तारीख बढ़ने से डीजी/आरपीएफ और रेल मंत्रालय दोनों की इज्जत बची

    आईपीएस की प्रतिनियुक्ति पर स्टे जारी, 31 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

    नई दिल्ली : जैसा कि पहले से ही अपेक्षित था, आखिर वही हुआ. मंगलवार, 16 मई को दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका. रेल मंत्रालय की मांग पर मामले में कोर्ट ने अगली तारीख 31 जुलाई 2017 दे दी है. उल्लेखनीय है कि ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन ने सुरक्षा निदेशालय, रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) में बतौर डीजी/आरपीएफ, आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. अपेक्षा यह थी, और जैसा कि कोर्ट ने भी पिछली तारीख में आश्वासन दिया था, कि 16 मई की तारीख को कोर्ट का अंतिम निर्णय हो जाएगा, परंतु रेल मंत्रालय के रवैये के कारण उक्त तारीख को भी अंतिम फैसला नहीं हो सका.

    इस संदर्भ में रेल मंत्रालय का रवैया शुरू से किसी न किसी तरह मामले को लटकाने का रहा है, क्योंकि अगले महीने जून 2017 में वर्तमान डीजी/आरपीएफ का रिटायरमेंट होना है. रेल मंत्रालय शुरू से यह चाहता रहा है कि जिस प्रकार कानून का खुला उल्लंघन करके उसने वर्तमान डीजी/आरपीएफ की अवैध प्रतिनियुक्ति की थी, उसी प्रकार किसी भी तरह मामले को जून अंत तक खींचा जाए और वर्तमान डीजी/आरपीएफ को सुखरूप रिटायर हो जाने दिया जाए. फिलहाल उसकी यह रणनीति सफल रही है और दिल्ली हाई कोर्ट ने भी 31 जुलाई की अगली तारीख देकर उसकी इस रणनीति को सफल बना दिया है. अन्यथा वर्तमान डीजी/आरपीएफ को ‘बड़े बेआबरू होकर निकले हम तेरे कूचे से’ वाली स्थिति का सामना करना पड़ता था.

    प्राप्त जानकारी के अनुसार मामले में सुनवाई के दौरान ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन के विद्वान अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष इस बात का उल्लेख करते हुए कहा कि चूंकि वर्तमान डीजी/आरपीएफ जून में रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में रेल मंत्रालय को अदालत द्वारा यह हिदायत दी जाए कि अगले डीजी की नियुक्ति या तो मामले का अंतिम निष्कर्ष आने तक न की जाए, या फिर उक्त नियुक्ति आईपीएस से नहीं की जानी चाहिए. इस पर अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर अगली तारीख में सुनवाई की जाएगी. अप्रत्यक्ष रूप से अदालत ने यह कहकर ही प्रस्तुत मामले के अंतिम निपटारे तक रेल मंत्रालय को अगले डीजी की नियुक्ति करने से स्वतः ही रोक दिया है.

सम्पादकीय