सीएमडी/रेलटेल आर. के. बहुगुणा को एक्सटेंशन दिए जाने की संभावना?

    सीएमडी की एक्सटेंशन की संभावना से असंतुष्ट हैं रेलटेल के अधिकारी

    भ्रष्टाचार में दर्ज सीबीआई की एफआईआर में सीएमडी को नहीं किया शामिल

    एक्सटेंशन मिलने से सरकार के विरुद्ध खुलकर बाहर आ जाएगा अधिकारियों का असंतोष

    नई दिल्ली : ‘रेलटेल कॉर्पोरेशन’ की स्थापना से ही इसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) पद पर राजेंद्र कुमार बहुगुणा उर्फ आर. के. बहुगुणा विराजमान हैं. हालांकि उनके नेतृत्व में रेलटेल ने जहां पर्याप्त प्रगति की है, वहीं इसमें भ्रष्टाचार होने की भी काफी शिकायतें रही हैं. अब इसके तमाम अधिकारी एवं कर्मचारीगण श्री बहुगुणा को सेवा-विस्तार (एक्सटेंशन) दिए जाने की संभावनाओं से अत्यंत विचलित नजर आ रहे हैं. उनका मानना है कि श्री बहुगुणा के नेतृत्व में रेलटेल में भारी भ्रष्टाचार, भेदभाव और पक्षपात हुआ है, यदि उन्हें सेवा-विस्तार दिया जाता है, तो इन सब में और ज्यादा वृद्धि होगी.

    कई अधिकारियों ने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि हाल ही में शिलांग, मेघालय में सीबीआई ने रेलटेल के सीनियर मैनेजर सहित चार अन्य के खिलाफ 62 करोड़ रुपए से ज्यादा के भ्रष्टाचार अथवा फंड की अफरा-तफरी किए जाने का मामला भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दर्ज किया है, मगर उक्त मामले में सीएमडी का नाम नहीं डाला गया, जबकि उन्हीं के नेतृत्व में यह घोटाला हुआ है, ऐसे में उन्हें इससे मुक्त कैसे किया जा सकता है? विशेष जज, सीबीआई, शिलांग के समक्ष प्रस्तुत मामले की एफआईआर (केस नं. आरसीएसएचजी2016ए0007, दि. 30.11.2016) की 34 पेज की प्रति ‘रेलवे समाचार’ के पास सुरक्षित है.

    ‘रेलटेल कॉर्पोरेशन’ भारतीय रेल का एक सार्वजनिक उपक्रम है. यह उपक्रम रेल मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है. इसके संबंध में रेलटेल के ही कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने ‘रेलवे समाचार’ के माध्यम से प्रधानमंत्री, भारत सरकार नरेंद्र मोदी और रेलमंत्री सुरेश प्रभु से कुछ सवाल पूछकर उनका ध्यान रेलटेल के सीएमडी आर. के. बहुगुणा के भ्रष्टाचार की तरफ आकर्षित किया है. उन्होंने श्री बहुगुणा की भ्रष्ट कार्य-प्रणाली, भेदभाव, पक्षपात तथा कार्यालयीन कोताही और नियमों को ताक पर रखकर इस पीएसयु का कामकाज चलाने की उनकी प्रवृत्ति पर सवाल खड़े किए हैं. यह सब उन्होंने ईमेल के जरिए ‘रेलवे समाचार’ को भेजा है. इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित तीन पत्रों का हवाला भी दिया है-

    1. संदर्भ- रेलवे बोर्ड पत्र सं. 2016/वीसी/आरटेल/1-सीए-3, दि. 31.01.2017.
    2. संदर्भ- रेलटेल/विजिलेंस पत्र सं. डी/वीआई/सीए-3/1/8/16. दि. 03.02.2017.
    3. संदर्भ- निदेशक/विजिलेंस, रेलवे बोर्ड पत्र सं. 2016/वीसी/आरटेल/1-सीए-3, दि. 07.02.2017.

    उन्होंने लिखा है कि आर. के. बहुगुणा, सीएमडी/रेलटेल, पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप हैं और उनके विरुद्ध कई जांच एजेंसियों द्वारा जांच भी की जा रही है. उनका कहना है कि ‘भ्रष्टाचार में गहराई तक लिप्त होने और सॉफ्ट फर्निशिंग (वाउचर नं. 2802, दिनांक 28.02.2013, कुल राशि 43,000 रुपए) का एक मामला साबित होने के बावजूद ऐसा कौन सा विशेष कारण है कि आर. के. बहुगुणा को सीएमडी/रेलटेल के पद पर एक्सटेंशन दिया जा रहा है? क्या रेल मंत्रलाय में काबिल एवं कार्यक्षम अधिकारियों की कमी हो गई है, जिसके कारण इस एक और कदाचारी को रेल मंत्रालय द्वारा एक्सटेंशन दिया जा रहा है?’

    उन्होंने कहना है कि रेल मंत्रालय का यह कदम क्या प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त भारत की छवि के विपरीत नहीं है? पत्र में लिखा गया है कि वे रेल मंत्रालय सहित पीएमओ, एसीसी, डीओपीटी और सीवीसी का ध्यान निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित कराना चाहते हैं-

    1. बिना लिखित परीक्षा के सीएमडी/रेलटेल आर. के. बहुगुणा ने काफी लोगों को ‘वरिष्ठ प्रबंधक, फाइनेंस’ के पद पर नियुक्ति किया है. इसके अलावा अपने चहेतों और चापलूसों को मलाईदार पदों पर नियुक्त करके उनके जरिए सार्वजनिक राजस्व को करोड़ों रुपए का चूना लगाया है.

    2. इसके साथ ही उन्होंने प्रोबेशन में होने के बावजूद इन सभी अधिकारियों को प्रमोशन दिया. ऐसा किया जाना भारत सरकार अथवा डीओपीटी के किसी नियम के अंतर्गत नहीं आता है. ऐसे में श्री बहुगुणा द्वारा ऐसा किया जाना क्या भारत सरकार, डीओपीटी और रेल मंत्रालय के नियम-कानून और दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन नहीं है?

    3. देश के सुदूर पूर्वोत्तर क्षेत्र के गुवाहाटी, असम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल, सिक्किम आदि प्रदेशों में यूएसओएफ, एनओएफएन, वाई-फाई, ओएफसी केबल बिछाने में ठेकेदारों को कार्य पूरा न होने के बावजूद करोड़ों रुपए का एडवांस पेमेंट किया गया. इस तरह ठेकेदारों के साथ कमीशनखोरी करके भारत सरकार और सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है.

    4.  ठेकेदारों को टीडीएस का भुगतान भी रेलटेल के कार्यालय से किया गया है, जो कि सिर्फ कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा भारत सरकार को किया जाता है. मगर सीएमडी/रेलटेल आर. के. बहुगुणा को चूंकि इन कॉन्ट्रैक्टर्स से सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं सहित करोड़ों रुपए का कमीशन प्राप्त होता है, इसलिए ऐसा किया गया, जो कि स्थापित नियमों का उल्लंघन और खुली मनमानी है.

    5. रेलटेल में ‘ईआरपी सॉफ्टवेयर’ को लागू करवाने में लाखों रुपए का गबन सीएमडी आर. के. बहुगुणा द्वारा किया गया है? जबकि काफी हद तक अनुपयोगी इस सॉफ्टवेयर को खरीदे जाने की कोई खास जरूरत नहीं थी.

    रेलटेल के लगभग सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उपरोक्त सभी तथ्यों के माध्यम से प्रधानमंत्री, पीएमओ, रेलमंत्री और सीवीसी से अनुरोध किया है कि आर. के. बहुगुणा से संबंधित इन तमाम तथ्यों की गहराई से जांच की जाए. उनका यह भी कहना है कि यह जांच तभी निष्पक्ष हो सकती है, जब श्री बहुगुणा को एक्सटेंशन न देकर उन्हें रेलटेल से अलग किया जाए.

    उन्होंने लिखा है कि रेलटेल कॉर्पोरेशन पर सीबीआई की एफआईआर रजिस्टर होने और उसकी जांच जारी होने पर भी सीएमडी/रेलटेल राजेंद्र कुमार बहुगुणा की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इसका क्या कारण है कि सीएमडी/रेलटेल अभी-भी अपने पद पर बने हुए हैं? रेलटेल के प्रमुख कार्यकारी होने के कारण यह जिम्मेदारी सीएमडी की भी बनती है. अतः सीबीआई की उक्त एफआईआर में सीएमडी/रेलटेल राजेंद्र कुमार बहुगुणा का नाम भी जोड़ा जाना चाहिए.

    सीएमडी/रेलटेल राजेंद्र कुमार बहुगुणा के सेवा-विस्तार के संबंध में सर्वप्रथम उनसे ही इसकी पुष्टि करने हेतु ‘रेलवे समाचार’ ने उन्हें उनके मोबाइल पर कॉल किया, मगर किन्हीं कारणों से उन्होंने मोबाइल पर रेस्पोंड नहीं किया. तत्पश्चात ‘रेलवे समाचार’ ने रेलटेल की प्रवक्ता सुश्री सुचित्रा प्रधान से संपर्क करके जब उनसे इस बारे में पूछा, तो उनका कहना था कि फिलहाल तो सीएमडी के पास उनका असली कार्यकाल ही काफी बाकी है. तथापि उनको सेवा-विस्तार दिए जाने की फिलहाल उन्हें कोई जानकारी नहीं है. इसके बाद जब उनसे यह पूछा गया कि 30 नवंबर 2016 को शिलांग, मेघालय में सीबीआई ने रेलटेल के कुछ अधिकारियों के विरुद्ध जो एफआईआर दर्ज की है, क्या उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी है? इस पर सुश्री प्रधान का कहना था कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है.

    ऐसा लगता है कि वर्तमान केंद्र सरकार का अपने अधिकारियों पर कोई ऐतबार नहीं है. यही वजह है कि केंद्र सरकार ने अब तक करीब 8-10 वरिष्ठ नौकरशाहों को उनके रिटायरमेंट के बाद उन्हें सेवा-विस्तार अथवा पुनर्नियुक्ति दी है. इनमें वर्तमान सीआरबी और एसीसी प्रमुख भी शामिल हैं, जिन्हें सिर्फ उनकी चापलूसी की बदौलत ही पुनर्नियुक्ति दी गई है, क्योंकि उनमें अपनी कोई व्यक्तिगत काबिलियत कभी नहीं थी. इसके परिणाम सबके सामने हैं. अब यदि यह सिलसिला सार्वजनिक उपक्रमों तक भी विस्तारित होता है, तो उन सभी वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों का असंतोष सरकार के विरुद्ध खुलकर बाहर आ जाएगा, जिनकी प्रगति अथवा पदोन्नतियां इन अकर्मण्य, अक्षम और चापलूस नौकरशाहों की वजह से प्रभावित हुई हैं, या हो रही हैं, अथवा होने वाली हैं.

सम्पादकीय