“पदोन्नति में आरक्षण : 40 लाख लोकसेवकों को मिलेगा न्याय”

    13 अगस्त 1997 का गैर-कानूनी और असंवैधानिक नोटिफिकेशन निरस्त

    गैर-कानूनी रूप से पदोन्नत हुए करीब 15 लाख लोकसेवकों की पदावनति निश्चित

    अहमदाबाद : देश में समान अधिकारों की मांग को लेकर पदोन्नति में आरक्षण के विरुद्व तथा जाति आधारित आरक्षण की समाप्ति के लिए आंदोलन कर रहे समता आंदोलन समिति के अध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा, सोमवार 2 अक्टूबर से गुजरात की यात्रा पर हैं. समता आंदोलन समिति, पश्चिम प्रकोष्ठ द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार श्री शर्मा यहां कई संगठनों से भेंट करेंगे और कुछ कार्यक्रमों को भी संबोधित करेंगे.

    समता आंदोलन समिति, पश्चिम प्रकोष्ठ के महामंत्री गजेंद्र सोती और अध्यक्ष विकास श्रीवास्तव द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि ‘वर्ष 1997 से पदोन्नति में आरक्षण समाप्त हो चुका है. अब केंद्र सरकार के 40 लाख लोकसेवकों को न्याय मिल सकेगा.’

    उन्होंने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायलय ने 23 अगस्त 2017 को दिए निर्णय में केंद्र सरकार के सभी विभागों और उपक्रमों में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था करने वाले डीओपीटी द्वारा दि. 13 अगस्त 1997 को जारी नोटिफिकेशन को गैर-कानूनी और असंवैधानिक होने के कारण निरस्त कर दिया है.

    उनका कहना है कि इसी आदेश में 1997 के उक्त नोटिफिकेशन के आधार पर जिन अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोकसेवकों को आरक्षण के आधार पर पदोन्नतियां दी गई थीं, वह सभी पदोन्नतियां भी दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा निरस्त कर दी गई हैं. इस प्रकार पिछले 20 वर्षों के दौरान गैर-कानूनी रूप से पदोन्नत हुए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लगभग 15 लाख लोकसेवकों की पदावनति निश्चित है.

    उन्होंने कहा कि अधिकांश अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोकसेवक गैर-कानूनी रूप से दो से चार पदोन्नतियां तक ले चुके हैं. परंतु अब अदालत के निर्णय के बाद लगभग 40 लाख सामान्य वर्ग (अनारक्षित) के लोकसेवकों को न्याय मिलेगा तथा उन्हें पिछली तारीखों से पदोन्नतियां एवं अन्य लाभ मिले सकेंगे. उन्होंने सभी सामान्य वर्ग के सभी लोकसेवकों से आरक्षण की दोहरी और गैर-कानूनी तथा असंवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष हेतु खुलकर सामने आने और समता आंदोलन में शामिल होने का भी आहवान किया है.

सम्पादकीय