जोखिम एवं कठिनाई भत्ता मिलने से ट्रैक मेंटेनरों में खुशी की लहर

    ‘रेलवे कर्मचारी ट्रैक मेंटेनर एसोसिएशन’ ने प्रधानमंत्री एवं रेलमंत्री का आभार व्यक्त किया

    राउरकेला : भारत सरकार, रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) ने सातवें वेतन आयोग की ट्रैकमैनों से संबंधित जोखिम एवं कठिनाई भत्ते की सिफारिश को मंजूरी देते हुए 10 अगस्त को सभी जोनल रेलों के महाप्रबंधकों और सभी अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र (सं. पीसी-7/2017/1/7/5/4) जारी करके अंततः यह भत्ता प्रदान किए जाने का आदेश दे दिया है. इससे भारतीय रेल के समस्त ट्रैकमैनों में खुशी की लहर दौड़ गई है. उक्त पत्र में कहा गया है कि ‘भत्तों के संबंध में सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार किए जाने के परिणामस्वरूप राष्ट्रपति ने जोखिम तथा कठिनाई मैट्रिक्स के सेल आर3एच2 के अनुसार भारतीय रेलों के सभी रेलपथ मेंटेनरों-1/2/3/4 को जोखिम तथा कठिनाई भत्ता (लेवल 8 और इससे नीचे के लेवल के लिए 2700 रु. और लेवल 9 एवं उससे ऊपर के लेवल के लिए 3400 रु. सहर्ष प्रदान करने का निर्णय लिया है.’ यह आदेश 1 जुलाई 2017 से लागू हो गया है.

    भारतीय रेल के 16 जोनों के सभी ट्रैक मेंटेनर्स को जोखिम एवं कठिनाई भत्ते (हार्ड ड्यूटी एंड रिस्क अलाउंस) के रूप में 2700 रु. प्रतिमाह दिए जाने की घोषणा और सियाचिन में तैनात भारतीय सेना के जवानों के साथ ट्रैक मेंटेनर की तुलना करके सरकार द्वारा उन्हें सम्मान के साथ ही सातवें वेतन आयोग की इस सिफारिश को 1 जुलाई 2017 से लागू करने के लिए ‘रेलवे कर्मचारी ट्रैक मेंटेनर एसोसिएशन-ऑल इंडिया’ (आरकेटीए) से जुड़े सभी ट्रैक मेंटेनर्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेलमंत्री सुरेश प्रभु, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री जुएल ओराम, केंद्रीय वित राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल, पूर्व मुख्यमंत्री, कर्नाटक वाई. एस. येदुरप्पा, पूर्व केंद्रीय मंत्री/विधायक, राउरकेला एवं आरकेटीए के राष्ट्रीय संरक्षक दिलीप राय का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है.

    आरकेटीए द्वारा जारी धन्यवाद प्रस्ताव में कहा गया है कि इस सफलता को पाने के लिए आरकेटीए के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. रवि, राष्ट्रीय महामंत्री जी. गणेश्वर राव के कुशल नेतृत्व में ट्रैक मेंटेनर्स ने अपना अधिकार पाने के लिए पूरे देश में जगह-जगह घूमकर ट्रैकमैनों को जागृत किया और चेन्नई से दिल्ली और मुंबई से गुवाहाटी तक लगातार धरना-प्रदर्शन तथा रैलियों के माध्यम से ट्रैकमैनों की मांग और आवाज सरकार एवं रेलवे बोर्ड तक पहुंचाई गई. इस मांग के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर दो बार आरकेटीए ने विशाल धरना और मोर्चा निकालकर अपनी जायज मांग के साथ ही अपनी संगठित शक्ति का भी प्रदर्शन किया था.

    ट्रैकमैनों के संघर्ष और उनकी एकजुटता के परिणामस्वरूप सातवें वेतन आयोग से उन्हें 2700 से 3400 रु. प्रतिमाह जोखिम एवं कठिनाई भत्ते के साथ ही प्रतिवर्ष 5000 रु. वर्दी भत्ता देने का भी निर्णय हुआ है. इसके साथ ही गेटकीपर की ड्यूटी 8 घंटे की गई. जबकि कुछ जोनों में एलडीसीई/जीडीसीई की भी शुरुआत हो चुकी है. राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. रवि एवं राष्ट्रीय महामंत्री गणेश्वर राव ने कहा कि सरकार ने उनकी तीन मांगें पूरी करके भारतीय रेल के समस्त ट्रैकमैनों को गौरवान्वित किया है. इसके लिए सभी 16 जोनों के समस्त ट्रैक मेंटेनर सभी सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट करते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ मांगें अभी बाकी हैं, जिनके लिए आरकेटीए का संघर्ष जारी रहेगा.

    इस अवसर पर महामंत्री/पूर्व मध्य रेलवे राजेश कुमार, महामंत्री/दक्षिण पूर्व रेलवे एन. एन. चटर्जी, महामंत्री/उत्तर पश्चिम रेलवे राजेन्द्र गुजर, महामंत्री/पूर्वोत्तर रेलवे सुनील कुमार, महामंत्री/पूर्व तट रेलवे व्योमेश्वर राव, महामंत्री/उत्तर रेलवे उत्तम सिंह मीना, महामंत्री/दक्षिण पश्चिम रेलवे महेश एस., महामंत्री/उत्तर मध्य रेलवे दिलीप कुमार, महामंत्री/पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे सुधीर कुमार, महामंत्री/पश्चिम मध्य रेलवे हेमंत राठौर, महामंत्री/मध्य रेलवे रमाशंकर प्रसाद, महामंत्री/दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नरेश त्रिवेदी इत्यादि जोनल पदाधिकारियों ने भी अपने राष्ट्रीय नेतृत्व एवं समस्त सहयोगियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अपना आभार प्रकट किया है

सम्पादकीय