पीएमओ को गुमराह कर रहे हैं सीएलडब्ल्यू के अधिकारी !!

    प्रधानमंत्री की छवि और पीएमओ की साख पर खड़ा हो रहा है बड़ा सवाल

    चितरंजन : चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (सीएलडब्ल्यू) सहित भारतीय रेल के तमाम अधिकारी अब पीएमओ को भी गुमराह करने लगे हैं. सरकारी कर्मचारियों अथवा जन-सामान्य द्वारा पीएमओ को भेजी जाने वाली शिकायतों पर ये अधिकारी यह मानकर जवाब दे रहे हैं कि न तो उनके द्वारा दिए गए जवाब को पीएमओ से कोई वेरीफाई करने आएगा और न ही पीएमओ को उनकी चालाकी के बारे में कभी पता चल पाएगा. यही वजह है कि अब वह जन-सामान्य की शिकायतों को आरटीआई की तरह मानकर निपटाने लगे हैं. आरटीआई में भी इसी तरह के जवाब देकर रेलवे बोर्ड सहित तमाम जोनल रेलों के अधिकारी जनता को गुमराह कर रहे हैं.

    इस संबंध में सीएलडब्ल्यू के अवनीश कुमार ने सीएलडब्ल्यू स्थित तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र (टीटीसी) के दो सीनियर ट्रेड इंस्ट्रक्टर (एसटीआई/इलेक्ट्रिकल) पदों के लिए 31 जनवरी 2016 को हुई लिखित परीक्षा में उन्हें जानबूझकर फेल किए जाने की शिकायत पीजी पोर्टल के माध्यम से पीएमओ को की थी. इससे पहले जब बहुत समय तक उक्त लिखित परीक्षा का परिणाम सार्वजनिक नहीं किया गया, तो उन्होंने आरटीआई के माध्यम से अपनी उत्तर पुस्तिका मांगी थी, जिसमें उनके द्वारा सवालों के दिए गए सही उत्तर के बावजूद उन्हें उचित अंक नहीं दिए गए थे. पीएमओ ने इस शिकायत को जांच के लिए सीएलडब्ल्यू भेजा था. सीएलडब्ल्यू के एक एपीओ/मुख्यालय ने पीएमओ को जवाब भेजा कि उक्त शिकायत स्टैब्लिशमेंट मैन्युअल की सेवा-शर्तों के अनुरूप नहीं है, इसलिए शिकायत का कोई आधार नहीं बनता है.

    अवनीश कुमार ने ‘रेलवे समाचार’ को भेजी गई ईमेल में लिखा है कि ‘मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर कुछ लोग बधाई दे रहे हैं, तो ज्यादातर लोग आलोचना कर रहे हैं. ध्यान देने की बात यह है कि उन सभी घटनाएं जो प्रकाश में आई हैं और जिनमें पीएमओ के हस्तक्षेप पर बड़ी समस्याओं और शिकायतों का निपटारा हुआ है, परंतु अब ऐसी बहुत सी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो यह दर्शाती हैं कि अब सब कुछ फेल हो रहा है. पीएमओ को भेजी जा रही शिकायतों का निबटारा अधिकारी अपनी मर्जी से कर रहे हैं और पीएमओ को गुमराह कर रहे हैं, जिससे प्रधानमंत्री मोदी जी और पीएमओ प्रशासन की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है. अब मोदी जी के अंधभक्त इसे नकारेंगे पर सत्य के लिए मैं प्रमाण दे रहा हूं और आशा करता हूं कि उन अधिकारियों कर कड़ी कार्रवाई हो जो पीएमओ को भटका एवं गुमराह कर रहे हैं.’

    उन्होंने लिखा है कि ‘मैं भारतीय रेल में कार्यरत हूं. चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स प्रशासन द्वारा सीनियर ट्रेड इंस्ट्रक्टर, जो कि एक्स-कैडर पद हैं, की नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा दि. 30.01.2016 को ली गई, जिसका परिणाम जानने हेतु मैंने अपनी उत्तर पुस्तिका आरटीआई से मांगी तथा मॉडल आंसर शीट भी प्राप्त की. जांची हुई उत्तर पुस्तिका में यह स्पष्ट दिख रहा है कि सही उत्तर को गलत काट कर गलत मान लिया है और अंततः उन्हें फेल कर दिया गया है. मॉडल आंसर शीट में भी भारी गलतियां हैं और उसमें भी उत्तर गलत हैं.’

    उनका कहना है कि ‘जब मैंने पीएमओ में इसकी शिकायत दि. 20.01.2017 को की, तो उसका उत्तर समय पर नहीं आया. विभाग में कई बार फोन करने के बाद दि. 23.06.2017 को उत्तर आया, जिसमें सब कुछ ठीक होने की बात पीएमओ को बताई गई है और पीएमओ को भटकाया एवं गुमराह किया गया है. इस विषय में अनियमताओं के बारे में मैंने सीपीओ/चि.रे.का जी. श्रीनिवास राव को लिखित शिकायत दि. 26.12.2016 को दी थी, परंतु उसका कोई उत्तर अभी तक नहीं आया है और न ही कोई कदम उठाया गया है.’

    उन्होंने लिखा है कि ‘अब मैं इस विषय में हुई तमाम अनियमितताओं को एक-एक कर उजागर कर रहा हूं. इस विषय की शिकायत सीवीसी को दि. 26.12.2016 को भेजी गई है, परंतु मुझे लगता है कि सभी अधिकारी इस जांच को भी भटका देंगे और नतीजा कुछ नहीं निकलेगा. अब यह स्पष्ट है कि रेलवे में भ्रष्टाचार किस तरह बिना रोक-टोक चल रहा है और अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं. अब समय आ गया है कि मोदी सरकार कड़े कदम उठाए और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाए, या फिर अपनी वाहवाही का ढोल पीटना बंद करे. इस समय लोग मोदी सरकार की ओर बहुत आशा से देख रहे हैं जिससे भ्रष्टाचार रोक लग सके.’

सम्पादकीय