रेल प्रशासन की मनमानी से डीएलडब्‍ल्‍यू के कर्मचारी उद्वेलित

    सुस्‍पष्‍ट और पारदर्शी नीति के अभाव में कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति

    रेलवे बोर्ड के अस्पष्ट एवं कपटपूर्ण रवैये से हजारों कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय

    डीजल इंजन निर्माण बंद करना था, तो डीरेका में 400 करोड़ का विस्‍तारीकरण क्‍यों किया गया?

    वाराणसी : रेलवे बोर्ड द्वारा डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (डीएलडब्‍ल्‍यू) के उत्‍पादन लक्ष्‍य को बार-बार और लगातार परिवर्तित करके भ्रम की स्थिति उत्पन्‍न की जा रही है. बोर्ड की सुस्पष्ट एवं पारदर्शी नीति के अभाव में डीएलडब्‍ल्‍यू को बंद कर देने की तरफ ढ़केला जा रहा है. इससे डीएलडब्‍ल्‍यू के हजारों कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होता नजर आ रहा है. यह आरोप डीएलडब्‍ल्‍यू कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव विष्णु देव दुबे ने डीएलडब्‍ल्‍यू के मुख्य कार्मिक अधिकारी (सीपीओ) को लिखे एक पत्र में लगाया है. उन्होंने इस पत्र की प्रतियां डीएलडब्‍ल्‍यू के महाप्रबंधक सहित मुख्‍य यांत्रिक अभियंता, श्रमायुक्‍त/कानपुर, उप श्रमायुक्‍त/वाराणसी और संपादक ‘रेलवे समाचार’ को भी प्रेषित की हैं.

    इस पत्र में उन्होंने कहा है कि रेलवे बोर्ड द्वारा वर्ष 2018-19 में डीएलडब्‍ल्‍यू के उत्पादन लक्ष्य को बार-बार परिवर्तित करने का लिखित एवं मौखिक आदेश जारी किया जा रहा है, जबकि यह सर्वविदित है कि इससे पहले डीएलडब्‍ल्‍यू को अगले दो-तीन वित्‍तीय वर्षों का उत्‍पादन लक्ष्‍य एक साथ और पूर्व निर्धारित करके मिलता रहा है और उसी के अनुसार डीएलडब्‍ल्‍यू द्वारा कल-पुर्जों की खरीद का एडवांस ऑर्डर दिया जाता रहा है, जिससे डीएलडब्‍ल्‍यू के पास निर्धारित समय पर कल-पुर्जे उपलब्‍ध रहा करते थे और निश्चिंतता के साथ इसके उत्‍पादन लक्ष्‍य को समय पर पूरा किया जाता रहा है.

    श्री दुबे का कहना है कि रेलवे बोर्ड द्वारा वर्ष 2018-19 और इससे आगे का उत्‍पादन लक्ष्‍य कई बार परिवर्तित करने से डीएलडब्‍ल्‍यू के कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. उन्होंने कहा कि 15 सितंबर को मेंबर ट्रेक्‍शन, रेलवे बोर्ड के साथ हुई बैठक में कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों को बताया गया कि वित्‍तीय वर्ष 2018-19 से ही विद्युत् लोको बनाने का आदेश दिया गया है और डीजल लोकोमोटिव के उत्‍पादन को बंद किया जा रहा है. बैठक में कर्मचारी परिषद के सदस्यों ने उन्हें लिखित एवं मौखिक रुप से विद्युत् लोको बनाने और अचानक डीजल लोको बंद करने से आने वाली समस्‍याओं से अवगत कराया गया था. तथापि, मेंबर ट्रैक्शन द्वारा सभी संभावित समस्‍याओं को दरकिनार करते हुए विद्युत् लोको उत्पादन लक्ष्य के संबंध में कोई भी स्‍पष्‍ट या सुनियोजित कार्य-योजना से पदाधिकारियों को अवगत नहीं कराया गया.

    श्री दुबे का कहना है कि डीरेका कर्मचारी परिषद मेंबर ट्रैक्शन द्वारा बताई गई कार्य-योजना से पूरी तरह से असहमत है. इसके अलावा स्थानीय डीरेका प्रशासन द्वारा भी कर्मचारियों को ऐसी किसी स्‍पष्‍ट कार्य-योजना से अब तक अवगत नही कराया गया है, जिससे डीरेका के सभी रेलकर्मी अपने भविष्‍य को लेकर चिंतित और आक्रोशित हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस तानाशाही और भ्रमित करने वाले रवैये का कर्मचारी परिषद पुरजोर विरोध करती है और इस विषय को लेकर परिषद द्वारा 3 से 6 अक्टूबर तक लगातार डीएलडब्‍ल्‍यू में धरना, प्रर्दशन एवं गेट मीटिंग का आयोजन किया जाएगा.

    उन्होंने कहा कि यदि डीरेका कर्मचारियों के भविष्‍य को लेकर डीरेका सहित इसके कर्मचारियों के हित में रेल प्रशासन द्वारा सुस्‍पष्‍ट एवं पारदर्शी कदम समय पर नहीं उठाया गया, तो वैसी विषम स्थिति में कर्मचारी परिषद बेमुद्दत हड़ताल पर भी जाने का विचार कर सकती है, जिसकी अग्रिम सूचना प्रशासन सहित सभी कर्मचारियों को दी जा रही है. उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि डीरेका कर्मचारियों की इस गंभीर चिंता का निवारण करते हुए रेल प्रशासन द्वारा उचित हस्‍तक्षेप करके इस समस्‍या का पूर्णकालीक समाधान अवश्‍य निकाला जाएगा. उनका कहना था कि डीरेका में औद्योगिक शांति का वातावरण बनाए रखने में ही सबकी भलाई है.

    कर्मचारियों ने डीरेका में डीजल लोकोमोटिव का निर्माण/उत्पादन बंद किए जाने का प्रबल विरोध करने का निर्णय लिया है. 28 सितंबर को कारखाना कैटिन में आयोजित एक बैठक में यह निर्णय लिया गया. इस बैठक में कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव विष्‍णु देव दुबे के नेतृत्‍व में डीरेका के डीजल लोकोमोटिव के टारगेट कम किए जाने पर चर्चा की गई. कर्मचारी परिषद के सभी सदस्यों के साथ ही डीएलडब्‍ल्‍यू मेंस यूनियन के अध्यक्ष एवं महामंत्री, डीएलडब्‍ल्‍यू मेंस कांग्रेस के अध्यक्ष एवं महामंत्री, डीएलडब्‍ल्‍यू मजदूर संघ के अध्यक्ष और महामंत्री, डीएलडब्‍ल्‍यू रेल मजदूर यूनियन के अध्यक्ष एवं महामंत्री, अन्‍य पिछड़ा वर्ग एसोशिएसन के अध्यक्ष एवं महामंत्री, अनुसूचित जाति एवं जनजाति एसोशिएसन के अध्यक्ष/महामंत्री और डीएलडब्ल्यू इंजीनियर्स एसोशिएसन के अध्यक्ष/महामंत्री भी उपस्थित थे.

    उक्त बैठक में चर्चा के मुख्‍य मुद्दे इस प्रकार थे-

    1. मढ़ौरा में नया डीजल इंजन कारखाना स्थापित किए जाने का औचित्य क्या है?

    2. अगर डीरेका में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव ही बनेंगे, तो मशीन शॉप का क्‍या होगा और हजारों करोड़ रुपये की लागत वाली सीएनसी मशीने कहां जाएंगी?

    3. यदि डीरेका में डीजल लोकोमोटिव को बंद ही करना था, तो रेल विकास निगम लि. द्वारा करीब 400 करोड़ रुपये का विस्‍तारीकरण क्‍यों किया गया, जबकि इसका उदघाटन प्रधानमंत्री ने किया था.

    4. जब विदेशों में डीजल इंजन ही ज्‍यादा चल रहे हैं, तो भारत में डीजल इंजन क्‍यों बंद किया जा रहा है? जबकि कनाडा में विधुतिकरण 0.28%, अमेरिका में 0.64%, ब्राजील में 18.5% तथा आस्ट्रेलिया में 7% है.

    5. जब चितरंजन रेल इंजन कारखाने को सप्लायर विद्युत् लोकोमोटिव के कल-पुर्जे और स्पेयर पार्ट्स नहीं सप्लाई कर पा रहे हैं, तब डीएलडब्ल्यू में विद्युत् इंजन बनाने के लिए कल-पुर्जे कौन दे पाएगा?

    6. भारत में जहां गावों और किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है और आज भी देश के 35% गावों तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, वहीं भारी मात्रा में विद्युत् इंजनों का निर्माण और रेलवे के संपूर्ण विद्युतीकरण पर जोर क्यों दिया जा रहा है?

सम्पादकीय