महाप्रबंधकों की मीटिंग से गायब रहा ‘सुरक्षा’ का मुद्दा

    सीआरबी की परफार्मेंस रिव्यु मीटिंग के एजेंडा में नहीं रहा ‘रेलयात्रियों की सुरक्षा’ का कोई मुद्दा

    गाड़ियां अनियमित, संरक्षा ताक पर, सीआरबी का संरक्षा-समयपालन की बात करना बेमानी

    कलर ब्लाइंड और नाकाबिल सीआरबी के मातहत काम करते हुए कश्मसा रहे हैं सभी महाप्रबंधक

    ‘सुरक्षा’ का मुद्दा मुख्य एजेंडे से गायब, रेलवे में बढ़ीं चोरी-डकैती, छेड़छाड़-जहरखुरानी की घटनाएं

    सुरेश त्रिपाठी

    चेयरमैन, रेलवे बोर्ड (सीआरबी) ए. के. मितल ने बुधवार, 9 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भारतीय रेल के सभी जोनों एवं उत्पादन इकाईयों के महाप्रबंधकों के साथ कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक (परफार्मेंस रिव्यु मीटिंग) की. इस मीटिंग में सीआरबी ए. के. मितल ने यात्री सुविधाओं के साथ उनकी संरक्षा और गाड़ियों के समयपालन सहित लोडिंग एवं निर्माण कार्यों की प्रगति पर विशेष जोर दिया.

    सीआरबी ने महाप्रबंधकों को संबोधित करते हुए कहा कि गाड़ियों के परिचालन में संरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए. उन्होंने सभी महाप्रबंधकों को निर्देश दिया कि यात्रियों की सुरक्षित यात्रा और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने को सुनिश्चित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा औचक निरीक्षण करें, क्योंकि रेलयात्री ही रेलवे के लिए सबसे बड़ी पूंजी और उपभोक्ता हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गाड़ियों के समयपालन को सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने 16 अगस्त से शुरू हो रहे स्वच्छता पखवाड़े में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने का भी निर्देश दिया.

    उन्होंने महाप्रबंधकों को चलती गाड़ियों में खानपान एवं पानी की उपलब्धता इत्यादि से संबंधित यात्री शिकायतों पर तुरंत ध्यान देने और उनका उचित निवारण करने का निर्देश दिया. सीआरबी ने कहा कि दोहरीकरण, तिहरीकरण और विद्युतीकरण इत्यादि चालू रेल विकास कार्यों को निर्धारित समय पर पूरा करने के लक्ष्य पर विशेष ध्यान दिया जाए. माल-लोडिंग के विषय में बोलते हुए सीआरबी ने नए व्यवसाय हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करने और मुख्य जिंसों की लोडिंग पर जोर दिया.

    यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सीआरबी ए. के. मितल ने महाप्रबंधकों को संबोधित करते हुए इस बैठक में एक बार भी ‘यात्री सुरक्षा’ अथवा चलती गाड़ियों या रेल परिसरों में यात्रियों की सुरक्षा पर एक बार भी अपने संबोधन में कुछ नहीं कहा. जबकि भारतीय रेल का सर्वप्रथम और मुख्य लक्ष्य ‘सुरक्षा, संरक्षा एवं समयपालन’ ही रहा है और आज भी है. परंतु सीआरबी उर्फ के एजेंडे से ‘रेलयात्रियों की सुरक्षा’ का सबसे अहम् मुद्दा गायब हो गया है, जिसका परिणाम आए दिन भारतीय रेलों में दिखाई दे रहा है.

    ऐसी बैठकों में ‘कलर ब्लाइंड सीआरबी उर्फ स्टोरकीपर’, जिन्हें सिग्नल में सिर्फ ‘ब्लैक-स्पॉट’ ही नजर आता है, जब सेफ्टी और पन्क्चुअलिटी की बात करते हैं, तब लगभग सभी सहभागी महाप्रबंधक मंद-मंद मुस्करा रहे होते हैं. ऐसे में उनसे यात्री सुरक्षा की प्राथमिकता की उम्मीद कैसे की जा सकती है? जब से सभी महाप्रबंधकों को सीधे कलर ब्लाइंड और नाकाबिल सीआरबी के मातहत ला दिया गया है, तब से लगभग सभी महाप्रबंधक, स्टोरकीपर बिरादरी को छोड़कर, बेमन से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं.

    पिछले तीन वर्षों से भारतीय रेल की प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविकता यह है कि तमाम काबिल और सक्षम रेल अधिकारी एक नाकाबिल और कलर ब्लाइंड सीआरबी के मातहत काम करते हुए कश्मसा रहे हैं, मगर खुलकर कुछ कह नहीं पा रहे हैं. ऐसे सीआरबी के मातहत काम करते हुए वह कैसा महसूस कर रहे हैं, ‘रेलवे समाचार’ द्वारा यह पूछे जाने पर वह सिर्फ एक बेबस सी हंसी हंसकर रह जाते हैं, मगर उनकी यह लाचार अथवा बेबस हंसी ही उनकी बेबस मनोदशा की असलियत को स्वयं ही बयान कर देती है.

    रेलयात्रियों की सुरक्षा को भारतीय रेल की प्रशासनिक व्यवस्था के मुख्य एजेंडे से बाहर कर दिए जाने का ही दुष्परिणाम है कि आए दिन जहां-तहां चलती गाड़ियों में हत्या, बलात्कार, छेड़छाड़, चोरी-डकैती और चलती गाड़ियों से यात्रियों को बाहर फेंके जाने की सैकड़ों घटनाएं घट चुकी हैं. यात्री भगवान भरोसे रेलयात्रा कर रहे हैं. जहां तक सेफ्टी की बात है तो इसकी असलियत किसी भी ट्रेन लाइटिंग अथवा कैरिज एंड वैगन के कर्मचारियों से जानी जा सकती है. और जहां बात गाड़ियों की पन्क्चुअलिटी की है, तो अपवाद स्वरूप कुछ प्रमुख गाड़ियों को छोड़कर कोई भी गाड़ी भारतीय रेल में अपने निर्धारित समय पर गंतव्य पर नहीं पहुंच रही है.

    इसका मुख्य कारण भारतीय रेल के शीर्ष पर बैठाए गए अधिकारी (सीआरबी) का कलर ब्लाइंड और नाकाबिल होना माना जा रहा है. जबकि इसका दूसरा प्रमुख कारण रेलमंत्री का रेलवे के बारे में अनभिज्ञ होना है, जिन्हें बड़ी चालाकी के साथ रेलवे बोर्ड की नौकरशाही ने टिकट वेंडिंग मशीनों से लेकर अतिरिक्त टिकट खिड़कियों, वाटर वेंडिग मशीनों, अतिरिक्त कोचों, गाड़ियों के बढ़ाए गए फेरों सहित कचरा पेटियों और शौचालयों तक के उदघाटन में लगा रखा है. रेलमंत्री को यह सब समझ में न आना भी एक सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है.

    करोड़ों खर्च करके भी रेल विकास शिविर का नतीजा शून्य रहा, फिर भी रेलमंत्री को रेलवे की नौकरशाही की कुटिलता समझ में न आना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. यही वजह है कि सीआरबी सहित रेलवे बोर्ड मेंबर्स और ईडी/डीजी इत्यादि में से कोई भी अधिकारी रेलमंत्री के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है. इससे न सिर्फ भारतीय रेल की छवि खराब हो रही है, बल्कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की छवि को भी बट्टा लग रहा है, क्योंकि कोई भी रेल परियोजना न तो इस दरम्यान पूरी हुई है और न ही किसी परियोजना की उचित प्रगति हो रही है, जबकि सरकार ने इस दरम्यान भरपूर पैसा दिया है. रेलवे में भ्रष्टाचार और लापरवाही चरम पर है.

सम्पादकीय