उत्तर मध्य रेलवे के रेलमार्गों पर ट्रैफिक कन्जेशन कम करने का प्रयास

    रेलमार्गों का विद्युतीकरण रेल परिचालन सहित पर्यावरण के लिए भी लाभदायी होगा

    इलाहाबाद ब्यूरो : उत्तर मध्य रेलवे के विभिन्न रेल मार्ग भारतीय रेल के व्यस्ततम रेलमार्गों में से एक हैं. इस क्षेत्रीय रेलवे में भारतीय रेल के मात्र 5 प्रतिशत रेल मार्ग पर 15 प्रतिशत रेल ट्रैफिक का परिवहन किया जा रहा है. इन रेलमार्गों पर ट्रैफिक कन्जेशन को कम करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं. इसी क्रम में विभिन्न रेल खंडों का विद्युतीकरण किया जा रहा है, ताकि मुख्य मार्गों के अतिरिक्त अन्य वैकल्पिक रेल मार्ग विकसित किए जा सकें एवं ट्रैक्शन चेंज (डीजल से इलेक्ट्रिक या इलेक्ट्रिक से डीजल इंजन में परिवर्तन) करने में लगने वाले समय को बचाने के साथ ही पर्यावरण अनुकूल रेल यातायात व्यवस्था सुनिश्चित किया जा सके.

    इसी उद्देश्य से हावड़ा-इलाहाबाद-मुंबई रेलमार्ग को पूर्णत: विद्युतीकृत करने के क्रम में छिवकी-मानिकपुर-सतना-जबलपुर-इटारसी रेलमार्ग का विद्युतीकरण का कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है. इस खंड पर विद्युतीकरण पूरा होने के बाद हावड़ा-इलाहाबाद-मुंबई रेल रूट पूर्णत: विद्युतीकृत हो जाएगा. इस खंड का 92 रूट किमी. का छिवकी-मानिकपुर रेल खंड उत्तर मध्य रेलवे का हिस्सा है. इस खंड पर भी कार्य प्रगति पर है. छिवकी-मानिकपुर खंड को 2.2 केवी से चार्ज किया जा चुका है एवं इस खंड के 37 किमी. मार्ग को 25 केवी से चार्ज कर दिया गया है. इस कार्य के पूरा होने से रेलगाड़ियों का इलाहाबाद में होने वाला ट्रैक्शन परिवर्तन में अपेक्षित समय बचेगा. इससे रेलगाड़ियों की मोबिलटी में सुधार होगा और इसके फलस्वरूप समय पालन में भी पर्याप्त सुधार अपेक्षित है. इसी क्रम में लगभग 282 किमी. लंबे झांसी-मानिकपुर रेलखंड पर भी रेल विद्युतीकरण स्वीकृत किया गया है, जिसके पूरा होने से झांसी-मानिकपुर के रास्ते छिवकी होते हुए इलाहाबाद का पूरा मार्ग भी विद्युतीकृत हो जाएगा.

    पिछले कुछ वर्षों में उत्तर मध्य रेलवे को मथुरा-अलवर 123 रूट किमी. रेलखंड, इलाहाबाद से प्रयाग के रास्ते वाराणसी के 207 रूट किमी. लंबे रेलमार्ग पर, खुर्जा से मेरठ 84 रूट किमी. के खंडों में विद्युतीकरण के कार्य पूरे किए जा चुके हैं. इसके अतिरिक्त उत्तर मध्य रेलवे से संबंधित वाया इलाहाबाद सिटी-वाराणसी के रास्ते छपरा रेलमार्ग - 330 रूट किमी., ईदगाह-भरतपुर - 87 किमी., झांसी-भीमसेन रेलमार्ग, ललितपुर-उदयपुरा 32 किमी., मथुरा से कासगंज के रास्ते कल्यानपुर 338 किमी, चुनार-चोपन 100 किमी. रेलमार्गों पर भी रेल विद्युतीकरण कार्य स्वीकृत किए गए हैं. इन रेलमार्गों का विद्युतीकरण न सिर्फ रेल परिचालन की दृष्टि से लाभदायक होगा, बल्कि यह पर्यावरण की दृष्टि से भी लाभदायी होगा.


    उ.म.रे.: ऊर्जा बचत एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी

    पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के दृष्टिगत उत्तर मध्य रेलवे परिक्षेत्र मे ऊर्जा संरक्षण एवं नवीन ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग हेतु विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं. नए ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग के क्रम में सौर ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है और रेलवे के कार्यालय भवनों, स्टेशनों की छतों, लेवल क्रासिंगों आदि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं. इसी क्रम में उत्तर मध्य रेलवे में कानपुर एवं इलाहाबाद के विभिन्न भवनों में कुल 1 एमडल्यूपी का प्लान्ट लगाया जा रहा है, जिसे जुलाई 2017 तक स्थापित करा दिया जाएगा. ग्वालियर के सिथौली स्थित रेल स्प्रिंग कारखाने में भी 500 केडल्यूपी के संयंत्र का कार्य प्रगति पर है, जिसे शीघ्र ही स्थापित कर दिया जाएगा.

    इसके अतिरिक्त उत्तर मध्य रेलवे के भवनों, जिसमें मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, विभिन्न स्टेशन, प्रशिक्षण केंद्र, अस्पताल भवनों, कारखानों आदि की छतों पर कुल 10 एमडल्यूपी क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना हेतु रेलवे एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी द्वारा निविदा आमंत्रित कर खोली जा चुकी है. इसमें आगरा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय सहित रेलवे अस्पताल, रनिंग रूम, ईदगाह एवं मथुरा स्टेशन का प्लेटफार्म संख्या-1 एवं द्वितीय एंट्री आगरा फोर्ट तथा धौलपुर स्टेशन और विभिन्न भवनों पर सौर ऊर्जा संयत्र लगाए जाएंगे.

    झांसी मंडल में मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, रेलवे अस्पताल, झांसी एवं ग्वालियर, स्टेशन भवन खजुराहो, छतरपुर, ग्वालियर स्टेशन के विभिन्न स्थानों, इलेक्ट्रिक लोकोशेड एवं अन्य भवनों में भी सौर ऊर्जा संयत्र लगाए जाने की सूची में शामिल हैं. इलाहाबाद मंडल में स्टेशन भवन मिर्जापुर, विन्ध्याचल, गोविन्द्पुरी, अलीगढ, बिन्दकी, दादरी आदि स्टेशनों के विभिन्न स्थानों के अतिरिक्त कानपुर के सेटा ट्रेनिंग सेंटर, इलेक्ट्रिक ट्रेनिंग सेंटर, इलेक्ट्रिक लोकोशेड एवं टीएमएस, न्यू कोचिंग काम्पलेक्स, गार्ड एवं ड्राइवर रनिंग रूमो के अतिरिक्त कानपुर, खुर्जा के अधिकारी विश्रामगृह एवं विभिन्न अस्पतालों सहित अन्य भवनों में भी सौर ऊर्जा संयत्र लगाए जाने की योजना है.

    इसी क्रम में वैगन रिपेयर वर्कशाप झांसी एवं रेल स्प्रिंग कारखाना, सिथौली, ग्वालियर में भी संयंत्र लगेंगे. उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय भवन की छत पर 100 केडब्ल्यूपी क्षमता, मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय भवन में 2X10 केडल्यूपी का सोलर प्लांट लगाया गया है. उत्तर मध्य रेलवे की रेलगांव, सुबेदारगंज, इलाहाबाद रेलवे कॉलोनी सहित विभिन्न आवासीय कालोनियों में भी सौर ऊर्जा आधारित एलईडी स्ट्रीट लाइटें भी लगाई जा रही हैं. इसमें रेलगांव, सुबेदारगंज, इलाहाबाद रेलवे कॉलोनी में 200 सोलर स्ट्रीटलाईट लगा दी गयी हैं, जिससे वर्तमान वित्तवर्ष के 4 महीनों – नवंबर 2016 से फरवरी 2017 के दरम्यान 3.70 लाख रु. की ऊर्जा बचत हुई है.

    उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद मंडल कार्यालय भवन, केंद्रीय चिकित्सालय आदि भवनो को समय-समय पर ऊर्जा संरक्षण के लिए पुरस्कृत भी किया गया है. उत्तर मध्य रेलवे के इन प्रयासों से जहां एक तरफ ऊर्जा की बचत हो रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण एवं कार्बन उत्सर्जन में भी कमी होगी.


    उत्तर मध्य रेलवे की 341 लेवल क्रासिंग सौर ऊर्जा से संचालित

    उत्तर मध्य रेलवे द्वारा लेवल क्रासिंगों पर संरक्षा सुरक्षित करने के उद्देश्य से उनको उर्जित करने एवं बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जा रहा है. उत्तर मध्य रेलवे के अधिकांश परिक्षेत्र में वर्ष भर समुचित सौर ऊर्जा की उपलब्धता रहती है और गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर लेवल क्रासिंग तक बिजली सप्लाई के लिए विशेष व्यवस्था वांछित होती है. ऐसी स्थिति में सौर ऊर्जा ही स्वाभाविक ऊर्जा स्रोत है.

    इसको ध्यान में रखते हुए सोलर पैनल लगाकर, उत्तर मध्य रेलवे की 341 लेवल क्रासिंगों-इलाहाबाद मंडल में 37, झांसी मंडल में 232 एवं आगरा मंडल में 72 को भी सौर ऊर्जा के माध्यम से चार्ज किया गया है. इससे लगभग 49786 यूनिट 3.96 लाख रु. प्रतिवर्ष की बिजली की बचत होती है. इसी क्रम में इलाहाबाद मंडल में 7, झांसी मंडल में 89 एवं आगरा मंडल में 13, कुल 109 लेवल क्रासिंगों को अगले कुछ समय में सौर ऊर्जा के माध्यम से चार्ज किया  जाएगा.

    इसके अतिरिक्त ऊर्जा संरक्षण की दृष्टि से इलाहाबाद मंडल के शक्तेशगढ़ स्टेशन पर सोलर पम्प की भी स्थापना की गई. उत्तर मध्य रेलवे के इन प्रयासों से जहां एक तरफ रेल संरक्षा सुनिश्चित हो रही है, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा एवं धन की स्वभाविक बचत भी हो रही है.


    संरक्षा, सुरक्षा एवं समयपालन पर विशेष जोर, इलाहाबाद मंडल का समयपालन 66%

    इलाहाबाद मंडल भारतीय रेल का एक महत्वपूर्ण मंडल है. भारतीय रेल का व्यस्ततम मार्ग हावड़ा-नई दिल्ली का अधिकतम भाग इलाहाबाद मंडल से ही होकर गुजरता है. इलाहाबाद मंडल द्वरा परिचालन क्षमता से अधिक गाड़ियों का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है. भारतीय रेल का मूल-मंत्र संरक्षा, सुरक्षा एवं समयपालन पर इलाहाबाद मंडल द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 में इलाहाबाद मंडल की समयपालन ‘पंक्चुअलिटी’ 36% थी. मंडल रेल प्रबंधक संजय कुमार पंकज, अपर मंडल रेल प्रबंधक ए. के. द्विवेदी एवं वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक अंशू पांडेय एवं मनू प्रकाश के सार्थक प्रयास से वित्तीय वर्ष 2016-17 में इलाहाबाद मंडल की समयपालन बढ़कर 45% हो गई है.

    इसी संदर्भ में 14 मार्च 2017 को इलाहाबाद मंडल का समयपालन 66% रही, जबकि होली स्पेशल एवं इलेक्शन स्पेशल गाड़ियों का संचालन भी किया जा रहा है. इसके अतिरिक्त औसत से ज्यादा मालगाड़ियों का संचालन भी किया गया. सामान्यतः प्रतिदिन 250 मालगाड़ियों का संचालन किया जाता है. समयपालन में सुधार हेतु परिचालन विभाग के अधिकारियों द्वारा विशेष निगरानी रखी जा रही है तथा किसी भी समयस्या के यथाशीघ्र निवारण हेतु अधिकारीगण कंट्रोल आफिस में उपस्थित रहते हैं, जिससे किसी भी विफलता का निराकरण शीघ्रातिशीघ्र किया जा सके.

    समयपालन के साथ-साथ संरक्षा एवं सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. रेलवे ट्रैक पर आवारा पशुओं की रोकथाम हेतु आरपीएफ के जवान एवं रेल कर्मचारी गांवों में जाकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं तथा नुक्कड़ नाटक एवं मोबाइल वीडियों वैन से भी लोगों को जागरुक किया जा रहा है. रेलवे ट्रैक के किनारे उगी घास को भी नष्ट किया जा रहा है तथा ट्रैक के किनारे गड्डे खोदकर ट्रैक को जानवरों से सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे ट्रैक पर न आ सकें.


    पांच दिनों का विशेष टिकट चेकिंग अभियान, नया कीर्तिमान

    महाप्रबंधक एम.सी. चौहान अपने पदभार ग्रहण के समय से ही लगातार रेलवे राजस्व को बढ़ाने तथा अधिक से अधिक यात्री सुविधा मुहैया कराये जाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. इस हेतु संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं, बल्कि विभिन्न यात्री सुविधाओं एवं योजनाओं पर प्रशासन की सकारात्मक दृष्टि बनी हुई है, जिसके कारण इस दिशा में आवश्यक सुधार भी परिलक्षित हो रहा है.

    इसी क्रम में उत्तर मध्य रेलवे द्वारा मार्च के माह दूसरे सप्ताह में पांच दिनों का विशेष टिकट जांच अभियान चलाया गया. उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक विपिन कुमार सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान के अंतर्गत इलाहाबाद, कानपुर, झांसी तथा ग्वालियर परिक्षेत्रों में सघन टिकट चेकिंग अभियान चलाया गया तथा साथ ही गंदगी फ़ैलाने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई. इस अभियान के अंतर्गत कुल मिलाकर 2118 व्यक्तियों के विरूद्ध जुर्माना लगाकर 8,10,920 रु. का राजस्व अर्जित किया गया.


    निशा तिवारी ने संभाला उ.म.रे. के मुख्य कार्मिक अधिकारी का पदभार

    सुश्री निशा तिवारी ने मुख्य कार्मिक अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद के पद का पदभार ग्रहण कर लिया. सुश्री तिवारी 1984 बैच की वरिष्ठ आईआरपीएस अधिकारी हैं. सुश्री तिवारी ने सहायक कार्मिक अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ के रूप में अपनी रेल सेवा सन 1987 में शुरू की थी. उत्तर मध्य रेलवे में ज्वाइन करने के पूर्व सुश्री तिवारी ने मुख्य कार्मिक अधिकारी (प्रशासन) दक्षिण पूर्व रेलवे, कोलकाता, पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर एवं मुख्य कार्मिक अधिकारी, आरडीएसओ, लखनऊ के पद पर भी कार्य किया है.


    उत्तर मध्य रेलवे के 9 कर्मचारियों को संरक्षा पुरस्कार

    प्रत्येक कर्मचारी को मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं दो हजार रु. का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया

    महाप्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे एम. सी. चौहान द्वारा 15 मार्च को रेल संरक्षा के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले 9 कर्मचारियों को महाप्रबंधक संरक्षा पुरस्कार प्रदान किया गया. श्री चौहान ने उत्कृष्ट श्रेणी की संरक्षा सुनिश्चित करने वाले इन कर्मचारियों को महाप्रबंधक संरक्षा पुरस्कार से पुरस्कृत किया. पुरस्कार वितरण के दौरान महाप्रबंधक द्वारा पुरस्कृत कर्मचारियों को बधाई दी गयी एवं भविष्य में भी इसी सजगता, सतर्कता एवं समर्पण के साथ कार्य करते रहने का आहवान किया गया.

    पुरस्कृत कर्मचारियों में शकील अहमद, लोको पायलट/इलाहाबाद एवं रविशंकर सिंह, सहायक लोको पायलट 3 सितंबर 2016 को गाड़ी सं.12295 इंजन नं. 22907/मुगलसराय पर कार्यरत थे. किमी. सं. 679/22-20 के मध्य 3-4 का रेल में गैप देखा, जिससे फिश प्लेट भी गायब थी. अविलंब आपात ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोका और इसकी सूचना कंट्रोल को दी. इसके बाद पीडब्ल्यूआई द्वारा 30 किमी. प्रति घंटा का कॉशन लगाया गया.

    वीरेन्द्र कुमार, स्टेशन मास्टर/बरहन 27 सितंबर 2016 को के-25 मालगाड़ी 6.27 बजे पास हो रही थी. इन्होंने ब्रेकवान से 2,3,4 गाड़ी का अवपथन देखा. तुरंत कार्यवाही करते हुए ओएचई सप्लाई बंद कराई, जिससे गाड़ी रूक गई. उसी समय दादरी थ्रू पास हो रही थी. अप तथा डाउन ओएचई ऑफ कराने से दोनों गाडि़यां खड़ी हो गईं.

    प्रदीप कुमार पाल, गार्ड/इलाहाबाद 17 अक्टूबर 2016 को सीपीसी मालगाड़ी में कार्य करने के बाद इलाहाबाद यार्ड में दूसरे गार्ड को चार्ज देने के पश्चात् सीपीसी मालगाड़ी के नीचे किमी. 825/1025 पर रेल फैक्चर देखा तथा सर्वसंबंधित को सूचित किया.

    विजय बहादुर, गेटमैन/कंसपुर गुगौली, गेट सं. 59-सी पर 17-1 की शिफ्ट में कार्यरत थे. गाड़ी सं. 12314 डाउन एक्सप्रेस में जेनरेटर कार ईआर 06856 एलडब्ल्ूएलआरआरएम में धुआं निकलता देखा. ओएचई बंद कराकर मालवा को एडवांस स्टाटर पर रोका, जिसे अग्निशमन यंत्र से बुझाया गया. टीएक्सआर द्वारा अगले जेनरेटर कार की कार्य प्रणाली को बंद कर दिया गया.

    बच्चू सिंह, टेक्नीशियन प्रथम/कै.वै./टुंडला 25 नवंबर 2016 को रोलिंग-इन परीक्षण के दौरान गाड़ी सं. 3483 में कोच सं. ईआर 99278 डब्लूजीएससीएन (एस-6) 8वां आर/एसएलआर डी/इंड ट्राली में लोवर हैंगर पिन मिसिंग की सूचना एसएसई/कै.वै. को देकर लगवाया और संरक्षा सुनिश्चित की.

    शैलेन्द्र साहनी, लोको पायलट/कानपुर एवं जुनैद आलम, सहायक लोको पायलट/कानपुर ने 28 नवंबर 2016 को डाउन में आती गुड्स ट्रेन जीएन-187 में हैंगिंग पार्ट देखा, संरक्षित परिचालन को दृष्टिगत रखते हुए हैंगिंग पार्ट के विषय में वाकी-टाकी के माध्यम से डाउन ट्रेन के लोको पायलट को सूचित किया. इनकी सूचना पर गाड़ी को रसूलाबाद स्टेशन पर मेनलाइन में नियंत्रित किया तथा गाड़ी की जांच करने पर ब्रेकवान से दूसरे वैगन सं. 22091578565 एससी में हैंगिंग पार्ट लटकता पाया गया तथा गार्ड द्वारा टीएक्सार की मांग की गई.

    महाप्रबंधक स्तर पर संरक्षा पुरस्कार हेतु प्रत्येक मंडल द्वारा मंडल रेल प्रबंधक के अनुमोदन से ऐसे कर्मचारियों का नाम इस पुरस्कार हेतु अग्रसारित किया जाता है, जिन्होंने दुर्घटना बचाने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया हो. प्राप्त प्रस्तावों की मुख्य संरक्षा अधिकारी, मुख्य परिचालन प्रबंधक, प्रमुख मुख्य अभियंता, वरि. उप महाप्रबंधक की समिति द्वारा समीक्षा की जाती है. घटना की गंभीरता एवं कर्मचारी द्वारा दिखाई गई तत्परता, सजगता एवं सूझबूझ को देखते हुए समिति द्वारा अपनी अनुशंसा के साथ प्रस्ताव महाप्रबंधक की स्वीकृति हेतु अग्रसारित कर दिया जाता है. महाप्रबंधक की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात तीनों मंडल से कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र, मेडल और नकद पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाता है. प्रत्येक कर्मचारी को मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं 2000 रु. का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया.

सम्पादकीय