निरीक्षणों के दौरान मिली कमियों को तत्‍काल सही किया जाए -एम.सी.चौहान

    ट्रैक पर संरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों की पहचान करके कमियों को दूर करने की तैयारी

    इलाहाबाद ब्यूरो : ‘रेलवे समाचार’ द्वारा “आखिर बार-बार झांसी मंडल या उ.म.रे. के दायरे में ही क्यों हो रही हैं दुर्घटनाएं?” (http://www.railsamachar.com/news/1357/read) शीर्षक से प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, सूबेदारगंज, इलाहाबाद के ‘विन्ध्य सभागार’ में महाप्रबंधक एम. सी. चौहान की अध्यक्षता में सोमवार, 27 नवंबर को ही संरक्षा/समयपालन संबंधी एक महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के सभी विभाग प्रमुख एवं वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से तीनो मंडलों - इलाहाबाद, आगरा एवं झांसी - के मंडल रेल प्रबंधकों सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे.

    बैठक की शुरुआत में शुक्रवार, 24 नवंबर 2017 को मानिकपुर रेलवे स्टेशन के पास वास्‍को डिगामा एक्‍सप्रेस की दुर्घटना के मृतकों को सभी अधिकारियों द्वारा 2 मिनट का मौन रखकर श्रंद्धाजलि दी गई. इस अवसर पर महाप्रबंधक एम. सी. चौहान ने मानिकपुर में हुई दुर्घटना को अत्‍यधिक दुर्भाग्‍यपूर्ण बताते हुए कहा कि ‘हम सभी को आत्‍म-निरीक्षण कर इस तरह की किसी भी घटना की संभावनाओं को समाप्‍त करने के प्रयास करना चाहिए.’ उन्‍होंने आगे कहा कि ‘अधिकारियों द्वारा सघन निरीक्षण किए जाने की आवश्‍यकता है और निरीक्षणों के दौरान मिली कमियों को तत्‍काल सही किया जाना चाहिए.’

    इस बैठक के दौरान विभिन्‍न निर्णय लिए गए:

    1. ‘ए’ रूट पर बलास्‍ट की डीप स्‍क्रीनिंग को प्राथमिकता दी जाए.

    2. ट्रैक पर समुचित मात्रा में बलास्‍ट की उपलब्‍धता सुनिश्चित करनी होगी.

    3. ट्रैक पर किए जाने वाले सभी कार्य वर्क-साइट एवं कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर ही किए जाएं.

    4. आगामी 15 दिनों में सभी पेट्रोलमैनों एवं निरीक्षण ट्रालियों में जीपीएस आ‍धारित ट्रैकर लगाये जाएं.

    5. वेल्‍डरों की स्किल में सुधार करने के लिए अभियान चलाया जाए, ताकि रेल प‍टरियों के वेल्‍ड फेलियर में कमी की जा सके.

    6. सभी स्‍तरों के अधिकारियों, जिसमें मुख्‍य इंजीनियर से पर्यवेक्षक शामिल हों, द्वारा सघन रात्रि निरीक्षण सुनिश्चित किए जाएं.

    7. पेट्रोलिंग को अधिक सघन बनाया जाए. इसके साथ ही आकस्मिक निरीक्षणों और चेकिंग के माध्‍यम से पेट्रोलिंग की कमियों को जांचा जाए.

    8. सभी बड़े रेलवे पुलों पर अनुरक्षण कर्मियों के लिए तत्काल फुटपाथ बनाया जाए, ताकि वह पुलों पर सुरक्षित चलकर अनुरक्षण कार्य कर सकें.

    9. रेल पटरियों के किनारे ऐसे स्‍थानों पर आरसीसी बाउंड्रीवाल बनाई जाए, ताकि रेल पटरियों पर कूड़ा फेंकने, मल त्‍याग एवं आवारा पशुओं से बचाव हो सके.

    10. जंग लगी रेलों, मल के जमने या कूड़े के कारण ट्रैक पर रेल फ्रैक्‍चर की सम्‍भावना वाले स्‍थानों की पहचान करके रेल पटरियों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए.

    11. निरीक्षणों पर जाने वाले अधिकारियों को संरक्षा संबंधी कमियों के बारे में तत्‍काल नियंत्रण कक्ष को सूचित करना होगा एवं उस कमी को तत्‍काल ही संबंधित अधिकारी/अधिकारियों को दूर करना होगा.

    बैठक के अंत में सभी उपस्थित अधिकारियों ने यह संकल्‍प लिया कि उत्‍तर मध्‍य रेलवे परिक्षेत्र में दुर्घटनाओं से बचाव के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. बैठक का समापन करने से पहले उत्‍तर मध्‍य रेलवे के त्रैमासिक संरक्षा बुलेटिन ‘’जागरूकता’’ के जुलाई-सितंबर 2017 अंक का विमोचन किया गया.

सम्पादकीय