भ्रष्टाचार में रेलवे ‘टॉप’ पर : प्रमुख कारण अधिकारियों की ट्रांसफर/पोस्टिंग

    रिटायरमेंट में पांच महीने बाकी होने पर भी गढ़वाल को म.रे. में शिफ्ट किया गया

    कार्यकाल पूरा हुए बिना राजेंद्र जैन को म. रे. से द. प. रे. भेजा गया

    जूनियर मोस्ट पी. एस. राय को उ. म. रे. में बनाया गया सीएचओडी

    सुरेश त्रिपाठी

    रेलवे बोर्ड में अधिकारियों की असमय ट्रांसफर/पोस्टिंग का कारोबार आजकल खूब धड़ल्ले से चल रहा है. हालांकि इसकी शुरुआत काफी पहले ही हो चुकी थी. रेलवे बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोडेड तमाम ट्रांसफर/पोस्टिंग और कैंसिलेशन ऑर्डर्स को देखने मात्र से यह बात स्वतः ही प्रमाणित हो जाती है. भ्रष्टाचार के मामलों में रेलवे के ‘टॉप’ पर रहने का यह सबसे बड़ा कारण है. एक तरफ रेलवे बोर्ड अपने ही बनाए नियमों का घोर उल्लंघन कर रहा है, तो दूसरी तरफ इस तरह से रिटायरमेंट के कगार पर खड़े अधिकारियों के साथ घोर अन्याय किया जा रहा है.

    रेलवे बोर्ड द्वारा गुरूवार, 8 जून को जारी एक पोस्टिंग ऑर्डर में राजेंद्र जैन (एचएजी) को मध्य रेलवे के मुख्य संकेत एवं दूरसंचार अभियंता (सीएसटीई) के पद से ट्रांसफर करके दक्षिण पश्चिम रेलवे, हुबली के सीएसटीई (पीएचओडी) पद पर भेजा गया है, जबकि उनकी जगह एम. गढ़वाल (एचएजी) को उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद से मध्य रेलवे, मुंबई में समान पद पर शिफ्ट किया गया है. श्री गढ़वाल की जगह पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर से पी. एस. राय (एनएफ-एचएजी) को उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद की सीएसटीई पोस्ट पर लाया गया है.

    उल्लेखनीय है कि राजेंद्र जैन को मध्य रेलवे में आए हुए अभी एक साल भी नहीं हुआ था. अतः एक पद पर तीन साल के नियत कार्यकाल के नियम का श्री जैन के मामले में घोर उल्लंघन किया गया है. वैसे भी श्री जैन अगले कुछ महीनों में महाप्रबंधक के पद पर किसी न किसी जोन में जाने ही वाले थे. ऐसे में उनका असमय ट्रांसफर कतई गैर-वाजिब है. इसके अलावा एम. गढ़वाल की सेवानिवृत्ति (30 नवंबर 2017) में अब छह महीनों से भी कम समय शेष रह गया है. ऐसे में रेलवे बोर्ड ने कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में अन्यत्र ट्रांसफर नहीं किए जाने के अपने ही नियम का भारी उल्लंघन किया है.

    अब जहां तक पी. एस. राय, जिनको अब तक प्रॉपर एचएजी नहीं मिला है, को उत्तर मध्य रेलवे में एसएंडटी का विभाग प्रमुख (सीएचओडी) बनाए जाने की बात है, तो यह किसी की भी समझ से इसलिए परे है, क्योंकि उनकी यह पोस्टिंग श्री गढ़वाल के रिटायरमेंट के बाद यानि साढ़े पांच महीने बाद भी की जा सकती थी. जानकारों का कहना है कि श्री राय को ही फेवर करने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों - राजेंद्र जैन और एम. गढ़वाल - को अकारण दरबदर किया गया है. इसके लिए उत्तर मध्य रेलवे का एलीमेंट भी दक्षिण पश्चिम रेलवे, हुबली भेजना पड़ा है. उनका कहना है कि मुंह देखकर और मनचाहा लाभ देने के उद्देश्य से रेलवे बोर्ड द्वारा एलीमेंट ट्रांसफर और पदों की हेराफेरी करने की नीति रेलवे में बहुत पहले से चली आ रही है. यहां चेहरा देखकर नियम बनाए और बिगाड़े जाते हैं और इसी नीति में बहुत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार छिपा हुआ है.

    रेलवे बोर्ड के विश्वसनीय सूत्रों से ‘रेलवे समाचार’ को प्राप्त जानकारी के अनुसार भूमिहार रेल राज्यमंत्री ने भूमिहार रेल अधिकारी का फेवर किया है. उनका यह भी कहना है कि संयोग से दोनों लोग उत्तर प्रदेश के दो पड़ोसी जिलों के रहने वाले बिरादरी बंधु (भूमिहार) भी हैं. इसलिए बिरादरी बंधु का फेवर करना तो बनता ही है. सूत्रों ने बताया कि वैसे भी रेल राज्यमंत्री के कार्यालय से रेल अधिकारियों की मनचाही ट्रांसफर/पोस्टिंग और कैंसिलेशन का कारोबार तभी से चल रहा है, जब से रेलमंत्री ने पीएमओ के कहने पर इसका समस्त अधिकार रेल राज्यमंत्री को सौंपा था. इस संबंध में श्री गढ़वाल और श्री राय से उनके मोबाइल पर संपर्क होने पर भी कोई रेस्पॉन्स नहीं मिला, जबकि श्री जैन ने इस बारे में कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त करने से स्पष्ट मना कर दिया.

सम्पादकीय