रेलवे बोर्ड की अड़ीबाजी और कैट के आदेश का पेंच

    रेलवे की बदहाली का प्रमुख कारण स्टोरकीपर की पुनर्नियुक्ति..

    और रेलवे बोर्ड के सदस्यों तथा जोनल महाप्रबंधकों को कठपुतली बना दिया जाना है

    सुरेश त्रिपाठी

    दक्षिण मध्य रेलवे और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधकों की पोस्टिंग में रेलवे बोर्ड की अड़ीबाजी और कैट के आदेश का पेंच फंसा हुआ है. यही कारण है कि पिछले एक महीने से ज्यादा समय से खाली दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक की पोस्ट पर किसी सक्षम अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो पाई है. जबकि इसी महीने 31 जनवरी को उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के महाप्रबंधकों की दो पोस्टें और खाली होने जा रही हैं. इसके अलावा अगले महीने फरवरी में पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक की पोस्ट भी खाली होगी, जबकि मेंबर ट्रैक्शन, रेलवे बोर्ड के भी 28 फरवरी को सेवानिवृत्त होने एक महाप्रबंधक की पोस्ट और खाली हो जाएगी. इसके साथ ही आरडीएसओ के डीजी की पोस्ट भी फरवरी में ही खाली हो रही है.

    रेलवे बोर्ड के विश्वसनीय सूत्रों ने ‘रेलवे समाचार’ को बताया कि इस दरम्यान दक्षिण मध्य रेलवे, सिकंदराबाद के लिए वी. के. यादव और उत्तर रेलवे, नई दिल्ली के लिए आर. के. कुलश्रेष्ठ की महाप्रबंधक के पद पर पोस्टिंग के लिए उनके नाम पीएमओ को भेजे गए हैं. मगर इससे पहले कैट ने मगरूब हुसैन (आईआरएसईई, डीओबी-29.03.1959, डीआईटीएस-27.03.1982) और विश्वेश चौबे (आईआरएसई, डीओबी-01.07.1960, डीआईटीएस-11.05.1982) के नाम जीएम पैनल-2016-17 में 31 मार्च 2017 से पूर्व शामिल किए जाने का आदेश दिया है.

    इसके साथ ही कैट ने यह भी आदेश दिया है कि आपात स्थितियों में और यदि जरुरत महसूस की जाती है, तो मगरूब हुसैन से जूनियर अधिकारी की महाप्रबंधक पद पर पोस्टिंग की जा सकती है, मगर उससे पहले श्री हुसैन के लिए एक पोस्ट खाली रखी जानी चाहिए. बोर्ड के सूत्रों ने यह भी बताया कि रेलवे बोर्ड ने कैट को यह लिखित आश्वासन देकर स्वीकार किया है कि श्री हुसैन को न सिर्फ जीएम पैनल में एनरोल किया जाएगा, बल्कि उन्हें महाप्रबंधक भी बनाया जाएगा. उल्लेखनीय है कि श्री हुसैन, वी. के. यादव से वरिष्ठ हैं, जीएम पैनल में एनरोल होने पर उनका वरिष्ठता क्रमांक श्री यादव की जगह 23 होगा, जबकि श्री चौबे का वरिष्ठता क्रमांक एस. एस. स्वाइन के नीचे 28 होगा. इसके साथ ही यह भी महसूस किया जाता है कि कैट के आदेश एकदम स्पष्ट नहीं होने से सरकार और प्रशासन को अपनी मनमानी करने की छूट मिल जाती है.

    दक्षिण मध्य रेलवे की पहले खाली हुई जीएम पोस्ट पर श्री यादव को और उत्तर रेलवे की पोस्ट पर श्री कुलश्रेष्ठ को नामांकित करके श्री हुसैन की वरिष्ठता और कैट के आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है. सूत्रों ने इसका मतलब यह निकाला है कि रेलवे बोर्ड श्री हुसैन को ओपन लाइन में नहीं, बल्कि किसी प्रोडक्शन यूनिट में जीएम बनाना चाहता है. उल्लेखनीय है कि फरवरी में आरडीएसओ के डीजी की पोस्ट भी खाली हो रही है, जहां रेलवे बोर्ड श्री हुसैन को भेजने की योजना में है. जबकि सूत्रों का यह भी कहना है कि श्री हुसैन को उनके पूरे कैरियर में कभी एक वार्निंग लेटर भी जारी नहीं हुआ है, उनका पूरा कैरियर एकदम साफ-सुथरा रहा है. यही स्थिति श्री चौबे के कैरियर की भी है, इसके बावजूद इन दोनों अधिकारियों को जीएम पैनल में शामिल नहीं किया गया. यह बात उन्हें जीएम पैनल फाइनल होने के बाद पता चली थी, तब उन्होंने कैट का रुख किया था.

    यह तो सर्वज्ञात है ही कि जो भी अधिकारी अपने अधिकार और न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है, उसके प्रति रेलवे बोर्ड का रवैया एकदम से सौतेला और शत्रुतापूर्ण हो जाता है, फिर भले ही वह कितना भी ईमानदार या साफ-सुथरे रिकॉर्ड वाला ही क्यों न रहा हो. इसकी मिशल उक्त दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही महेश कुमार गुप्ता भी हैं. यह भी पता चला है कि श्री यादव उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक बनने की इच्छा रखते हैं. कैट के आदेश के अनुसार यदि सही समय पर श्री हुसैन का जीएम पैनल में एनरोलमेंट किया जाए, तो उन्हें दक्षिण मध्य रेलवे और श्री यादव को उत्तर रेलवे का महाप्रबंधक बनने का मौका मिल सकता है. इसके बाद आर. के. कुलश्रेष्ठ और सच्चिदानंद सिंह को क्रमशः उत्तर मध्य रेलवे और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में भेजा जा सकता है. वर्तमान में इन चारों महाप्रबंधकों की पोस्टिंग एकसाथ किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया जाना ही वास्तव में सही निर्णय होगा.

    रेलवे बोर्ड के सूत्रों का यह भी कहना है कि वर्तमान कुछ महाप्रबंधकों में दहशत बनाए रखने और पोस्टिंग के लिए तैयार वरिष्ठ अधिकारियों को दिग्भ्रमित करने के लिए ‘स्टोरकीपर’ ने यह भी हवा गर्म की हुई है कि जिन महाप्रबंधकों के क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों के दरम्यान रेल दुर्घटनाएं हुई हैं, उन्हें दूसरे जोनों में अथवा रेलवे बोर्ड में शिफ्ट किया जा सकता है. जबकि यह बात सर्वज्ञात है कि जिन दो जोनों में पिछले दो महीनों के दरम्यान बड़ी रेल दुर्घटनाएं हुई हैं, उन जोनों के महाप्रबंधक इसी महीने सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ऐसे में यह बात समझ से बाहर है कि किन महाप्रबंधकों को अन्यत्र शिफ्ट किए जाने का शगूफा स्टोरकीपर ने हवा में छोड़ रखा है? रेलवे की बदहाली का प्रमुख कारण स्टोरकीपर की पुनर्नियुक्ति और रेलवे बोर्ड के सदस्यों तथा जोनल महाप्रबंधकों को कठपुतली बना दिया जाना है.

सम्पादकीय