ट्रैकमैनों के बर्खास्तगी के विरोध में रेलकर्मियों का काला दिवस

    संरक्षा श्रेणी के सुपरवाइजरों को यूनियन पदों से विलग किया जाए -कैडर संगठन

    नई दिल्ली : ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के आहवान पर खतौली रेल दुर्घटना से संबंधित 13 रेलकर्मियों की सेवा से बर्खास्तगी के विरोध में एआईआरएफ से संबद्ध सभी जोनल संगठनों ने पूरी भारतीय रेल पर सोमवार, 4 सितंबर को काला दिवस मनाया. एआईआरएफ द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि 19 अगस्त को उत्तर रेलवे के खतौली के पास कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की दुर्घटना में बिना किसी जांच के 12 ट्रैकमैनों और 1 कनिष्ठ अभियंता को बर्खास्त करने के विरोध में पूरी भारतीय रेल पर रेलकर्मियों ने काला फीता बांधकर धरना/प्रदर्शन का आयोजन करके अपना रोष व्यक्त किया.

    एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने उक्त दुर्घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते और 23 रेलयात्रियों की मौत पर दुख प्रकट करते हुए सभी ट्रैकमैनों के रिमूवल की निंदा की. उन्होंने कहा कि रिमूवल से पहले, जैसा कि नियम है, इस मामले की जांच करवाई जाती, बिना जांच के ही कर्मचारियों को निलंबित और बर्खास्त करना कहां का न्याय है?

    श्री मिश्रा ने कहा कि रेलकर्मी दिन-रात एक कर रेल को सुरक्षित चलाने का प्रयास करते हैं. आज सभी भारतीय रेलों पर ट्रैकमैनों के बिना किसी जांच के रिमूवल के विरोध में भारी संख्या में रेलकर्मी एक होकर अपना रोष व्यक्त कर रहे हैं. उन्होंने इस दुर्घटना के लिए रेल प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए रेलों में खाली पड़े पदों को शीघ्र भरने की मांग की और रेलवे मे ठेकेदारी, निजीकरण तथा निगमीकरण पर रोक लगाने की अपील की. उन्होंने कहा कि जब तक पर्याप्त संख्या में रेलकर्मी नहीं होंगे, तब तक रेल को सुरक्षित चलाना असंभव है.

    एआईआरएफ एवं नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री कॉमरेड शिवगोपाल मिश्रा ने खतौली रेल दुर्घटना में बिना किसी जांच के ट्रैकमैनों को बर्खास्त किए जाने को एकतरफा तानाशाही निर्णय बताया, जिसके विरुद्ध उत्तर रेलवे के जम्मू, कालका, पठानकोट, भठिंडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, प्रतापगढ़ सहित अन्य कई जगहों पर काला दिवस मनाया गया. रेल अधिकारियों और सरकार की लोकतांत्रिक शक्तियों पर हमले के खिलाफ शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन किया गया. सभी कर्मचारियों ने अपनी वर्दी पर काला फीता बांधकर प्रदर्शन किया. कॉम. मिश्रा का कहना है कि ट्रैकमैन भारतीय रेल के सच्चे प्रहरी हैं, इन्हें नौकरी से निकालकर सुरक्षित रेल संचालन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. सही मायने में देखा जाए तो गैंगमैन ही सुरक्षित रेल यात्रा का पैरोकार है. जब तक इन्हें दुबारा रेल परिवार में शामिल नहीं किया जाता, तब तक ये धरना-प्रदर्शन चलता रहेगा.

    सीवीसी की गाइडलाइन्स अविलंब लागू की जाएं

    तथापि, कई कैडर संगठनों का कहना है कि मान्यताप्राप्त संगठन प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इस तरह का दिखावा करके न सिर्फ अपनी झेंप मिटाते हैं, बल्कि तमाम रेलकर्मियों को बरगलाने का भी प्रयास करते हैं, जबकि इन्हीं की वजह से कई रेलकर्मी रेलवे का तिनका भर भी काम नहीं करते हैं, बल्कि इनके वरदहस्त के चलते निकम्मेपन और भ्रष्टाचार का शिकार हुए हैं. उन्होंने कहा कि मान्यताप्राप्त संगठन सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए संरक्षा श्रेणी के सुपरवाइजरों को संगठनों के पदों से हटाने के रेल प्रशासन के निर्णय को विलंबित करवा रहे हैं और प्रशासन भी अनावश्यक रूप से इनके दबाव में आ जाता है. उनका यह भी कहना है कि रेल प्रशासन द्वारा सीवीसी की गाइडलाइन्स को बिना किसी की परवाह किए अविलंब लागू किया जाना चाहिए, जिससे ट्रांसफर/पोस्टिंग में न सिर्फ तमाम भ्रष्टाचार खत्म होगा, बल्कि काम की गुणवत्ता में व्यापक प्रगति होगी.

सम्पादकीय