सीआरबी/रेलमंत्री बदलकर सरकार ने सुधारी अपनी गलती

    बंगलों के साथ कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को भी फील्ड में भेजा जाए

    कुछ अहंमन्य अधिकारी अब भी कर रहे हैं सीआरबी के निर्देशों का उल्लंघन

    निर्देश जारी करके उनका जमीनी स्तर पर अमल सुनिश्चित कराना ज्यादा जरुरी

    अरुणेंद्र कुमार ने भ्रष्ट रवैये और ए.के.मितल ने भंडारवाद से भा.रे. का भट्ठा बैठाया

    सुरेश त्रिपाठी

    उत्तर रेलवे, दिल्ली मंडल के दिल्ली-सहारनपुर ब्रॉड गेज विद्युतीकृत खंड के सिंगल लाइन सेक्शन में खतौली-मंसूरपुर स्टेशनों के बीच किमी. संख्या 101/3-4 के पास 19 अगस्त को 17.47 बजे गाड़ी संख्या 18477, पुरी-हरिद्वार कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस की भयानक दुर्घटना में पूरी ट्रेन न सिर्फ डिरेल हुई, बल्कि उसके कई डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़कर बुरी तरह चकनाचूर भी हुए. इस घटना में 23 से ज्यादा यात्री असमय काल-कवलित और सैकड़ों घायल हुए. उसी दिन ‘रेलवे समाचार’ ने इस दुर्घटना पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए ‘रेलवे की मूलभूत नीतियों से रेलमंत्री का कोई सरोकार नहीं’ शीर्षक से लिखे गए लेख में जो-जो समस्याएं बयान की थीं और रेलमंत्री सहित सीआरबी का इस्तीफा मांगा था, वह सब फलीभूत हुआ. इसके लिए सरकार और प्रधानमंत्री साधुवाद के पात्र हैं.

    इसके अलावा सरकार और प्रधामंत्री इसके लिए भी साधुवाद के पात्र हैं कि ‘रेलवे समाचार’ ने ही 23 अगस्त को एक सुझाव देते हुए प्रधानमंत्री को जो ट्वीट किया था कि ‘यदि बुरी तरह से हतोत्साहित भारतीय रेल में त्वरित प्रभाव से उत्साह का संचार करना है, और जनता के बीच रेलयात्रा को लेकर पैदा हुई असुरक्षा की भावना को दूर करते हुए उसके अंदर भरोसा पैदा करना है, तो अश्वनी लोहानी को अविलंब वापस रेलवे बोर्ड में बतौर सीआरबी लाया जाए.’

    प्रधानमंत्री ने इस सुझाव पर भी तत्काल अमल किया. इसके बाद दूसरे दिन सरकारी प्रक्रिया का चक्र तेजी से घूमा और श्री लोहानी ने दोपहर बाद सीआरबी का पदभार ग्रहण कर लिया. श्री लोहानी के पदभार ग्रहण के बाद नए रेलमंत्री के रूप में पीयूष गोयल की नियुक्ति से वास्तव में समस्त रेलकर्मियों एवं अधिकारियों सहित जनता में भी सकारात्मक संदेश गया है. अब भले ही उनके कुछ मूढ़-धन्य विरोधी उन्हें एक सफल मैनेजर और सरकारी संपत्तियों का विक्रेता कहकर उनके विरुद्ध दुष्प्रचार करके अपनी दुर्भावना प्रकट कर रहे हैं, उससे उनकी काबिलियत और योग्यता पर कोई आंच नहीं आने वाली है.

    पिछले लगभग पंद्रह दिनों के दरम्यान भारतीय रेल में परिवर्तन का चक्र बहुत तेजी से घूमा है और सरकार द्वारा बिगड़ी हुई चीजों को ठीक करने के प्रयास में देश की जनता के अंदर रेलयात्रा के प्रति पैदा हुई असुरक्षा की भावना को शमित करने की कोशिश युद्ध स्तर पर की गई है. सीआरबी अश्वनी लोहानी के रूप में रेलवे बोर्ड को एक सक्षम, काबिल और सर्वथा योग्य अधिकारी की प्राप्ति हुई है. इसी प्रकार रेलमंत्री के रूप में स्पष्ट सोच रखने वाले पीयूष गोयल को लाया गया. इस प्रकार सरकार ने एक अक्षम अधिकारी को सीआरबी बनाने और एक जमीन से कटे हुए प्रचार-लोलुप नेता को रेल मंत्रालय सौंपे जाने के गलत निर्णय को बहुत सही तरीके से ठीक कर लिया.

    पदभार संभालने के तुरंत बाद रेलमंत्री और सीआरबी ने बिगड़ी हुई चीजों को ठीक करने के लिए उपरोक्त दुर्घटना से संबंधित 13 रेलकर्मियों को नौकरी से तत्काल बर्खास्त करके अपनी स्पष्ट सोच का परिचय भी दे दिया है. इसके साथ ही सीआरबी ने तत्काल कई आवश्यक निर्देश जारी किए, जिससे बुरी तरह हतोत्साहित हो चुके और लगभग अपमानित महसूस कर रहे रेलकर्मियों एवं अधिकारियों में उत्साह का संचार हुआ है. अब जरुरत इस बात की है कि जारी किए गए निर्देशों पर जमीनी अमल सुनिश्चित करवाया जाए.

    1. सीआरबी के निर्देश पर इंजीनियरिंग विभाग के ज्यादातर रेलकर्मी घरों से निकाल लिए गए हैं. परंतु उनके निर्देश का गलत अर्थ निकालते हुए कार्यालयों में बैठे हुए फील्ड कर्मचारियों को नहीं निकाला गया है. कार्यालयों में बैठाए गए फील्ड कर्मचारियों को भी उनकी निर्धारित ड्यूटी पर लगाया जाए.

    2. पश्चिम रेलवे, मुंबई सेंट्रल मंडल के चार एसएसई/पी-वे ने घरों से करीब 40-50 रेलकर्मी निकाले हैं, परंतु इन्हीं के दफ्तरों में 300 से भी ज्यादा ट्रैकमैन अभी-भी बैठे हुए हैं, उन्हें भी निकालकर फील्ड में भेजा जाए.

    3. सीआरबी के निर्देश का गलत अर्थ निकाला गया, इसीलिए सिर्फ घरों में लगे रेलकर्मियों को निकाला गया है, दफ्तरों से नहीं, इससे तमाम कर्मचारियों में असंतोष भी पैदा हो रहा है. अतः उन्हें भी निकाला जाए.

    4. सीआरबी के निर्देश का गलत अर्थ निकाला गया, इसीलिए सिर्फ इंजीनियरिंग विभाग के रेलकर्मी घरों से निकाले गए, अन्य विभागों यह कहकर इस पर अमल नहीं किया कि उनके लिए उक्त आदेश नहीं है. अतः आदेश को पुनः स्पष्ट करते हुए नए निर्देश दिए जाएं.

    5. डिप्टी सीवीओ/इंजी./पूर्वोत्तर रेलवे आकाश गुप्ता के घर पर 24 घंटे 16 रेलकर्मी अभी-भी लगे हैं. इसी प्रकार एडीईएन/ऐशबाग, लखनऊ आर. के. मिश्रा के घर पर 10 रेलकर्मी लगे हुए हैं. इन्हें निकालने की हिम्मत कोई क्यों नहीं कर रहा.

    उल्लेखनीय है कि आकाश गुप्ता ने डिप्टी सीवीओ बनने के बाद से अब तक इज्जतनगर मंडल में विजिलेंस का एक भी मामला नहीं बनाया है, क्योंकि वर्तमान पद पर आने से पहले वह इज्जतनगर निर्माण में ही कार्यरत थे. जबकि वरिष्ठ वेतनमान के एक सीधी भर्ती अधिकारी से पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगने का भी उनके खिलाफ गंभीर आरोप है. इसी प्रकार एडीईएन/ऐशबाग, लखनऊ आर. के. मिश्रा भ्रष्ट तरीके से अधिकारी बनने से पहले ऐशबाग में ही एसएसई/वर्क्स हुआ करते थे. यूनियन की मेहरबानी से उनकी पदोन्नति उसी जगह कर दिए जाने से नियम एवं परंपरा का उल्लंघन तो हुआ ही है, बल्कि अब तक ट्रैकमैनों/चपरासियों के साथ शाम की ‘बैठक’ कर रहे हैं, जिससे अव्यवस्था फैल रही है.

    6. इंजीनियरिंग विभाग के कुछ मूर्ख अधिकारी यह झूठ फैला रहे हैं कि सीआरबी चूंकि मैकेनिकल के हैं, इसीलिए उन्होंने सिर्फ इंजीनियरिंग विभाग के लोगों को घरों से निकाला!

    7. इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, एसएंडटी, कंस्ट्रक्शन, कमर्शियल, ऑपरेटिंग, पर्सनल, स्टोर्स, एकाउंट्स और आरपीएफ इत्यादि सभी विभागों के अधिकारियों के घरों/दफ्तरों में फील्ड के रेलकर्मी कार्यरत हैं, उन्हें भी अविलंब निकाला जाए.

    8. यदि दफ्तरों के कामकाज हेतु आवश्यक स्टाफ की कमी है, तो उसकी भर्ती की जाए, मगर फील्ड के ट्रेंड स्टाफ का इस्तेमाल फील्ड में ही किया जाए.

    9. कुछ अधिकारी लंबे-चौड़े बंगले में परिवार के असुरक्षित होने के बहाने अतिरिक्त स्टाफ के इस्तेमाल का कुतर्क कर रहे हैं. यह मूर्खतापूर्ण सोच है.

    10. तमाम निर्देश एक साथ जारी करने के बजाय एक-एक पर पहले अमल सुनिश्चित कराया जाए और इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं.

    11. बतौर सीआरबी पहले अरुणेंद्र कुमार ने अपने भ्रष्ट रवैये से और बाद में ए. के. मितल ने अपने भंडारवाद के चलते भारतीय रेल का बेड़ा गर्क किया और पूरी व्यवस्था का भट्ठा बैठा दिया. अब सुधार की कोशिश में मीनमेख निकाल रहे कुछ मूर्ख अधिकारियों को उचित शिक्षा दी जानी चाहिए.

सम्पादकीय