशन) का लाभ भी एनएफआईआर के ही प्रयासों से सफल हुआ है. डॉ. राघवैया ने रेल कर्मचारियों की उनके द्वारा गाड़ी संचालन के लिए विषम परिस्थितियों में किए जाने वाले कठिन परिश्रम और सतर्कता की भूरि- भूरि प्रसंशा की. इस मौके पर रेलकर्मियों से सीधे संवाद का आयोजन भी लोको शेड वड़ोदरा में रखा गया था, जिसमें डॉ. राघवैया ने सीनियर सुपरवाइजरों दवारा पूछे गए सीधे प्रश्नों का उत्तर दिया. सीनियर सुपरवाइजरों ने एनएफआईआर की सुपरवाइजरों के लिए 4800 ग्रेड-पे की मांग पर रेलवे बोर्ड के असहयोगपूर्ण रवैये पर आपत्ति जताई. डॉ. राघवैया ने उन्हें आश्वासन दिया कि एनएफआईआर इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय सीनियर सुपरवाइजरों के पक्ष में निश्चित रूप से लाकर रहेगा, जिससे उनकी वेतन संरचना में पर्याप्त सुधार होगा. तत्पश्चात डॉ. राघवैया ने डब्ल्यूआरएमएस कार्यालय, प्रतापनगर में एक प्रेस कान्फ्रेंस को भी संबोधित किया.

    डॉ. एम. राघवैया ने 6 दिसंबर को लोअर परेल वर्कशॉप, मुंबई में एक विशाल सभा को संबोधित किया. सभा से पहले उन्होंने महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की. इस मौके पर श्रीकृष्ण मुंगेकर ने डॉ. राघवैया का स्वागत किया. सभा को संबोधित करते हुए डॉ. राघवैया ने कहा कि रेल कारखानों और उत्पादन इकाईयों में इतनी ज्यादा क्षमता है कि यहां तमाम गाड़ियों के कोच, वैगन तथा लोकोमोटिव बनाए जा सकते हैं, लेकिन सरकार ऐसा करना नहीं चाहती है, क्योंकि सरकार को निजीकरण और निगमीकरण से अपनी जिम्मेदारियों को झटकने का मौका मिलता है. सभा की समाप्ति पर शाखा सचिव अभिजीत बनर्जी ने सभी उपस्थितों को धन्यवाद ज्ञापित किया.

    एनएफआईआर के महामंत्री डॉ. एम. राघवैया ने दूसरी सभा को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय परिसर, मुंबई सेंट्रल में संबोधित किया. इस सभा में ट्रैकमेन, लोको पायलट, गार्ड, कैरेज एंड वैगन डिपो के कर्मचारी, कार्यालयीन स्टाफ एवं चिकित्सा विभाग इत्यादि में कार्यरत कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे. इस मौके पर डब्ल्यूआरएमएस के महामंत्री दादा जे. जी. माहुरकर ने भी कर्मचारियों को संबोधित किया. डॉ. एम. राघवैया के नेतृत्व में डब्ल्यूआरएमएस की उन्नति एवं प्रगति का भी उल्लेख महामंत्री दादा माहुरकर ने किया. उन्होंने बताया कि पश्चिम रेलवे में आईआरएमएस डॉक्टरों की अत्यंत कमी है. इसकी चर्चा उन्होंने डीजी/हेल्थ/रे.बो. से भी की है.