'अखिल भारतीय साहित्य परिषद' का सम्मलेन संपन्न

    बंगलुरु : अखिल भारतीय साहित्य परिषद, कर्नाटक के दोनों प्रांतों - दक्षिण कर्नाटक और उत्तर कर्नाटक - का सम्मेलन शनिवार, 11 जून को बंगलुरु के राष्ट्रोत्थान भवन के सभागार में संपन्न हुआ. सम्मेलन की अध्यक्षता कर्नाटक प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. दोड्डे रंगेगौड़ा ने किया. इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में महाराष्ट्र प्रदेश के महामंत्री डॉ. दिनेश प्रताप सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे. अखिल भारतीय साहित्य परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री नारायण सिविरे विशिष्ट अतिथि थे. सम्मलेन के चार सत्रों का सुचारु संचालन श्रीमती छाया भगवती ने किया और दुभाषिये का कार्य पत्रकार वृषांक भट ने किया.

    डॉ. दिनेश प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद देश भर में सभी भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों, प्रकाशकों, पुस्तक विक्रेताओं, पुस्तकालयों के संचालकों और पाठकों को एकजुट करने के साथ ही देश का साहित्यिक वातावरण बदलने का कार्य कर रहा है. उन्होंने परिषद द्वारा किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यों, साहित्यिक यात्राओं, संगोष्ठियों और प्रकाशनों का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत किया. जबलपुर में 6, 7, 8 अक्टूबर को होने वाले परिषद के तीन दिवसीय त्रिवार्षिक अधिवेशन की भी जानकारी दी. इस मौके पर नारायण सिविरे ने नासिक में सम्पन्न चिंतन बैठक का वृतांत रखा और ‘साहित्य परिक्रमा’ की सदस्यता बढ़ाने का आग्रह भी किया. अध्यक्ष ने कर्नाटक के साहित्यिक वातावरण और परिषद के कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि परिषद के साथ प्रदेश के बड़े सहित्यकार भी जुड़ रहे हैं.

    सम्मेलन में सिरसी, यल्लापुर, बागलकोट, बेंगलुरु नगर, बेंगलुरु ग्रामांतर, रामनगर, दोड़दाबल्लपुर, मुलबागिलु, मालूर, मैसूर, हासन, बटवाल, शिवमोगा, उडुप्पी, श्रृंगेरी, कोप्प, उत्तमेश्वर इत्यादि इकाईयों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे. सभी शाखाओं के सचिवों ने अपने वृत्तांत प्रस्तुत किए. सम्मेलन में सर्वश्री जगदीश भंडारी, गणपति बोल्गुद्दे, एस. जी. कोटि, मधुकर, श्रीनाथ, संतोष, मलिकार्जुन, जयानंद, दिनेन्द्र, सुब्बापन्न, गणेश भट, सुरेश कलकेरे और सुश्री पवित्रा, कुमारी तन्वी सहित कुल 54 (43 पुरुष और 11 महिलाएं) पदाधिकारी उपस्थित थे. सरस्वती वंदना के साथ शुरू हुए सम्मलेन का समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ.

सम्पादकीय