ट्रांसफर के चार महीने बाद भी डीआरएम/कोटा का पीएस पद छोड़ने को तैयार नहीं

    संबंधित अधिकारी नहीं चाहते हैं कि उनका विश्वासपात्र बिचौलिया अन्यत्र कहीं जाए?

    कोटा : पश्चिम मध्य रेलवे, कोटा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के वर्तमान निजी सचिव (पीएस) बी. एम. मेघवाल पिछले आठ साल से नियम विरुद्ध एक ही जगह जमे हुए हैं और ट्रांसफर होने तथा उनकी जगह अन्य कर्मचारी (पीएस) की नियुक्ति हो जाने के बाद भी वह अपना पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं. यहां एक बात तो तय है कि मेघवाल पर संबंधित अधिकारी पूरी तरह से मेहरबान हैं और वास्तव में वही नहीं चाहते हैं कि उनके लिए वर्षों से विश्वासपात्र रहे मेघवाल वहां से अन्यत्र जाएं.

    इसके अलावा यह भी सर्वविदित है कि अधिकारी किसी पर यूं ही मेहरबान नहीं होते. प्राप्त जानकारी के अनुसार मेघवाल पर संबंधित अधिकारियों की यह मेहरबानी इतनी अधिक है कि नई नियुक्ति के बाद भी अधिकारी मेघवाल को हटाने को तैयार नहीं दिख रहे हैं. इसके अलावा अन्य अधिकारियों के साथ कार्यरत पीएस एवं स्टेनोग्राफर्स का भी लंबे समय से अन्यत्र ट्रांसफर नहीं किया गया है. चार महीने बाद भी बी. एम. मेघवाल द्वारा पद न छोड़े जाने पर कर्मचारियों ने भारी आश्चर्य व्यक्त किया है. उनका कहना है कि इस मामले में मेघवाल की कम, बल्कि संबंधित अधिकारियों की गलती ज्यादा है.

    मंडल के सूत्रों ने ‘रेलवे समाचार’ को बताया कि डीआरएम के निजी स्टॉफ में शामिल कर्मचारियों की कार्य-प्रणाली से मंडल के अधिकारी भी खुश नहीं हैं. कुछ अधिकारियों ने अंतरंग बातचीत में कई बार इस बात का उल्लेख भी किया है. सूत्रों ने बताया कि पूरे मंडल कार्यालय में यही एक ऐसा विभाग है जहां कर्मचारी इतने लंबे समय तक एक ही जगह टिके हुए हैं. हालांकि अन्य विभागों में मंडल प्रशासन द्वारा कुछ संवेदनशील पदों से कर्मचारियों का ट्रांसफर किया गया है.

    उल्लेखनीय है कि करीब चार महीने पहले पश्चिम मध्य रेलवे मुख्यालय जबलपुर से मेघवाल की जगह दीपक सिंह की पदस्थापना के आदेश जारी किए गए थे. तब से वह मेघवाल की जगह लेने के लिए डीआरएम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं. परंतु संबंधित अधिकारी कोई न कोई बहाना बनाकर दीपक सिंह को जॉइनिंग देने से टाल रहे हैं. दीपक सिंह पिछले चार महीनों से कोटा स्टेशन स्थित अधिकारी रेस्ट हाउस में ही अपना समय बिता रहे हैं. उनका परिवार जबलपुर में हैं. ऐचार महीनों से पदस्थापना नहीं होने से दीपक सिंह को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस संबंध में डीआरएम उपेंद्र चंद्र जोशी का कहना है कि वह अभी-अभी तो आए हैं, देखते हैं कि क्या मामला है.

सम्पादकीय