पूर्वोत्तर रेलवे : ताश के पत्तों की तरह फेंटे गए ट्रैफ़िक/कमर्शियल अधिकारी

    बिना प्लेस्मेंट कमेटी को पुटअप किए सीनियर स्केल अधिकारियों का ट्रांसफर

    एक को छोड़कर 11 में से किसी भी अधिकारी का कार्यकाल नहीं हुआ था पूरा

    अनावश्यक ट्रांसफ़र आदेश से राजस्व को लगा पचीसों लाख रुपए का चूना

    गोरखपुर ब्यूरो : रेल अधिकारियों के असमय ट्रांसफर की दुर्नीति और इसमें भारी भ्रष्टाचार का आलम रेलवे बोर्ड में तो धड़ल्ले से चल ही रहा है. परंतु यह अब जोनल रेलों तक भी फैल रहा है. जहां जूनियर, सीनियर स्केल सहित जेएजी स्तर के अधिकारियों को अपरिभाषित प्रशासनिक कारणों से न सिर्फ असमय और अकारण ताश के पत्तों की तरह फेंटा जा रहा है, बल्कि इस तरह उनका अनावश्यक और भारी उत्पीड़न करते हुए रेल राजस्व को भी लाखों-करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है.

    इसी परिप्रेक्ष्य में यहां उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर रेलवे में 14 जून को एक कार्यालय आदेश सं.137 के तहत ट्रैफिक/कमर्शियल के 11 अधिकारियों का अनावश्यक ट्रांसफर किया गया है. इनमें से तीन अधिकारी सीनियर स्केल के हैं. बताया जाता है कि इन तीनों सीनियर स्केल अधिकारियों के अनावश्यक और असमय ट्रांसफर से पहले प्लेस्मेंट कमेटी के सामने पुटअप करके इनके ट्रांसफर का अप्रुवल नहीं लिया गया. प्लेस्मेंट कमेटी ने भी इसकी पुष्टि ‘रेलवे समाचार’ के पूछने पर की है.

    अधिकारियों ने इस अनावश्यक ट्रांसफ़र आदेश पर अपना असंतोष व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि इन 11 में से सिर्फ एक अधिकारी का ही कार्यकाल पूरा हुआ था, जबकि बाकी 10 में से किसी का भी निर्धारित कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया था. यही नहीं, इनमें से एक अधिकारी, सीनियर डीसीएम/वाराणसी मंडल धीरेंद्र कुमार, को तो अभी मुश्किल से वहां गए शायद दो महीने भी पूरे नहीं हो पाए थे. जबकि एक अधिकारी, सीनियर डीसीएम/इज्जतनगर आर. सी. श्रीवास्तव, ने मेडिकल ग्राउंड पर गोरखपुर मुख्यालय में अपनी पोस्टिंग मांगी थी, मगर उन्हें समान पद पर इज्जतनगर से वाराणसी भेज दिया गया है. हालांकि इस आदेश से वाराणसी मंडल का सीनियर डीसीएम बनने की आर. सी. श्रीवास्तव की वर्षों पुरानी मुराद पूरी हो गई है.

    अधिकारियों का कहना है कि इस अनावश्यक और असमय ट्रांसफर आदेश से सबसे ज्यादा अन्याय धीरेंद्र कुमार के साथ हुआ है, क्योंकि उन्हें वाराणसी मंडल में गए हुए अभी दो महीने भी पूरे नहीं हुए थे. इसके अलावा वह मूलतः कमर्शियल के अधिकारी रहे हैं, परंतु अब उन्हें परिचालन विभाग में उप मुख्य परिचालन प्रबंधक/कोचिंग के पद पर मुख्यालय में बैठा दिया गया है, जहां उन्हें व्यवस्थित काम करने में न सिर्फ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि उसका उन्हें पर्याप्त अनुभव न होने से भविष्य में उनकी एसीआर खराब करके उनका भावी कैरियर चौपट करने की कोशिश भी हो सकती है.

    अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस अनावश्यक और असमय ट्रांसफर आदेश से जहां एक तरफ एक चार्जशीटेड अधिकारी को संवेदनशील पद पर लाया गया है, वहीं इसकी वजह से कुल मिलाकर लगभग 25 लाख रुपए का ट्रांसफ़र भत्ता इन अधिकारियों को दिए जाने का अनावश्यक एवं अकारण नुक़सान रेल राजस्व को भुगतना पड़ेगा. इसके अलावा एक ही जगह एक पद से दूसरे पद पर शिफ्ट कर दिए जाने से न तो अधिकारियों की कार्य-कुशलता बढ़ जाएगी, और न ही रेलवे को इसका कोई लाभ मिल पाता है. अधिकारियों की ट्रांसफर/पोस्टिंग्स के मामले में रेल प्रशासन द्वारा की जा रही इस प्रकार की मूर्खताओं से अंततः रेलवे का ही नुक़सान हो रहा है. अतः रेल प्रशासन द्वारा अधिकारियों की ट्रांसफर/पोस्टिंग्स की नीति पर गम्भीरतापूर्वक पुनर्विचार किया जाना चाहिए.

    इसके विपरीत पूर्वोत्तर रेलवे सहित सभी जोनल रेलवे मुख्यालयों एवं मंडल मुख्यालयों में कार्यालय अधीक्षकों और गोपनीय सहायकों, स्टेनो इत्यादि अति-संवेदनशील पदों पर 15-20-25 सालों से एक ही जगह, एक ही पद पर बैठे इन ग्रूप ‘सी’ कर्मचारियों को विजिलेंस एवं सीवीसी के कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद आवधिक स्थानांतरण नीति के तहत समयानुसर अन्यत्र ट्रांसफ़र नहीं करके भ्रष्टाचार, जोड़तोड़ और मनमानी को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस पर भी रेल प्रशासन को गम्भीरता से संज्ञान लेना चाहिए.

    यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पूर्वोत्तर रेलवे में महाप्रबंधक (जीएम) और मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (सीसीएम) दोनों पदों का कार्यभार वर्तमान में कार्यकारी अधिकारी देख रहे हैं. जीएम/पूर्वोत्तर रेलवे का लुक आफ़्टर चार्ज जीएम/कोर, इलाहाबाद देख रहे हैं, जबकि सीसीएम का चार्ज सीओएम संभाल रहे हैं. इस स्थिति में नीचे के अधिकारियों का ट्रांसफर कतई नहीं किया जाना चाहिए था. इस कारण को वाजिब बताते हुए अधिकारियों का कहना है कि उक्त दोनों पदों पर जब निकट भविष्य में स्थाई अधिकारियों की स्थापना होगी, तब वह भी पुनः अपने मुतबिक अधिकारियों को रखना चाहेंगे, क्योंकि नीचे के इन अधिकारियों से आउटपुट लेने के लिए वही जिम्मेदार होंगे.

सम्पादकीय