डीसीटीआई सहित सीनियर सुपरवाइजरों को ईएफआर थमाए जाने से नाराजगी

    अधिकारियों को प्रोटोकॉल, एस्कार्टिंग एवं व्यक्तिगत कार्यों का मोह त्यागना होगा

    सैकड़ों अक्षम लोगों को ढ़ोने के बावजूद निर्धारित लक्ष्य पूरा कर रहा टिकट चेकिंग स्टाफ

    मुंबई मंडल के 1400 टिकट जांच कर्मियों ने किया अव्यावहारिक आदेश का पुरजोर विरोध

    मुंबई : इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ ऑर्गेनाइजेशन (आईआरटीसीएसओ) ने मध्य रेलवे पर टिकट चेकिंग कैडर के सुपरवाइजर सीटीआई को एक्स्ट्रा फेयर रिसीट (ईएफआर) बुक दिए जाने और उनसे टिकट जांच कार्य कराने का व्यावहारिक विरोध किया है. उल्लेखनीय है कि 29/30 जनवरी 2017 को मध्य रेलवे के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (सीसीएम) की ओर से जारी आदेश (सं. सी/745/एक्स/टिकट चेकिंग/मैनिंग लिंक्स) के अनुसार प्रशासनिक, प्रोटोकॉल और अन्य कार्यालयीन कामकाज में लगे मंडल मुख्य टिकट निरीक्षक (डीसीटीआई) सहित सभी सीनियर टिकट जांच सुपरवाइजरों को भी ईएफआर बुक देने और उनसे वास्तविक टिकट जांच कार्य कराए जाने का निर्देश जारी किया गया है. इस अव्यावहारिक निर्देश का मुंबई मंडल के सभी 1400 टिकट जांच कर्मचारियों ने पुरजोर विरोध किया है.

    हालांकि सीसीएम की ओर से जारी किए गए आदेश में रेलवे बोर्ड के 26 दिसंबर, 1997 के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि टिकट जांच गतिविधियों का सुपरविजन करने वाले मुख्य टिकट निरीक्षक (सीटीआई) एवं एंटी-फ्रॉड इंस्पेक्टर्स को ईएफआर जारी नहीं दिए जाने पर रेलवे बोर्ड ने कड़ा ऐतराज जताया था, जिसके परिणामस्वरूप स्टेशनों और चलती ट्रेनों में प्रभावी टिकट जांच नहीं हो पा रही थी. इसी क्रम में मानव संसाधन का अपव्यय रोकने के लिए रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया था कि सीटीआई एवं एंटी-फ्रॉड इंस्पेक्टर्स सहित टिकट चेकिंग कैडर के सभी कर्मचारी टिकट जांच का वास्तविक कार्य करेंगे, इसके लिए बिना किसी के साथ कोई रियायत किए सभी टिकट जांच कर्मचारियों को ईएफआर जारी की जाए.

    इसी के साथ सीसीएम के उक्त आदेश में यह भी कहा गया है कि रेलवे बोर्ड के 4 सितंबर, 2009 के पत्र (सं. 2009/टीजी-वी/5/2) के पैरा-6 में कहा गया है कि ‘स्टॉक कीपिंग ड्यूटी में लगे टिकट चेकिंग स्टाफ को टिकट जांच ड्यूटी करने की अनुमति नहीं होगी और उन्हें ईएफआर बुक जारी नहीं की जाएगी.’ इसके साथ ही उक्त आदेश में सीसीएम कार्यालय के दि. 03.12.2013, 30.06.2014 और 06.08.2015 को जारी निर्देशों को भी ध्यान में रखने को कहा गया है, जिनमें टिकट जांच से इतर कार्यों में लगे टिकट जांच कैडर के कर्मचारियों को उन कार्यों से हटाकर टिकट जांच में लगाए जाने को कहा गया था. सीसीएम के आदेश में कहा गया है कि वास्तविक अर्थों में टिकट जांच कर्मचारियों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि प्रत्येक यात्री की टिकट जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि यात्री लिए गए टिकट के अनुसार सही श्रेणी में यात्रा कर रहा है तथा किसी भी प्रकार से राजस्व की हानि होने से रोकी जाए.

    सीसीएम/म.रे. के उपरोक्त आदेश का कड़ा विरोध करते हुए आईआरटीसीएसओ के राष्ट्रीय सह-महासचिव हेमंत सोनी ने 18 जनवरी, 2017 को रेलमंत्री और सीसीएम को पत्र भेजकर इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. सोनी ने लिखा है कि सीनियर सीटीआई’ज को टिकट जांच कार्यों के सुपरविजन के साथ ही स्टाफ का पास/पीटीओ जारी करने, जारी की गई और स्टॉक में उपलब्ध ईएफआर का रिकॉर्ड रखने, चार्ट का रिकार्ड रखने, टिकट जांच अर्निंग को मेनटेन करने तथा प्रोटोकॉल ड्यूटी करने जैसे अन्य तमाम कार्यालयीन कार्य भी करने होते हैं. ऐसे में यदि यह सीनियर स्टाफ स्टेशनों/प्लेटफार्मों पर कार्य करेगा, तो बाकी सभी स्टाफ को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा और प्रशासनिक कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित होगा. उन्होंने लिखा है कि स्टाफ पर बेवजह और नियम विरुद्ध अर्निंग करने का दबाव डालना गलत है. उनका यह भी कहना है कि यदि प्रशासन ने उक्त आदेश को वापस नहीं लिया, तो इसके विरोध में टिकट जांच कर्मियों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.

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    सोनी का कहना है कि उपरोक्त के अलावा स्टाफ का मस्टर (डिटेल्स) बनाने सहित टिकट जांच प्रोग्राम बनाने, मेल/एक्स. गाड़ियों को मेड कराने, जांच अभियान चलाकर रेल राजस्व को बढ़ाने और अनियमित यात्रा को रोकने के लिए वरिष्ठ टिकट जांच कर्मचारी पर्यवेक्षक के रूप में काम करते हैं. इसके साथ स्टाफ से बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए सीनियर सुपरवाइजर स्टाफ का मार्गदर्शन, निर्देशन और नियंत्रण अनिवार्य होता है. उन्होंने लिखा है कि वाणिज्य विभाग की तरफ से मुंबई मंडल के डीसीटीआई सहित सभी सुपरवाइजरी स्टाफ को ईएफआर लेकर स्टेशनों और प्लेटफार्मों पर टिकट जांच के लिए निर्देशित किया गया है. यदि डीसीटीआई सहित समस्त वरिष्ठ टिकट जांच सुपरवाइजर स्टाफ प्लेटफार्म पर जाकर खुद रसीद बनाएगा, तब मंडल के 1400 टिकट जांच कर्मियों के उपरोक्त कार्यालयीन कार्य कौन करेगा. इससे सामान्य प्रशासनिक कामकाज में भारी रूकावट आएगी.

    वरिष्ठ स्टाफ का कहना है कि टिकट जांच कर्मियों की चिंता वाजिब है, क्योंकि सीसीएम का उपरोक्त आदेश तब तक उचित नहीं कहा जा सकता है, जब तक कि उक्त वरिष्ठ टिकट जांच सुपरवाइजरी स्टाफ की जगह कार्यालयीन कामकाज के लिए पर्याप्त गैर-टिकट चेकिंग स्टाफ की नियुक्ति मंडल मुख्यालय में नहीं की जाती है. इसके साथ ही प्रशासन द्वारा आए दिन किसी न किसी अधिकारी को एस्कॉर्ट करने (प्रोटोकॉल) के लिए जब स्टाफ की मांग की जाती है, तब यही डीसीटीआई ही उनके लिए इसकी व्यवस्था करता है. उक्त आदेश के परिप्रेक्ष्य में यदि वही डीसीटीआई प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की टिकट जांच कर रहा होगा, अथवा उनकी रसीद बना रहा होगा, तब अधिकारियों को प्रोटोकॉल के लिए स्टाफ कौन मुहैया कराएगा?

    उनका यह भी कहना है कि उपरोक्त के अलावा किसी न किसी श्रमिक संगठन का सहारा लेकर किसी भी बहाने से डीसीटीआई कार्यालय में जाकर बैठ जाने वाली महिला कर्मियों तथा अक्षम स्टाफ का भी कोई न कोई उचित समायोजन और टिकट जांच में उनके हिस्से की भरपाई का भी हल प्रशासन को निकालना होगा. उल्लेखनीय है कि कल्याण सीटीआई के मातहत एक ऐसी महिला कर्मी को सौंप दिया गया है, जिसे उसके घर से लाने और वापस उसके घर छोड़ने के लिए किसी न किसी स्टाफ का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि ऐसे नाकारा स्टाफ को वीआरएस अथवा जबरन सेवानिवृत्ति देने के बजाय प्रशासन द्वारा उन्हीं टिकट जांच कर्मियों के भरोसे इन्हें जबरन ढ़ोया जा रहा है, जिन पर अर्निंग देने के लिए प्रशासन हमेशा उनके सिर पर सवार रहता है.

    उल्लेखनीय है कि सीसीएम के उपरोक्त आदेश पर अब तक सिर्फ मुंबई मंडल के ही सीनियर टिकट जांच सुपरवाइजरों को ईएफआर बुक थमाई गई है, जबकि मध्य रेलवे के अन्य मंडलों में अब तक इस पर कोई अमल नहीं किया गया है. हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि मुंबई मंडल के जिन 18 सीनियर टिकट जांच सुपरवाइजरों को यह ईएफआर दी गई है, उन पर प्रशासन ने अब तक स्टेशन या प्लेटफार्म पर जाकर यात्रियों के टिकट चेक करने का कोई दबाव नहीं बनाया है. परंतु उनसे ईएफआर भी अब तक वापस नहीं ली गई. ऐसे में उन पर अर्निंग देने अथवा रसीद बनाने का दबाव बना हुआ है, अन्यथा एकाउंट्स विभाग के निरीक्षक द्वारा उनसे जवाब-तलब किए जाने पर उनके पास कोई वाजिब जवाब नहीं होगा, तब विभागीय कार्रवाई की गाज भी उन पर गिर सकती है. अतः प्रशासन द्वारा इस गंभीर समस्या का कोई सर्वमान्य हल अविलंब खोजा जाना चाहिए.

सम्पादकीय