कॉफ़ी टेबल बुक - ‘फुटमार्क्स ऑन द सैंड्स ऑफ टाइम’ का विमोचन

    लखनऊ मंडल के उद्भव से लेकर अब तक की विकास यात्रा को सहज प्रस्तुतीकरण

    गोरखपुर ब्यूरो : पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने हाल ही में महाप्रबंधक सभाकक्ष, गोरखपुर में आयोजित एक समारोह में पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल पर आधारित कॉफ़ी टेबल बुक - ‘फुटमार्क्स ऑन द सैंड्स ऑफ टाइम’ का विमोचन किया. इस अवसर पर अपर महाप्रबंधक एस. एल. वर्मा, सभी विभाग प्रमुख और तीनों मंडलों के मंडल रेल प्रबंधक एवं मुख्यालय तथा मंडलों के सभी वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित थे.

    इस अवसर पर महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने ‘कॉफ़ी टेबल बुक’ को अत्यंत रूचिकर एवं जानकारियों से भरपूर बताया. उन्होंने कहा कि यह किताब लखनऊ मंडल के उद्भव से लेकर अब तक की विकास यात्रा को बहुत ही सहज ढ़ंग से प्रस्तुत करने में समर्थ है तथा पाठकों की रूचि शुरू से अंत तक बनी रहती है. पुस्तक की लेखिका श्रीमती ज्योति भाष्कर कैरो, सीनियर ईडीपीएम, लखनऊ के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने उनकी लेखन क्षमता की सराहना की तथा पुस्तक के प्रकाशन में लखनऊ मंडल के मंडल रेल प्रबंधक आलोक सिंह सहित सभी अधिकारियों के सहयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने पुस्तक की लेखिका को प्रोत्साहन स्वरूप पांच हजार रुपए का व्यक्तिगत पुरस्कार एवं लखनऊ मंडल को पांच हजार रुपए का सामूहिक पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा भी की.

    मंडल रेल प्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल आलोक सिंह ने पुस्तक के प्रकाशन में समय-समय पर दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों एवं मार्गदर्शन के लिए महाप्रबंधक राजीव मिश्र के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि महाप्रबंधक श्री मिश्र के सुझावों को समाहित करने के परिणामस्वरूप यह ‘कॉफ़ी टेबल बुक’ अत्यंत पठनीय बन गई है तथा पाठकों के बीच इसकी लोकप्रियता निष्चित रूप से असंदिग्ध होगी.

    पुस्तक की लेखिका श्रीमती ज्योति भाष्कर कैरो ने विमोचन समारोह में अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह पुस्तक लखनऊ मंडल के वर्ष 1969 में उद्भव से लेकर आज तक के कालखंड के ऐतिहासिक तथ्यों एवं विकास प्रक्रिया को विस्तृत वर्णन के साथ प्रमाणिक रूप से प्रस्तुत करती है. उन्होंने कहा कि गौरवशाली अतीत की झलक प्रस्तुत करने के साथ ही विकास प्रक्रिया में लखनऊ मंडल के समस्त परिदृष्य को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है. पुस्तक में जहां एक ओर यह छोटी लाइन के विभिन्न खंडों एवं कार्य-प्रणाली के इतिहास से लोगों को अवगत कराने का प्रयास किया गया है, वहीं आधुनिकता के दौर में विद्युतीकरण, दोहरीकरण, आमान परिवर्तन, नई रेल लाइन, सेटेलाइट स्टेशन आदि का सजीव चित्रण भी प्रस्तुत किया गया है.

सम्पादकीय