रेल प्रशासन पर सुरक्षित यातायात सुलभ कराने का दायित्व

    एसेट रिलायलबिलिटी बढ़ाने एवं मानवीय निर्भरता कम करने का प्रयास

    राष्‍ट्रीय रेल सुरक्षा कोष की स्‍थापना, 1503 मानवरहित समपार समाप्‍त

    ट्रेन प्रोटेक्‍शन वार्निंग सिस्‍टम एवं ट्रेन कोलीजन एवॉयडेंस सिस्‍टम का प्रयोग

    नई दिल्ली : रेल प्रशासन अपने यात्रियों को संरक्षित एवं सुरक्षित रेल यातायात सुलभ कराने के महती दायित्व को निभाने का पूरा प्रयास कर रहा है. इसके लिए रेल प्रशासन निरंतर प्रयासरत है तथा आधुनिकतम तकनीकों के माध्‍यम से एसेट रिलायलबिलिटी बढ़ाने एवं मानव पर निर्भरता को कम करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं. वर्ष 2017-18 के बजट में एक लाख करोड़ रुपए की राशि से पांच वर्ष में राष्‍ट्रीय रेल सुरक्षा कोष की स्‍थापना की घो‍षणा की गई है. इसके तहत वर्ष 2017-18 के दौरान 20 हजार करोड़ रुपए की व्‍यवस्‍था की गई है.

    भारतीय रेल में आधुनिक तकनीक को अपनाने के क्रम में ट्रेन प्रोटेक्‍शन वार्निंग सिस्‍टम (टीपीडब्ल्यूएस) एवं ट्रेन कोलीजन एवॉयडेंस सिस्‍टम (टीसीएएस) प्रारम्भिक रूप से लागू किया जा रहा है. टीपीडब्ल्यूएस को भारतीय रेल के उपनगरीय एवं अतिघनत्‍व वाले रेल मार्गों पर लगभग 3330 रूट किमी. रेलमार्ग पर स्‍थापित किया जा रहा है. चालू वर्ष 2017-18 के लिए स्‍वीकृत कार्यों में टीसीएएस को 1427 रूट किमी. रेलमार्ग के लिए स्‍वीकृत किया गया है.

    यह सिस्टम उत्‍तर मध्‍य रेलवे के दोनों ट्रंक रूटों पर गाजियाबाद से कानपुर, कानपुर से मुगलसराय, आगरा से ग्‍वालियर खंडों पर टीपीडब्ल्यूएस की स्‍थापना का कार्य लगभग 447 करोड़ रुपए की लागत से प्रगति पर है. इसके पूर्व हजरत निजामुददीन से आगरा तक के रेलमार्ग पर टीपीडब्ल्यूएस को सफलतापूर्वक स्‍थापित कर लिया गया था.

    इसके अतिरिक्‍त सवारी रेल डिब्‍बों को अधिक संरक्षित बनाने के क्रम में सभी परंपरागत आईसीएफ डिब्‍बों को एलएचबी डिब्‍बों से परिवर्तित किया जा रहा है. इसके तहत ही वर्ष 2016-17 के दौरान इलाहाबाद-नई दिल्‍ली प्रयागराज एक्‍स. सहित संपूर्ण भारतीय रेल में कुल 34 जोड़ी गाड़ियों में आधुनिक सुविधाओं वाले एलएचबी रेकों को लगाया गया है.इसके लिए कुल 42 एलएचबी रेकों का प्रयोग किया जा रहा है. इसी क्रम में रेल पटरियों को संरक्षित बनाने के उद्देश्य से विभिन्‍न प्रयास किए जा रहे हैं. इसमें प्रीस्‍ट्रेस्‍ड कंकरीट स्‍लीपरों का प्रयोग, 260/130 लंबाई के लंबे रेल पैनल, ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम का प्रयोग प्रारंभ किया गया है. इसके अतिरिक्त अल्ट्रासोनिक ब्रोकेन रेल डिटेक्शन प्रणाली का ट्रायल उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद मंडल के बमरौली-भरवारी सेक्शन में शुरू कर दिया गया है.

    रेल समपारों पर होने वाली दुर्घटनाएं रेलवे के लिए बहुत बड़ी चुनौती हैं. इस उद्देश्य से सभी रेलमार्गों पर मानवरहित समपारों को समाप्‍त करने के प्रयास किए जा रहे हैं. वर्ष 2016-17 के दौरान अब तक के सर्वाधिक मानवरहित समपारों को समाप्‍त करते हुए कुल 1503 ऐसे समपारों को समाप्‍त कर दिया गया है. इसके अतिरिक्‍त 1306 सड़क ऊपरी पुलों एवं सब-वे का निर्माण कार्य पूरा किया गया है. यह भी अब तक की सर्वोच्‍च उपलब्धि है. इसके साथ ही 484 मानवयुक्‍त समपार भी हटाए गए हैं.

    वर्ष 2016-17 में 750 पुराने पुलों को रीहैबिलिटेट कर अब तक की सर्वाधिक संख्‍या में पुलों का अनुरक्षण किया गया है. इसके अतिरिक्‍त स्‍टेशनों पर पैदल ऊपरी पुलों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को स्‍टेशनों पर आवागमन के दौरान सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा एवं संरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके.

    रेल प्रशासन द्वारा विभिन्‍न माध्यमों से रेल यात्रियों एवं सर्वसामान्य को संरक्षा के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है इसके साथ ही रेलकर्मियों के मध्‍य जागरूकता अभियान चलाकर उनके ज्ञान एवं सतर्कता की जांच करना तथा यथोचित प्रशिक्षण देना भी सुनिश्चित किया जाता है. रेल प्रशासन अपने यात्रियों से अनुरोध करता है कि रेल समपारों को पार करते समय सावधानी रखें एवं निर्देशित नियमों का पालन करें. रेल यात्रा में ज्‍वलनशील पदार्थ लेकर यात्रा न करें और न ही रेलगाड़ी की छत एवं फुटबोर्ड पर यात्रा करें.

सम्पादकीय