रांची मंडल के हटिया स्टेशन पर अनारक्षित टिकटों में करोड़ों का घोटाला

    रेलवे बोर्ड के सीटीसी स्क्वाड ने उजागर किया यूटीएस टिकटों का बड़ा फ्रॉड

    हटिया स्टेशन के सीबीएस, सीसीआई, टीआईए सहित 10 कर्मचारी निलंबित

    दसियों साल से एक ही स्टेशन पर जमे कर्मचारियों को फौरन दरबदर किया जाए

    सुरेश त्रिपाठी

    भारतीय रेल में नीचे से लेकर ऊपर तक, अपवादों को छोड़कर, जो जहां बैठा है, वहां अपने तरीके से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रेलवे को और अप्रत्यक्ष रूप से देश को लूट रहा है. उनकी इस लूट पर कोई लगाम इसलिए नहीं लग पा रही है, क्योंकि रेलवे का निजाम पिछले तीन सालों से नई-पुरानी गाड़ियों, अतिरिक्त कोचों, वाटर वेंडिंग मशीनों, टिकट वेंडिग मशीनों, एस्केलेटर्स, लिफ्ट, एफओबी, आरयूबी, प्लेटफार्म, सफाई मशीनों, शौचालयों इत्यादि के उदघाटनों में व्यस्त है. इस दरम्यान रेलवे निजाम यह समझने में नाकाम रहा है कि रेलवे की नौकरशाही ने उसे उक्त फालतू कार्यों में उलझाकर अपनी लूट, अपने भ्रष्टाचार को बखूबी जारी रखा है.

    करोड़ों की लूट का अब ऐसा ही एक और मामला दक्षिण पूर्व रेलवे, रांची मंडल के हटिया स्टेशन पर उजागर हुआ है. बड़े मूल्य की अनारक्षित टिकटों (यूटीएस) के इस फ्रॉड को रेलवे बोर्ड के सेंट्रल टिकट चेकिंग स्क्वाड (सीटीसी स्क्वाड) ने पकड़ा है, जबकि जोनल विजिलेंस और मंडल के तथाकथित एंटी-फ्रॉड स्क्वाड को हटिया स्टेशन पर लंबे समय से चल रहे इस फ्रॉड की भनक तक नहीं लगी. जाहिर है कि इस महा-फ्रॉड की जड़ें अवश्य नीचे से ऊपर तक पहुंची हुई होंगी.

    आश्चर्यजनक किंतु सत्य यह है कि रांची मंडल का मुख्यालय ‘हटिया स्टेशन’ से एकदम लगा हुआ है. ऐसे में यदि मुख्य स्टेशन के टिकट बुकिंग कार्यालय में यह महा-फ्रॉड मंडल मुख्यालय की नाक के नीचे चल रहा था और इसकी भनक सीनियर डीसीएम सहित मंडल के अन्य अधिकारियों को नहीं लगी, तो इसका मतलब यह है कि उनकी व्यक्तिगत प्रशासनिक इंटेलिजेंस शून्य है. ऐसे में मंडल के सभी अधिकारी बर्खास्त किए जाने योग्य हैं.

    आश्चर्य इस बात का है कि रेलवे बोर्ड ने सिर्फ उन कर्मचारियों को ही तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है, जो कि यूटीएस टिकटों की बुकिंग, निगरानी और जांच से जुड़े हुए हैं. जबकि उनके साथ ही टिकटिंग/कोचिंग से संबंधित एसीएम, डीसीएम, सीनियर डीसीएम स्तर के सभी अधिकारियों को भी तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए था. इनके निलंबन के बिना न तो इस घोटाले की निष्पक्ष जांच संभव हो पाएगी और न ही यह न्यायसंगत है, क्योंकि इन संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के बिना उसके मातहत किसी भी स्टेशन पर लंबे समय तक तो क्या, थोड़े दिनों तक भी ऐसा कोई फ्रॉड नहीं चल सकता है.

    अपने सूत्रों से ‘रेलवे समाचार’ को रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर, पैसेंजर मार्केटिंग विक्रम सिंह का यह ‘गोपनीय’ पत्र प्राप्त हुआ है. श्री सिंह द्वारा बुधवार, 2 अगस्त को करीब 4 बजे महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व रेलवे को फैक्स से भेजे गए इस आदेशात्मक पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि हटिया स्टेशन पर अन-रिजर्व्ड टिकटिंग सिस्टम (यूटीएस) में भारी फ्रॉड पाया गया है. इस फ्रॉड को रेलवे बोर्ड के सीटीसी स्क्वाड ने पकड़ा है. पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि-

    “Preliminary investigation by CTC Squad, Railway Board revealed that the staff of Hatia Station are indulged in malpractice of Non-issuing Higher Value UTS tickets. The irregularities detected are very serious in nature as it involved embezzelement of Railway revenue to the tune of Crores of rupees and forgery with malafied intent.”

    पत्र में महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व रेलवे से कहा गया है कि इस धोखाधड़ी और कदाचार में हटिया स्टेशन का जो संदिग्ध टिकट बुकिंग स्टाफ संलिप्त है, उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाए. हटिया स्टेशन के इस टिकट बुकिंग स्टाफ में बुकिंग क्लर्क पी. मंडल, मुख्य बुकिंग क्लर्क बी. राम, बुकिंग क्लर्क ए. के. झा, सीनियर बुकिंग क्लर्क श्रीमती बिनीता सिन्हा, सीनियर बुकिंग क्लर्क विनीत सिंह, बुकिंग क्लर्क श्रीमती शिल्पी मुखर्जी, बुकिंग क्लर्क श्रीमती लता का नाम तत्काल निलंबित किए जाने वाले स्टाफ में शामिल है.

    इसके अलावा उक्त पत्र में ही हटिया स्टेशन के चीफ बुकिंग सुपरवाइजर (सीबीएस) पी. के. दीवान सहित सेक्शनल कमर्शियल इंस्पेक्टर (सीआई), हटिया और सेक्शनल ट्रैफिक इंस्पेक्टर ऑफ एकाउंट्स (टीआईए), हटिया को भी तत्काल निलंबित करने को कहा गया है. पत्र में यह भी कहा गया है कि पूरा प्रशासनिक तंत्र ढ़ह गया है. ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि टिकट बुकिंग कार्यालय के कामकाज की निगरानी रखने के लिए उत्तरदायी और लीकेज को रोकने के लिए जिम्मेदार उक्त कर्मचारी अपने कर्तव्य का निर्वाह करने में पूरी तरह से लापरवाह और गैर-जिम्मेदार साबित हुए हैं.

    “The fraud occerred due to complete collapse of administration system. It was a complete failure of officials responsible for monitoring the working of Booking Office and preventing leakage.”

    उल्लेखनीय है कि कुछ साल पहले इसी तरह सिस्टम में हेराफेरी करके आरक्षित टिकटों में भी पूर्व मध्य रेलवे में भारी घोटाला किया गया था. परंतु तब उक्त घोटाले को ऊपरी दबाव के चलते रफादफा कर दिया गया था. वर्तमान में भी ऐसे तमाम फ्रॉड भारतीय रेल के कई बड़े स्टेशनों पर चल रहे हैं. सियालदह मंडल के कोलकाता स्थित पार्क साइट जैसे कई स्टेशनों पर पूर्व रेलवे मुख्यालय और प्रशासन की नाक के नीचे टिकटों की हेराफेरी हो रही है. इसका सबसे बड़ा कारण मान्यताप्राप्त संगठनों से जुड़े सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारियों का दसियों साल से एक ही स्टेशन पर जमे होना भी है. ज्ञातव्य है कि इस संबंध में ‘रेलवे समाचार’ ने करीब डेढ़-दो साल पहले मिली अपुष्ट जानकारी से पूर्व रेलवे एवं दक्षिण पूर्व रेलवे दोनों जोनल रेलों के संबंधित उच्च अधिकारियों को संदेश भेजकर चेताया था. इसके बावजूद कोई उचित कदम नहीं उठाए गए.

सम्पादकीय