मेंबर ट्रैक्शन/रे.बो. की कुटिल करतूतों पर लगाम लगाए रेल प्रशासन

    कैट से कोई लाभ न पाने वाले अधिकारी को पीएचओडी बनाना चाहते हैं एमटीआर!

    आवधिक तबादले के मामले में सीवीसी के समस्त दिशा-निर्देशों को अविलंब लागू किया जाए

    सेंट्रल हॉस्पिटल/उ.रे. सहित अधिकारियों के खिलाफ लंबित मामलों की जांच जल्द पूरा करे सीबीआई

    नई दिल्ली : अपने बिरादर राजेश कुमार सिंह को दिल्ली मंडल उत्तर रेलवे का एडीआरएम बनवाने की जुगाड़ करने के साथ ही उत्तर रेलवे के विश्वसनीय वरिष्ठ सूत्रों से ‘रेलवे समाचार’ को ज्ञात हुआ है कि रेलवे बोर्ड के मेंबर ट्रैक्शन (एमटीआर), कैट इलाहाबाद द्वारा 30 अगस्त 2017 को दिए गए निर्णय में हायर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (एचएजी) में पदोन्नति के लिए किसी भी प्रकार की राहत न पाने वाले राजेश तिवारी, आईआरएसईई 1981 बैच, को इस महीने के अंत में उत्तर रेलवे का प्रिंसिपल सीईई बनाना चाहते हैं. ज्ञात हुआ है कि वर्तमान प्रिंसिपल सीईई/उ.रे. इसी महीने के अंत में रिटायर हो रहे हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री तिवारी फिलहाल उत्तर रेलवे मुख्यालय में ही पदस्थ हैं. कैट, इलाहाबाद के निर्णय की प्रमाणित प्रति ‘रेलवे समाचार’ के पास सुरक्षित है. कैट ने अपने निर्णय में सिलेक्शन कमेटी (डीपीसी) की नोटिंग को उद्दृत किया है, जो कि इस प्रकार है-

    5. ...Respondents No. 1 to 4 through their counter reply have stated that applicant was considered for empanelment to Higher Administrative Grade in HAG/IRSEE panel for the year 2016-17 approved by the ACC on 16.08.2016. However, Selection Committee did not recommend his empanelment in HAG which was approved by the ACC also. While considering the applicant, the DPC made the following assessment in regard to the applicant:-

    “Selection Committee has noted that Shri Rajesh Tiwari has been assessed as ‘Good’ in his 2010-11 (part-II) APAR by the Reporting and Reviewing Authorities and all the attributes (except for the attitude towards R&D) have been graded as ‘Good’ in the APAR. Selection Committee noted that the then GM/NCR as the Reviewing Authority has recorded that although ‘output of the officer has fallen short of the expectations’ in the APAR. Selection Committee noted that although the Accepting Authority upgraded the grading to ‘Very Good’, none of the attributes against Management Qualities was upgraded by the said Authorities. Moreover, Selection Committee also noted that Shri Tiwari has been graded that as ‘Good’ in a number of APARs in his career. Therefore, Selection Committee decided to treat the overall the grading of the APAR for the entire period of 2010-11 as ‘Good’ only for the purpose of its own assessment. Taking this into account, Selection Committee found that Shri Rajesh Tiwari does not meet the performance benchmark of ‘Very Good’ and accordingly, has not recommended his empanelment in HA Grade.”

    कैट ने अपने निर्णय के अंतिम पैरा में अंतिम फैसला देते हुए कहा है कि-

    “17. We are also not able to accept the contention of the learned counsel for the applicant that the Accepting Authority has recorded the reasons for his grading of the 2010-11 APAR of the applicant. A perusal of the copy of APAR of 2010-11 (for period 27.09.2010 to 31.03.2011) at para-5, part IV of the APAR it is seen that the Accepting Authority has recorded ‘NO’ in a column for ‘Suitability as DRM’ although the overall grading was recorded as ‘Very Good’. In other words, even the Accepting Authority has found the applicant not suitable for promotion as DRM as per said APAR. In this context, the observation of the Selection Committee that none of Management Qualities was upgraded by the Accepting Authority is correct and appropriate since when an officer is not found suitable for promotion as DRM even as per the assessment of the Accepting Authority who has graded the officer as ‘Very Good’ for the period 2010-11 (27.09.2010 to 31.03.2011), it would have been difficult for the Selection Committee to find him for the promotion to HAG which is of higher rank than that of DRM. We also note that there is nothing on record to show that the applicant has objected to this assessment of the Accepting Authority in the APAR for the year 2010-11. The finding of the Selection Committee that the applicant does not meet the performance benchmark of ‘Very Good+’ for promotion to HAG is based on the APAR for 2010-11 as well as the grading in other years in the applicant’s career as mentioned in the proceedings of the meeting of the Selection Committee. In view of the judgement of Hon’ble Supreme Court in a catena of cases, the Selection Committee was competent to make to its own assessment of the suitability of the candidates for promotion. Therefore, the decision of the Selection Committee not recommending of the applicant for promotion to HAG is justified and cannot be interfered by this Tribunal.”

    18. Accordingly, this O. A. (No. 1462/2016) is dismissed and the interim order dated 15.12.2016 is vacated. No costs.

    ऐसी स्थिति में जब किसी अधिकारी को डीपीसी, एसीसी और अदालत सभी जगहों से डीआरएम सहित एचएजी पदोन्नति इत्यादि के लिए भी अयोग्य पाया और ठहराया गया हो, उसे प्रिंसिपल सीईई (विभाग प्रमुख या पीएचओडी) कैसे बनाया जा सकता है? अब यह देखना रेलवे बोर्ड और जोनल रेलवे प्रशासन का काम है कि एमटीआर जैसे कदाचारी अधिकारी अपनी कुटिल करतूतों में कामयाब न होने पाएं, क्योंकि उत्तर रेलवे में एक अन्य महाभ्रष्ट पीएचओडी, जो कि कथित रूप से एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री को पांच करोड़ का चढ़ावा चढ़ाकर आया है, की भ्रष्ट गतिविधियों और ऊल-जलूल हरकतों को लेकर रेलवे बोर्ड और जोनल प्रशासन न सिर्फ पहले से ही परेशान है, बल्कि मेंबर ट्रैफिक की अन्यमनस्कता के चलते चाहकर भी उसे अन्यत्र ट्रांसफर नहीं किया जा पा रहा है!

    ऐसे में रेलवे से भ्रष्टाचार समाप्त करने की लगातार दुहाई दे रहे रेलमंत्री और रेलवे की कार्य-प्रणाली में हर संभव सुधार लाने की भरसक कोशिशों में जुटे चेयरमैन रेलवे बोर्ड को चाहिए कि वह न सिर्फ घोषित कदाचारी एमटीआर की कुटिल करतूतों पर सभी संभावित लगाम लगाएं, बल्कि यदि वह उन्हें एमटीआर के पद से भी अन्यत्र शिफ्ट कर सकें, तो रेलवे के संपूर्ण विद्युत् विभाग को भ्रष्टाचार से मुक्त करने में भारी सफलता मिल सकती है. इसके अलावा रेलमंत्री यदि रेलवे से वास्तव में भ्रष्टाचार समाप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें चाहिए कि सीबीआई को फौरन निर्देश दें कि उसने कई साल पहले सेंट्रल हॉस्पिटल, उत्तर रेलवे के घोटाले से संबंधित मामले के साथ-साथ मेंबर ट्रैक्शन सहित अन्य रेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ लंबित सभी मामलों की जांच को जल्दी से जल्दी पूरा करे. इसके साथ ही प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के आवधिक तबादले के मामले में सीवीसी के समस्त दिशा-निर्देशों को अविलंब लागू किया जाए.

सम्पादकीय