कर्ज लेकर बुलेट ट्रेन का निर्माण करना उचित नहीं –शिवगोपाल मिश्रा

    रेलवे का निजीकरण नहीं होगा, अफवाहों पर ध्यान न दें -मनोज सिन्हा

    बुलेट ट्रेन पर व्यर्थ धन बरबाद करने के बजाय ढ़ांचा मजबूत किया जाए

    जर्जर पटरियों पर हाई स्पीड ट्रेन चलाने का दावा करना एक बड़ी चुनौती

    आज तक जिस भी संस्था को आईएएस के हवाले किया गया, बरबाद हो गई

    गोरखपुर ब्यूरो : ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) का तीन दिवसीय 93वां वार्षिक अधिवेशन 15 से 17 नवंबर 2017 को सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम, गोरखपुर में संपन्न हुआ. अधिवेशन की अध्यक्षता एआईआरएफ के अध्यक्ष कॉम. रखाल दासगुप्ता ने की. इस अवसर पर बड़ी संख्या में रेलकर्मी उपस्थित थे. खुले सत्र का उदघाटन मुख्य अतिथि रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने किया. इससे पहले सुबह के सत्र में महिला सम्मेलन संपन्न हुआ. दोपहर को गोरखपुर रेलवे स्टेशन से निकाली गई रैली काली मंदिर, गणेश चौराहा, विश्वविद्यालय चौराहा होते हुए स्टेडियम पहुंची. इसके बाद खुला अधिवेशन शुरू हुआ. इस मौके पर सर्वप्रथम एनईआरएमयू के महामंत्री कॉम. के. एल. गुप्ता के 100 वर्ष पूरा करने के अवसर को हर्षोल्लास के साथ मनाकर ऐतिहासिक बनाया गया.

    इस अवसर पर अपने संबोधन में एआईआरएफ के महामंत्री कॉम. शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि रेलवे को निजीकरण से बचाने का संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने रेलवे में निजीकरण को रोकने, नई पेंशन योजना को खत्म करने, रिक्त पदों पर भर्ती सुनिश्चित किए जाने, कर्मचारी कल्याण, सुरक्षित रेलवे, रेल अप्रेंटिस को रोजगार देने इत्यादि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि रेलवे प्रिंटिंग प्रेस को बंद नहीं होने दिया जाएगा. रेलवे बोर्ड प्रशासनिक पदों पर आईएएस की तैनाती करने का मन बना रहा है, इस पर उनका कहना था कि आज तक जिस भी संस्था को आईएएस के हवाले किया गया, वह बर्बाद हो गई. उनका कहना था कि रेलवे को अनुभवी अधिकारी और कुशल इंजीनियर ही चलाने में सक्षम हैं.

    फेडरेशन के केंद्रीय महामंत्री कॉम. मिश्रा ने यह भी कहा कि आरडीए सफल नहीं होगा. उन्होंने खुले अधिवेशन में कहा कि बढ़ती जनसंख्या के कारण नई ट्रेनें चलाने की जरूरत है, लेकिन उसी के अनुरूप मैन-पॉवर भी बढ़ाया जाना चाहिए. इसके अलावा उनका कहना था कि जर्जर पटरियों पर हाई स्पीड ट्रेन चलाने का दावा करना एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन पर व्यर्थ धन बरबाद करने के बजाय उसे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर खर्च किया जाना चाहिए, ताकि अतिरिक्त पटरियां बिछाई जा सकें और नए कोचों का निर्माण किया जा सके. उन्होंने कहा कि हाई स्पीड ट्रेन के लिए अत्यधिक कर्ज लेना भविष्य में खतरे का संकेत है. रिक्त पदों पर भर्ती न होने से सरंक्षा की कमान संभालने वाले कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है. रिक्त पदों पर तुरंत भर्ती की जाए.

    रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने देश भर से आए अधिवेशन में उपस्थित हजारों रेलकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि एआईआरएफ देश की सबसे बड़ी और पुरानी एकमात्र यूनियन है, जो किसी भी राजनैतिक पार्टी से संलग्न नहीं है. उन्होंने कहा कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा. रेल प्रशासन और फेडरेशन एक साथ मिलकर सभी समस्याओं को हल करने की कोशिश करेंगे. श्री सिन्हा ने कहा कि सरकार रेलवे के निजीकरण की पक्षधर नहीं है. रेलवे कर्मचारी अफवाहों पर ध्यान न दें. उन्होंने कहा कि जिस तरह से काशी में बाबा विश्वनाथ सुरक्षित हैं, उसी तरह भारतीय रेल और वाराणसी स्थित डीएलडब्ल्यू भी सुरक्षित है.

    रेल राज्यमंत्री श्री सिन्हा एआईआरएफ के वार्षिक अधिवेशन के उदघाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. उन्होंने फेडरेशन द्वारा अपने अधिवेशन में रेलवे की सुरक्षा और संरक्षा पर चर्चा की सराहना की. उन्होंने कहा कि यहां पूरे देश से आए रेलकर्मी रेलवे के विकास की बात कर रहे हैं. रेल कर्मचारियों की लंबित मांगों पर चर्चा करते हुए रेल राज्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि कुछ मांगों पर सहमति बन गई है, कुछ पर बाकी है, जल्दी ही उन पर भी बातचीत के जरिए सहमति बना ली जाएगी. उन्होंने कहा कि भारतीय रेल एक बहुत बड़ा संगठन है, जिसके कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर इसकी सेवा कर रहे हैं.

    श्री सिन्हा ने कहा कि कर्मचारियों के सहयोग से ही भारतीय रेलवे की साख बनी हुई है. रेलवे के विकास की चर्चा करते हुए रेल राज्यमंत्री ने बताया कि पिछली सरकारें रेलवे के विकास के लिए प्रति वर्ष 45 हजार करोड़ रुपये का निवेश करती थीं, जबकि मोदी सरकार ने 1.30 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है. रेलवे के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने रेल दुर्घटनाओं पर भी चिंता जताई और कहा कि दुर्घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लगना होगा. इसके लिए सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने रेलकर्मियों से अधिक से अधिक तकनीकी का प्रयोग करने का आह्वान किया.

    रेलवे बोर्ड के मेंबर स्टाफ ए. के. गायन ने कहा कि कर्मचारियों के हित में लगातार कार्य किया जा रहा है. कर्मचारी चार्ट तैयार किया जा रहा है. चिकित्सा सुविधा को और बेहतर बनाया जा रहा है. भारतीय रेल की तेजी से तरक्की हो रही है. निर्माण कार्यों में भी गति आई है. उन्होंने बताया कि रेलवे बोर्ड से संवाद स्थापित करने में श्रमिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका है.

    प्रमुख वक्ताओं ने लोकोमोटिव कारखानों, कोच फैक्ट्रियों को निजी एवं विदेशी कंपनियों को सौंपने और रेलवे स्टेशनों को लीज पर दिए जाने का भी विरोध किया. वक्ताओं का कहना था कि पिछले दरवाजे से रेलवे में भारी मात्रा में लागू की गई ठेकेदरी प्रथा ही रेलवे का निजीकरण है. रेलवे के अधिकतर कार्य ठेके पर ही दिए जा रहे हैं. ठेकेदारों द्वारा मजदूरों पर हो रहे भारी शोषण पर सभी वक्ताओं ने रोष व्यक्त किया. देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने रेल के विकास में तकनीक के इस्तेमाल से नौकरी पर बढ़ते खतरों के प्रति चिंता जाहिर की. देश में हाई स्पीड ट्रेन चलाने हेतु लिए जा रहे कर्ज को ओवर कैपिटलाइजेशन बताते हुए इसे रेलवे के लिए घातक बताया.

    लंदन से आए इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी स्टीफन कॉटन ने कहा कि सरकार सुरक्षा और सरंक्षा में तकनीक के विकास पर निवेश करे, लेकिन उसे यह भी ख्याल रखना होगा कि इससे नौकरी पर खतरा न आए. कर्मचारियों की कुशलता का इस्तेमाल करने पर तकनीक का फायदा मिल सके. एआईआरएफ भारत के साढ़े चार लाख युवा कामगारों को संगठन में शामिल करे, ताकि उनके भविष्य को लेकर भी विमर्श हो सके. नेपाल ट्रांसपोर्ट के प्रतिनिधि अजय रॉय ने कहा कि भारत और नेपाल की साझा संस्कृति है. नेपाल में लोकतंत्र खतरे में है, नए संविधान पर चुनाव होने वाला है. ऐसे में यूनियन संगठित नहीं हुए तो मजदूरों की मुश्किलें बढ़ेंगी.

    अधिवेशन में नेपाल श्रमिक यूनियन की पांच सदस्यीय टीम ने भी भाग लिया. रूस की पांच सदस्यीय टीम के अलावा आईटीएफ, रशिया लेबर यूनियन लीडर आदि देशों से भी कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधि आए. इसके अलावा इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन के महामंत्री स्टीफन कॉटन, रेल रोड अरबन ट्रांसपोर्ट के सचिव नोयल कोआर्ड, आईटीएफ यंग वर्कर्स सेक्शन की कॉर्डिनेटर मिस बेकर, आईटीएफ एशिया प्रशांत क्षेत्र के सहायक सचिव संगम त्रिपाठी, एशियन रशियन रेलवे वर्कर्स फेडरेशन के पांच पदाधिकारियों ने सरजे चेरनोव के नेतृत्व में भाग लिया. ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन के महामंत्री यू. एस. झा और इंडियन रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स फेडरेशन के महामंत्री रमन शर्मा भी उपस्थित थे.

    एआईआरएफ के अध्यक्ष कॉम. रखाल दासगुप्ता ने कहा कि एकता ही संगठन की सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने कहा कि जिस तरह रेलवे के कदम ने निजी क्षेत्रों की तरफ बढ़ते जा रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में मजदूर हितों के लिए हमें काफी लंबा संघर्ष करना पड़ेगा. इस अवसर पर आईटीएफ के सेक्रेटरी नोयल कोआर्ड, जार्डन से आई यूथ कोऑर्डिनेटर बेरल, के. एल. गुप्ता ने भी रेलकर्मियों को संबोधित किया.

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