स्टेशन मास्टरों ने ‘दो मिनट रेल रोको हड़ताल’ का मनाया 20वां स्मृति दिवस

    समय के साथ बहुत मजबूत होकर उभरी है ‘ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन’

    कल्याण : ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (ऐस्मा) ने 11 अगस्त 1997 को पूरी भारतीय रेल में ‘दो मिनट ट्रेन रोको हड़ताल’ का 20वां स्मृति दिवस शुक्रवार, 11 अगस्त 2017 को कल्याण रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नं.-1 पर स्थित स्टेशन मास्टर कक्ष में मनाया. इस अवसर पर मुंबई मंडल, मध्य रेल के लगभग 80 से ज्यादा स्टेशन मास्टर पूरे उत्साह के साथ उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मंडल मंत्री और सेवानिवृत्त स्टेशन मास्टर बी. आर. मजूमदार ने की. इस मौके पर कार्यक्रम के आयोजक स्टेशन मास्टर, कल्याण एवं पूर्व जोनल महामंत्री पी. के. दास, नेशनल रेलवे मजदूर यूनियन (एनआरएमयू) के सह-महामंत्री एवं ऐस्मा के पूर्व मंडल मंत्री विवेक नायर, जोनल महामंत्री डी. एस. अरोरा, वर्तमान मंडल अध्यक्ष जी. डी. बरनवाल और मंडल मंत्री डी. के. सिंह सहित उप स्टेशन अधीक्षक, दिवा ए. के. श्रीवास्तव एवं उप स्टेशन अधीक्षक, ठाणे सुश्री अपर्णा देवधर मोडक भी उपस्थित थीं.

    कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने स्टेशन मास्टरों द्वारा 11 अगस्त 1997 को पूरी भारतीय रेल में की गई ‘दो मिनट ट्रेन रोको हड़ताल’ के दिन की स्मृतियों को ताजा किया. उन्होंने कहा कि वह बहुत कठिन समय था. हड़ताल का नेतृत्व कर रहे स्टेशन मास्टरों को प्रशासन ने हर तरह से उत्पीड़ित करने का प्रयास किया था. उन्होंने बताया कि उस समय प्रशासन इस मुगालते में था कि दो मिनट गाड़ियां रोके जाने से रेल परिचालन और गाड़ियों के समयपालन पर इस हड़ताल का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. परंतु जब वास्तव में पूरे देश में सभी चलती ट्रेनों को जहां का तहां दो मिनट के लिए रोक दिया गया, तो पूरे देश में गाड़ियों का सारा क्रम गड़बड़ा गया और इससे उस दिन ट्रेनों की समस्त पंक्चुअलिटी ध्वस्त हो गई थी. उन्होंने कहा कि ‘ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन’ समय के साथ बहुत मजबूत होकर उभरी है.

    एनआरएमयू के सह-महामंत्री एवं ऐस्मा के पूर्व मंडल मंत्री विवेक नायर ने इस अवसर पर उपस्थित स्टेशन मास्टरों को संबोधित करते हुए उस अद्वितीय एवं अभूतपूर्व संघर्ष वाले दिन को गहराई से याद किया. उन्होंने कहा कि ‘ऐस्मा’ ही वास्तव भारतीय रेल सभी स्टेशन मास्टरों की प्रतिनिधि संस्था है. इसके सक्षम नेतृत्व ने अपने समर्पण और कठिन परिश्रम से स्टेशन मास्टरों को उनका अधिकार दिलाने में भारी सफलता हासिल की है. उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग से स्टेशन मास्टरों को जो कुछ भी हासिल हुआ है, वह ‘ऐस्मा’ नेतृत्व द्वारा आयोग के समक्ष मजबूती से स्टेशन मास्टरों का पक्ष प्रस्तुत किए जाने के कारण ही संभव हो पाया है. कॉम. नायर ने कहा कि उस समय वह ‘ऐस्मा’ के मुंबई मंडल मंत्री थे, और वह समझते हैं कि उन्होंने स्टेशन मास्टर कैडर को संगठित करने के लिए अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया था.

    A day after meeting Com. Vivek Nair written on his Facebook wall- Yesterday, it was 11.8.2017, the 20th commemorative day of the stay in strike held on 11.8.1997, by AISMA a representative Association of Station Masters of the country. I was chosen to lead that unparalleled and unprecedented struggle movement as the Divisional Secretary of AISMA and I believe, I have discharged my assignment with utmost commitment to organize the cadre, strategize the movement and its execution with unstinted support of my cadre comrades. The unbelievable success of the agitation in terms of its disarrayed and disorganized traffic of train movements, the harsh negotiation that led to zero victimization has paved the way to establish and expose the identity of Station Masters and their issues.

    I thank the present leadership of AISMA who remembered me on this occasion and extended their special invitation to attend the celebrating function and given me a chance to share the antecedents of that strike in detail and to remind the Masters about challenges that the labour force of the country being faced by the neoliberal policies unleashed recklessly and aggressively getting implemented.

    इस अवसर के निमित्त खतौर पर उप स्टेशन अधीक्षक, दिवा ए. के. श्रीवास्तव द्वारा आजादी पर सुप्रसिद्ध फिल्मी गीत ‘जरा याद करो कुरबानी’ की तर्ज पर लिखी गई कविता का सस्वर पाठ उप स्टेशन अधीक्षक, ठाणे सुश्री अपर्णा देवधर मोडक ने किया, जिसने बाद की पीढ़ी के स्टेशन मास्टरों को भी न सिर्फ उस समय के संघर्ष की याद दिला दी, बल्कि उनके अंदर भारी जोश भी पैदा कर दिया.

    जरा याद करो कुरबानी..

    स्टेशन मास्टर साथियो, जरा आंख में भर लो पानी
    बरखास्त हुए जो उनकी, जरा याद करो कुरबानी..

    जब अड़ियल हुआ प्रशासन, और करने लगा मनमानी
    तब मजबूरी में हमको, रेल पड़ी थी रुकवानी
    जब रेल को लकवा मारा, ताकत अपनी पहचानी
    बरखास्त हुए जो उनकी, जरा याद करो कुरबानी..

    दिल्ली हो या कोलकाता, वो मुंबई हो या चैन्नई
    गाड़ी को रुकाने वाला, हर शख्स था अपना भाई
    क्या जोश था यारो उनमें, क्या मास्टर थे वो अभिमानी
    बरखास्त हुए थे जो उनकी, जरा याद करो कुरबानी..

    हर इक सिग्नल पर दो मिनट, हर इक गाड़ी को रुकाया
    जब थम गया रेल का चक्का, प्रशासन होश में आया
    वो झुका अपने घुटनों पर, फिर बंद हुई मनमानी
    बरखास्त हुए थे जो उनकी, जरा याद करो कुरबानी..

    कई मास्टर अरेस्ट हुए थे, तो कई सस्पेंड हुए थे
    जब अरेस्ट वारंट था निकला, कई अंडर ग्राउंड हुए थे
    तुम भूल न जाओ उनको, इसलिए सुनो ये कहानी
    बरखास्त हुए थे जो उनकी, जरा याद करो कुरबानी..

सम्पादकीय