‘माफिया यूनियन’ के हाथ की पुनः कठपुतली बना दक्षिण रेलवे

    दूसरी बार जीएम तक पहुंची सीनियर डीसीएम/चेन्नई की ट्रांसफर फाइल

    सीसीएम प्रियंवदा स्वामीनाथन बता रही हैं ट्रांसफर का ‘एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन’

    दक्षिण रेलवे के बढ़ते ऑपरेटिंग रेश्यो और घटती पंक्चुअलिटी से अंजान जीएम

    सक्सेना के रिटायर होते ही ‘माफिया यूनियन’ की उंगलियों पर नाचने लगे अधिकारी

    ‘माफिया यूनियन’ की ज्यादतियों से दक्षिण रेलवे को बचाने का संकल्प ले रेलवे बोर्ड!

    सुरेश त्रिपाठी

    दक्षिण रेलवे का प्रशासन पूर्व सीसीएम अजीत सक्सेना के रिटायर होते ही पुनः ‘माफिया यूनियन’ के हाथों की कठपुतली बन गया है. यदि ऐसा नहीं होता, तो वह अपने बढ़ते ऑपरेटिंग रेश्यो और लगातार घटती पंक्चुअलिटी की तरफ ध्यान देने के बजाय माफिया यूनियन की उंगलियों पर नहीं नाच रहा होता. ‘रेलवे समाचार’ को अपने विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दक्षिण रेलवे की गाड़ियों का समयपालन (पंक्चुअलिटी) रसातल में जा चुका है, जबकि इसका ऑपरेटिंग रेश्यो लगभग 20 अंक बढ़ गया है. यह करिश्मा सिर्फ चार महीनों में हुआ है. यही नहीं, दक्षिण रेलवे की अधिकृत वेबसाइट भी समय पर अपडेट नहीं हो रही है. मगर दक्षिण रेलवे के अधिकारी माफिया यूनियन के सही-गलत कार्यों को एक फिर मुश्तैदी से अंजाम देने के लिए मजबूर हो गए हैं.

    जानकारों का कहना है कि यदि दक्षिण रेलवे प्रशासन माफिया यूनियन की उंगलियों पर नहीं नाच रहा होता, तो अजीत सक्सेना के रिटायर होने के मात्र चार महीने बाद ही पुनः सीनियर डीसीएम/चेन्नई वी. रविचंदर का अकारण और असमय ट्रांसफर नहीं किया जा रहा होता. ‘रेलवे समाचार’ को अपने विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीसीएम द्वारा प्रस्तावित श्री रविचंदर के दूसरी बार ट्रांसफर की फाइल सीओएम से होते हुए जीएम तक पहुंच गई है और जीएम वशिष्ठ जौहरी भी अपने रिटायरमेंट के मात्र कुछ सप्ताह बचे होने के बावजूद माफिया यूनियन की उंगलियों पर नाचने के लिए मजबूर बताए जा रहे हैं. यही हाल दक्षिण रेलवे के लगभग सभी अधिकारियों का भी है. सूत्रों का यह भी कहना है कि दक्षिण रेलवे के अधिकारियों से लेकर रेलवे बोर्ड के भी वाणिज्य एवं परिचालन निदेशालय के संबंधित अधिकारियों तक में इस बात की गहन चर्चा हो रही है कि माफिया यूनियन ने उक्त ट्रांसफर के लिए लाखों रुपये खर्च किए हैं?

    यदि ऐसा नहीं है, तो जीएम वशिष्ठ जौहरी ने ‘रेलवे समाचार’ की कॉल का रिस्पांस क्यों नहीं किया? उन्होंने ‘रेलवे समाचार’ द्वारा भेजे गए एसएमएस का जवाब देना जरूरी क्यों नहीं समझा? ‘रेलवे समाचार’ उनसे सिर्फ यही जानना चाहता था कि आखिर रविचंदर के असमय ट्रांसफर का औचित्य क्या है? क्या उनका कार्यकाल पूरा हो गया है? क्या चेन्नई मंडल की वाणिज्य आय घट गई है? क्या वह अपने उच्च अधिकारियों के साथ उचित व्यवहार नहीं कर रहे हैं? क्या डीआरएम/चेन्नई ने उनके ट्रांसफर की मांग की है? वह (जीएम श्री जौहरी) अपने रिटायरमेंट में मात्र छह हप्ते बचे होने के बावजूद सीनियर डीसीएम/चेन्नई के असमय ट्रांसफर का पाप अपने सिर क्यों ले रहे हैं? इस खेल के पीछे आखिर कौन है और उन पर किसका दबाव काम कर रहा है? कृपया उपरोक्त सवालों का जवाब दें और यह स्पष्ट करें कि इस असमय ट्रांसफर का औचित्य क्या है? वरना यह माना जाएगा कि इस पूरे खेल के पीछे उन पर और रेलवे बोर्ड दोनों पर माफिया यूनियन का अनैतिक दबाव काम कर रहा है?

    जीएम/द.रे. वशिष्ठ जौहरी ने जब उपरोक्त में से किसी सवाल का जवाब देना अथवा एसएमएस के जवाब में कुछ भी स्पष्ट करना जरूरी नहीं समझा, तब इन्हीं सवालों के साथ ‘रेलवे समाचार’ ने सीसीएम/द.रे. सुश्री प्रियंवदा स्वामीनाथन को कॉल किया. सर्वप्रथम उनका कहना था कि इस तरह से सवाल पूछने का लहजा उन्हें पसंद नहीं आया है और वह इन सवालों का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं, क्योंकि ‘मीडिया’ को ऐसे सवालों का जवाब देना जरूरी नहीं है. तथापि, जब उन्हें यह समझाया गया कि चूंकि सीनियर डीसीएम/चेन्नई की वह ‘प्रशासनिक बॉस’ हैं और उनके ट्रांसफर का प्रस्ताव उन्होंने ही तैयार किया है, इसलिए उन्हें जवाब तो देना पड़ेगा. इस पर सीसीएम सुश्री प्रियंवदा स्वामीनाथन ने कहा कि वह सिर्फ इतना ही कह सकती हैं कि सीनियर डीसीएम/चेन्नई का ट्रांसफर ‘एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन’ (प्रशासनिक कारणों) से किया जा रहा है.

    इस पर जब उनसे यह कहा गया कि आखिर यह ‘एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन’ क्या बला है, वही तो जानना है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह बताना जरूरी नहीं है. इस पर जब पुनः उनसे यह कहा गया कि इस तथाकथित ‘एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन’ की आड़ में आप नियम के उल्लंघन के साथ ही किसी अधिकारी का असमय ट्रांसफर करके उसका उत्पीड़न कैसे कर सकती हैं? इसके साथ ही फिर से उपरोक्त सवाल उन्हें दोहराए गए, कि ‘रेलवे समाचार’ उनसे सिर्फ यही जानना चाहता था कि आखिर सीनियर डीसीएम/चेन्नई के असमय ट्रांसफर के पीछे का असली कारण क्या है? क्या उनका कार्यकाल पूरा हो गया है? क्या चेन्नई मंडल की वाणिज्य आय घट गई है? क्या वह अपने उच्च अधिकारियों या उनके साथ उचित व्यवहार नहीं कर रहे हैं? क्या डीआरएम/चेन्नई ने उनके ट्रांसफर की मांग की है? जाहिर है कि इन सवालों के जवाब में सीसीएम माफिया यूनियन के दबाव का असली कारण तो बता नहीं सकती थीं, अतः उक्त सवालों को पुनः सुनते ही उन्होंने कॉल समाप्त कर दिया.

    अब इस पूरे मामले पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु और मेंबर ट्रैफिक रेलवे बोर्ड मोहम्मद जमशेद सहित पूरे रेलवे बोर्ड द्वारा संज्ञान लिया जाना चाहिए और अधिकारियों के ट्रांसफर से संबंधित निर्धारित नियमों की लाज रखनी चाहिए, वरना दक्षिण रेलवे के जीएम, सीओएम, सीसीएम, और पूर्व सीपीओ तथा पूर्व एसडीजीएम जैसे माफिया यूनियन के हाथों बिके हुए अधिकारियों को पाल-पोसकर और सीनियर डीसीएम/चेन्नई या पूर्व सीसीएम अजीत सक्सेना जैसे सक्षम एवं समर्पित अधिकारियों को दरकिनार करके अथवा नीचा दिखाकर भारतीय रेल के लोडिंग एवं अर्निंग के लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं किया जा सकेगा. फिर भले ही वह फर्जी अथवा बनावटी आंकड़े दर्शाकर सरकार या रेलमंत्री के साथ ही पूरे देश को गुमराह करते रहें?

सम्पादकीय