नीरव भाई मोदी के नाम खुला पत्र

    "आप बेफिकर होकर देश वापस आओ"

    व्यंग्य : रवीन्द्र कुमार*

    नीरव भाई को मेरी यानि नानू भाई की जय श्री किशना ! मैं समझता हूं नीरव भाई ! ये लोग खाली-पीली शोर कर रहे हैं - भाग गया ! भाग गया ! बैंको का तेरह हज़ार करोड़ रुपया लेकर भाग गया ! आप भाग गए ! आपको भगा दिया ! ये गांडा हैं, जानते ही नहीं कि आपका तो नाम ही नीरव है, बोले तो शोर रहित. इसमें आपका क्या गुनाह? जैसा नाम वैसा काम. ये मूरख क्या जानें? बारीक बात है. यह इनके कूढ़-मगज़ में पड़ने वाली नहीं. फिर कह रहे हैं कि आपने बैंक से उधार लिया है. अरे, तो बैंक होती काय के लिए है ? मैं सू बोलूं सू आपने तो उल्टे बैंकों की मदद की है. देखो न कैसे चोर-उचक्के पूरा का पूरा एटीएम ही उखाड़ ले जाते हैं. अब आप पर बैंक का पैसा है, ये आप जानते हैं, बैंक जानती है, आपस की बात है, इसमें लोचा कहां है? खाते-कमाते उधार भी चुकता हो जाना है. आप टेंशन न लें. ये कौव्वा लोग का तो काम ही काँव-काँव करना है!

    संत-महात्माओं की भूमि पर यह चार्वाक-दर्शन के खिलाफ जाता है. आप से पहले भी भारत की पावन भूमि पर अनेक महापुरुष बहुराष्ट्रीय हुए हैं. यहां नाम लेना ठीक नहीं. किसी का छूट गया, तो बुरा भी मान सकता है. मजे की बात ये है, उधार बैंक का लिया है, वो भी सरकारी बैंक का, न तो बैंक कुछ कह रही है, न सरकार. बस ये विपक्ष को न जाने क्या पड़ी है, बावेला मचाया हुआ है. इन सब को ‘नीरव’ कर दो आप तो. इन्हें आप पर गर्व होना चाहिए. आपके तौर-तरीके, बोले तो ‘मॉडस ऑपरेंडाई’ इन्हें सिलेबस में डाल के प्राइमरी से लेकर बिजनस स्कूल तक पढ़ाई जानी चाहिए. आजकल वैसे भी चारों ओर सिलेबस रिवाइज करने की मुहिम चली हुई है. मैनेजरों की भावी पीढ़ी और उद्यमियों को बताया जाए कि हमारे एक हिंदू भाई ने कितनी तरक्की की है, और कर सकता है. ऐसे कर सकता है कोई अन्य धर्मावलम्बी? बस सैकुलर.. सैकुलर का गीत गाते रहते हैं. इससे कुछ होना-जाना नहीं है. बैंक की तो टैग लाइन ही थी ‘दि नेम यू कैन बैंक अपॉन’ अब आपने बैंक किया, तो लगे हो-हल्ला करने. वैसे जेटली जी ने आपका काफी बचाव किया है, उन्होने जेठा भाई माल्या का भी बहुत बचाव किया था. “न कांग्रेस अनाप-शनाप, अंधाधुंध लोन देती, न नीरव को देश छोड़ कर जाना पड़ता.” लोग कितने खराब होते हैं देखो ! आपके सारे उपकार, सारे कॉकटेल, सारे स्टेज शो भूल गए, कहते फिर रहे हैं: “(नी)रव ने बना दी जोड़ी..!!“

    हमें पता है ‘हीरा है सदा के लिए’. आप हीरे के सौदागर हैं, सो आप भी सदा के लिए हैं. शाश्वत हैं, अमर हैं.. आपको यह वरदान प्राप्त है. अब आप देखिए आपने लंदन में शुतुरमुर्ग के पंखों की एक जैकट पहन रखी थी. ये बेवकूफ उसी को रो रहे हैं कि 80 लाख की थी कि एक करोड़ की थी. अरे भाई ! तो क्या हुआ लंदन में मुंबई के फैशन स्ट्रीट के या दिल्ली के सरोजिनी नगर के सस्ते कपड़े पहनकर देश की नाक कटवाएं ! इतनी छोटी सी बात के लिए मगजमारी करते हैं. ये देश की इज्जत, मान-सम्मान का सवाल है. जैसे शुतुरमुर्ग रेत में मुंह डाल कर निश्चिंत हो जाता है कि उसे कोई नहीं देख रहा, हू-ब-हू वैसे ही आपकी भी प्लानिंग ये थी कि शुतुरमुर्ग के पंखों की जैकट पहन आपने भी छिप जाना है. बुरा हो इन खोजी पत्रकारों और मोबाइल में कैमरा डालने वालों का. इतनी दाढ़ी-मूंछ में भी आपको पहचान लिए और लगे आपको ‘हरैस’ करने. आपने सही ही इनके मुंह पर तमाचा मारा ये कहकर कि ‘नो कमेंट्स’. सब हाथ मलते रह गए. नहीं ये तो सोचे थे दो-चार दिन टीवी पर टीआरपी बढ़ाते रहते. कौन जाने कुछ प्रमोशन कुछ इनाम-इकराम झटक लेने में कामयाब हो जाते.

    दरअसल, हमारे देश में कोई किसी को खुश या सफल होते नहीं देख सकता. उसे सहन ही नहीं है कि अगला कैसे इतनी तरक्की कर गया. लग जाते हैं टाँग खींचने और मीन-मेख निकालने में.. पर वांदा नहीं.. ये गिरफ्तारी, ये रैड कॉर्नर नोटिस, ये सब नटवर-नागर की लीला है. भूल गए? मैंने कहा न ‘हीरा है सदा के लिए’. आप तो हमारे कोहनूर हो. लंदन-फंदन क्या होता है जी, आदमी व्यापार की खातिर आदिकाल से देश-देश नए-नए तटों पर जाता रहा है. इसमें नया क्या है?

    छोटे लोग, छोटी सोच.. कहते फिर रहे हैं कि आप बड़े मँहगे होटल में रह रहे हैं. अरे नहीं तो क्या ‘स्लम’ में रहें..! दरअसल ये खुद जब जाते हैं तो बजट होटल में रुकते हैं ‘ब्रैड एंड ब्रेकफास्ट’ वाले में और भुक्खड़ लोग ब्रेकफास्ट इतना ठूंस-ठूंस कर करते हैं कि लंच तो लंच इनकी कोशिश होती है कि डिनर भी न करना पड़े. तो मोठा भाई ! आप आना चाहो तो आ जाओ, कोई हरकत नहीं. ‘अपने’ लोग यहां हैं जो सब ‘एडजस्ट’ कर देंगे. बैंक के अंदर क्या, बाहर क्या.. बस आप तो आकर जिसकी भी सरकार हो उसको समर्थन का ऐलान कर दीजिए कि आपसे जो भी बन पड़ेगा तन-मन-‘धन’ से देश निर्माण में लगा देंगे. इस सेन्टेंस के सहारे हमारे नेता लोग सन सैंतालीस से अपनी गाड़ी चला रहे हैं. आप चाहो तो राज्यसभा की मैम्बरी की बात चलाऊं? आप बेफिकर होकर देश वापस आओ. कुछ दिन तो नहीं, अब सारे दिन गुजारो गुजरात में. भूल गए? ‘हीरा है सदा के लिए..!!’

    * श्री रवीन्द्र कुमार (आईआरपीएस) दक्षिण मध्य रेलवे से सेवानिवृत्त प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी हैं.

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